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31 अक्तूबर, 2020|7:40|IST

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बिहार की औद्योगिक राजधानी बेगूसराय में चुनावी उत्साह परवान पर, 2015 में सभी 7 सीटों पर महागठबंधन ने दर्ज की थी जीत

                          2015

बिहार की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले बेगूसराय में चुनावी उत्साह सबाब पर है। यहां के चौक-चौराहों  पर चुनाव,  मुद्दे, प्रत्याशी और दलों के गठबंधन की ही चर्चा है। तीन दिनों बाद यहां मतदान होना है और लोगों को इसका बेसब्री से इंतजार है। वामदल का कभी गढ़ रहा बेगूसराय जिला अपने अंदर विधानसभा की सात सीटें - चेरिया बरियारपुर, बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी, साहेबपुर कमाल, बेगूसराय और बखरी समेटे हुए है। 

पिछली बार 2015 के विधानसभा चुनाव में बेगूसराय की सभी सात सीटों पर महागठबंधन का कब्जा हुआ था। हालांकि इसबार महागठबंधन और एनडीए दोनों का ही स्वरूप बदल गया है। महागठबंधन में राजद कांग्रेस और वाम दल हैं। वहीं एनडीए में जदयू, भाजपा, वीआईपी और हम हैं। कुछ सीटों पर लोजपा के उम्मीदवार भी ताल ठोक रहे हैं। ऐसे में यहां लड़ाई दिलचस्प हो गई है। सामाजिक समीकरण की बात करें तो महागठबंधन को वाम शक्तियों के राजद के साथ हुए गठबंधन पर भरोसा है। दोनों के अपने-अपने आधार वोट हैं। वहीं जदयू व भाजपा के साथ आये जीतन राम मांझी और मुकेश साहनी से एनडीए को काफी उम्मीदें हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का काम भी उन्हें सबल दे रहा है।

फर्टिलाइजर कारखाना से रोजगार की उम्मीदें
करीब 20 वर्षों से बंद यहां के फर्टिलाइजर कारखाने में उत्पादन फिर से शुरू होने वाला है। काम तेजी से चल रहा है। साथ ही थर्मल पावर की क्षमता का विस्तार किया रहा है। इससे करीब हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन होगा। इससे यहां के व्यापार और रोजगार विकसित होने की उम्मीदें फिर जगी हैं। तेघड़ा के पपरौर गांव के रहने वाले व्यवसायी अशोक चौधरी चुनाव की चर्चा छेड़ने पर कहते हैं, फर्टिलाइजर कारखाना में उत्पादन शुरू होने से बिहट और इसके आसपास क्षेत्र में व्यवसाय बढ़ेगा।  शुक्रवार को बातचीत के दौरान पुराने दिनों की याद करते हुए वे कहते हैं कि जब यह फर्टिलाइजर चालू था, तब बेगूसराय की जीडीपी में भी इसका अहम योगदान था। टाउनशिप से कई रोजगार फलते-फूलते थे। वे यह भी बताते हैं कि यहां देवना औद्योगिक क्षेत्र में विभिन्न कारणों से बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को फिर से चालू कराने की पहल होती तो बेगूसराय में नई औद्योगिक क्रांति की शुरुआत होती।

कैटरर था, अब चाय बेच रहा हूं
मटिहानी विधानसभा क्षेत्र में स्थित करीब 5000 घरों का गांव ‘उलाव’। चुनाव के मुद्दे पर बात शुरू करने पर यहां के निवासी पंकज कहते हैं कि क्या बताऊं। अच्छा खासा हमारा कैटरिंग का व्यवसाय था। लॉकडाउन के बाद ऐसी हालत हुई है कि अब चाय की दुकान खोलनी पड़ी। शादी-ब्याह आदि समारोह नहीं होने से यह स्थिति हमलोगों की हुई है। बिजली की क्या स्थिति है, पूछने पर कहते हैं कि गांवों में भी 22-23 घंटे रहती है। हालांकि बिजली बिल को लेकर उन्हें शिकायत है कि यह बहुत अधिक आता है। इस पर गरीबों को रियायत मिलनी चाहिए।

दिनकर विश्विद्यालय भी है चुनावी मुद्दा
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की धरती बेगूसराय में उनके नाम पर यहां विश्वविद्यालय की स्थापना चुनावी मुद्दा बना है। इसकी मांग को लेकर लोगों ने अभियान चलाया है। इसको लेकर राजनीतिक दलों के अपने-अपने दावे हैं। आगे जिसकी भी सरकार बनेगी, उसपर इस मांग का दबाव जरूर होगा।

मध्यावधि चुनाव नहीं चाहती जनता
बेगूसराय के साहेबपुर कलाम विधानसभा क्षेत्र के लखमिनिया में  वहां के व्यवसायी नवल किशोर सिंह से चुनाव पर सवाल करने पर कहते हैं कि जनता मध्यावधि चुनाव नहीं चाहती है। जिसकी भी सरकार बने, वह पांच साल चले। यह अधिक जरूरी है।

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  • Web Title:bihar chunav 2020 mahagathbandhan captured all seven seats of begusarai in 2015 assembly elections