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29 नवंबर, 2020|4:13|IST

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बिहार चुनाव : कहीं सीधी तो कई विधानसभा सीटों पर त्रिकोणात्मक लड़ाई

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रविवार शाम छह बजे चुनाव प्रचार खत्म हो जाएगा। भागलपुर जिले की पांच सीटों पर होने वाले मतदान की तस्वीर भी अब साफ होने लगी है। जिले में कहीं सीधी तो कहीं त्रिकोणात्मक लड़ाई है। हर सीट पर कांटे की टक्कर देखी जा रही है। हालांकि,  जिन सीटों पर चुनाव होना है, उनमें दो पर राजद, दो पर जदयू व एक पर कांग्रेस का कब्जा है।

सबकी नजरें भागलपुर विधानसभा सीट पर हैं। पूर्वी बिहार की यह वीआईपी सीट मानी जाती है। भाजपा के गढ़ इस सीट पर पिछले दो चुनावों से कांग्रेस का कब्जा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में अश्विनी कुमार चौबे के निर्वाचित होने के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। 2015 के चुनाव में भी यह सीट कांग्रेस के कब्जे में रही। 2015 में दूसरे स्थान पर रहे केन्द्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत की जगह भाजपा ने इस बार जिलाध्यक्ष रोहित पांडेय को प्रत्याशी बनाया है। लोजपा ने यहां से डिप्टी मेयर राजेश वर्मा को उतारा है। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सैयद शाह अली सज्जाद रालोसपा से मैदान में हैं।

सियासी जानकारों का मानना है कि लोजपा प्रत्याशी भाजपा के परंपरागत वोट तो रालोसपा प्रत्याशी कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। भाजपा के विजय प्रसाद साह निर्दलीय मैदान में हैं। पिछले चुनाव में 15 हजार से अधिक वोट लाकर साह ने मजबूत उपस्थित दर्ज करायी थी। भाजपा प्रत्याशी अर्जित शाश्वत चौबे 10658 मतों से हार गए थे। रालोसपा प्रत्याशी लड़ाई को बहुकोणीय बनाने में जुटे हुए हैं।

नाथनगर सीट पर भी लड़ाई कांटे की है। एक उपचुनाव के अलावा चार बार जदयू लगातार इस सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है। 2019 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन विधायक अजय मंडल के निर्वाचित होने के बाद हुए उपचुनाव में लक्ष्मीकांत मंडल ने जीत दर्ज की। पार्टी ने फिर उन पर फिर भरोसा जताया है। हालांकि, टिकट को लेकर पार्टी नेताओं में काफी विरोध हुआ था। राजद नेता अशोक कुमार बसपा से चुनाव मैदान में हैं। बागियों ने दोनों गठबंधन के प्रत्याशियों की टेंशन बढ़ा दी है। लोजपा से अमर सिंह कुशवाहा चुनाव मैदान में हैं। यहां भी लड़ाई त्रिकोणीय होने की उम्मीद है।  पीरपैंती सीट पर लड़ाई त्रिकोणात्मक दिख रही है। इस सीट पर भाजपा के पूर्व विधायक अमन कुमार निर्दलीय मैदान में हैं। राजद और भाजपा ने अपने पुराने प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है।

गोपालपुर सीट पर राजद और जदयू के बीच सीधी लड़ाई दिख रही है। हालांकि लोजपा प्रत्याशी चुनाव को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं। यहां से नरेन्द्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। बिहपुर सीट पर राजद और भाजपा में मुकाबला मजबूत है। कई चुनावों में भाजपा से कुमार शैलेन्द्र और राजद से शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के बीच नजदीकी मुकाबला हो चुका है। दो चुनाव में दोनों के बीच हार-जीत का अंतर एक हजार से कम वोटों का रहा है। एक बार भाजपा तो एक बार राजद ने बाजी मारी थी। पिछले चुनाव में इस सीट पर बुलो मंडल की पत्नी वर्षा रानी निर्वाचित हुई थी। इस बार खुद बुलो मंडल चुनाव मैदान में हैं।

मतदान में दो दिन बचे हैं। मतदाताओं की चुप्पी धीरे-धीरे टूटने लगी है। विक्रमशिला पुल के पास केला बेच रहे गोपालपुर के नरेश मंडल ने कहा कि वोट त समाज के लोगे के दैबोन। इशारा जातिगत समीकरण की तरफ था। हालांकि साथ चल रहे मनीष ने कहा कि बदलाव की हवा चल रही है। नाथनगर के रसीद ने कहा कि रविवार की शाम तक तस्वीर साफ होगी। तिलकामांझी स्थित एक फर्नीचर दुकानदार ने कहा कि इस बार युवा को मौका मिलेगा। घंटाघर चौक पर नीतीश ने कहा कि दोनों गठबंधनों का वोट बंट रहा है। जीत उसी की होगी जो वोटबैंक को बचा लेगा। 

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  • Web Title:Bihar Elections : Somewhere straight while some seats have Triangular fight between parties