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29 अक्तूबर, 2020|10:06|IST

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बिहार विधानसभा चुनाव 2020: NDA और महागठबंधन में सीटों पर तकरार, छोटे दलों में आपसी करार

bihar election 2020 squabble over seats in nda and grand alliance mutual agreement between small par

बिहार विधानसभा चुनाव में गठबंधनों की तस्वीर अब तक साफ नहीं हो सकी है। दो दिनों बाद ही पहले चरण की 71 सीटों के लिए नामांकन शुरू हो जाएगा, पर अब तक यह भी साफ नहीं हो पाया है कि किस गठबंधन में कौन-कौन से दल बने रहेंगे या शामिल होंगे। दोनों बड़े गठबंधनों एनडीए और महागठबंधन में दरार पड़ चुकी है। एनडीए में जहां लोजपा के तेवर तल्ख हैं, वहीं महागठबंधन से रालोसपा का बाहर जाना तय माना जा रहा है। कांग्रेस भी सम्मानजन समझौता नहीं होने पर सभी 243 सीटों पर अपनी तैयारी का दावा कर रही है। उधर, छोटे-छोटे दल गठबंधन बनाकर चुनाव में समीकरण साधने में जुट गए हैं।

एनडीए में लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान एक तरफ भाजपा से निकटता बनाए रख रहे हैं, तो दूसरी तरफ जदूय के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वह 143 सीटों पर प्रत्याशी उतारने के दावे कर रहे हैं। 143 सीटों के इस दावे का निहितार्थ यह है कि वह भाजपा के खिलाफ प्रत्याशी नहीं देंगे। लेकिन यह बात सीधे तौर पर लोगों को हजम नहीं हो रही। दरअसल एनडीए में यह तय हो चुका है कि सीटों का बंटवारा जदयू और भाजपा के बीच होगा और ये दोनों दल क्रमश: हम और लोजपा के लिए अपने हिस्से से सीटें छोड़ेंगे। ऐसे में जदयू से चिराग पासवान की नाराजगी के निहितार्थ कुछ अलग ही हैं। लोगबाग चिराग को सियासी शतरंज का मोहरा भी करार देने लगे हैं।  

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दूसरी तरफ रालोसपा के बागी तेवर ने महागठबंधन में भी दरार पैदा कर दी है। उपेन्द्र कुशवाहा ने सीएम पद के लिए तेजस्वी यादव की पात्रता पर सवाल खड़ा कर एक तरह से राजद से अपना नाता तोड़ लिया। राजद ने इसका जवाब सोमवार को रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी को अपने दल में शामिल कर दे दिया है। ऐसे में यह साफ हो गया है कि रालोसपा का महागठबंधन से अलग होना तय है, लेकिन वह एकला चलो की राह अपनाएगी या किसी अन्य गठबंधन का हिस्सा बनेगी यह कहना मुश्किल है। वैसे उपेन्द्र कुशवाहा चुनावों में गठबंधन बदलते रहे हैं। उधर, कांग्रेस और राजद के बीच भी अभी तक सीटों के बंटवारे की गुत्थी नहीं सुलझी है। राजद के रवैये से आजिज आकर कांग्रेस ने यह ऐलान कर दिया है कि उसकी तैयारी सभी 243 सीटों पर है।  

छोटे दलों का गठबंधन  
इस बीच छोटे दलों ने आपस में गठबंधन बनाकर एनडीए और महागठबंधन के जनाधार में सेंध लगाने की जुगत शुरू कर दी है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार चुनाव में पूर्व केन्द्रीय मंत्री देवेन्द्र प्रसाद यादव की पार्टी समाजवादी जनता दल (डी) के साथ संयुक्त जनतांत्रिक सेक्यूलर गठबंधन बना लिया है। वहीं जाप के अध्यक्ष पप्पू यादव ने सोमवार को प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन बनाने की घोषणा की। इस गठबंधन में आजाद समाज पार्टी, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी और बहुजन मुक्ति पार्टी शामिल हुई है। कई और छोटे-छोटे दलों की आपसी बातचीत जारी है। हालांकि इन दलों का किसी चुनाव में कोई बड़ा जनाधार सामने नहीं आया है, लेकिन आपस में गठबंधन बनाने की कवायद के पीछे इनके खास- खास लक्ष्य हैं।  

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बड़े दलों की छांव में छोटे दल 
बिहार चुनाव में इस बार एक अलग प्रयोग भी हो रहा है। गठबंधन के भीतर गठबंधन। गठबंधन के दो बड़े मुख्य घटकदल अपने-अपने साथ छोटे दल को लेकर चल रहे हैं। इस तरह बड़े दल की छांव में छोटे दल चुनाव लड़ रहे हैं। यह नया प्रयोग एनडीए और महागठबंधन दोनों ही खेमे में नजर आ रहा है।  

एनडीए के दो मुख्य दल जदयू और भाजपा ने आपस में सीटों का बंटवारा करने पर सहमति बना ली है। सीटों का बंटावारा हो जाने के बाद भाजपा अपने कोटे से लोजपा को तो जदयू अपने हिस्से से हम के लिए सीटें छोड़ेगा। काबिले गौर यह भी है कि लोजपा ने जब यह ऐलान किया कि वह जदयू और उसके सहयोगी दल के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगा तो हम ने भी उन सभी सीटों पर प्रत्याशी देने का ऐलान कर दिया जहां से लोजपा के उम्मीदवार होंगे। लोजपा प्रवक्ता अशरफ अंसारी इस संबंध में कहते हैं कि सीट बंटवारे पर उनकी पार्टी की भाजपा से बात हो रही है न कि जदयू से। 

महागठबंधन में भी यही स्थिति है। राजद और कांग्रेस के साथ अलग-अलग पार्टियां जुड़ी हैं। राजद से वाम दलों की बात चल रही है तो एनसीपी को सीटें देने की जिम्मेदारी कांग्रेस को पर छोड़ दी गई है।  

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