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7 अप्रैल, 2021|4:32|IST

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डर या चुनौती? 30 साल में पहली बार अपना सबसे बड़ा दांव खेलने जा रही हैं ममता बनर्जी, जानें कैसे

mamata banerjee

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west bengal chief minister mamata banerjee   file photo

2 / 3West Bengal chief minister Mamata Banerjee. (File photo)

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पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव इस बार कितना दिलचस्प होने वाला है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री और टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी इस बार अपना सबसे बड़ा दांव खेलने जा रही हैं। ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। 30 सालों में ऐसा पहली बार है, जब ममता बनर्जी अपने गढ़ से बाहर निकलकर चुनाव लड़ रही हैं। पिछले तीन दशकों में ममता बनर्जी ने भवानीपुर से अलग होकर कभी भी चुनाव नहीं लड़ा, मगर ऐसा इस बार होने जा रहा है। 1991 से लेकर 2011 तक ममता बनर्जी कोलकाता (साउथ) की सांसद रहीं। इस लोकसभा सीट में ही भवानीपुर विधानसभा सीट भी आती है। हालांकि, जब 2011 में उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो उन्होंने भवानीपुर को ही चुना। 2011 से लेकर अब तक ममता बनर्जी भवानीपुर का प्रतिनिधित्व करती आई हैं। 

मगर शुक्रवार को जब टीएमसी के उम्मीदवारों की लिस्ट आई तो सबकी नजर इसी बात पर थी कि ममता बनर्जी भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीट से लड़ती हैं या नहीं। मगर कैंडिडेट लिस्ट जारी करने के साथ ही भाजपा की चुनौती को स्वीकार करते हुए ममता बनर्जी ने ऐलान कर दिया कि वह इस बार सिर्फ उसी नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगी, जहां पर माना जा रहा है कि भाजपा उनके पुराने सहयोगी रहे शुभेंदु अधिकारी को उतार सकती है। 

ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो मैं फिर यहां से चुनाव लड़ूंगी। मैं यहां से चुनाव लड़ूं या नहीं, मगर भवानीपुर हमेशा मेरी पकड़ में रहेगी। ममता ने अपनी पारंपरिक सीट से शोभनदेब चट्टोपाध्याय को उतारा है। ममता बनर्जी ने कहा कि मैं हमेशा यहां रहूंगी और नजर रखूंगी। 

ममता बनर्जी का सिर्फ नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने का फैसला, भाजपा के उन बयानों के बाद आया है, जिसमें भाजपा अक्सर सवाल करती थी कि ममता बनर्जी को घोषणा करनी चाहिए कि वह किस सीट से चुनाव लड़ेंगी। भवानीपुर से शोभनदेव चट्टोपाध्याय का समर्थन करते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि यहां उनका घर है। यहां बताना जरूरी होगी कि अब तक भाजपा ने नंदीग्राम से शुभेंदु की उम्मीदवारी का औपचारिक तौर पर ऐलान नहीं किया है। मगर ऐसे संकेत हैं कि शुभेंदु ही यहां से चुनाव लड़ सकते हैं।

बहरहाल, भवानीपुर ममता बनर्जी के लिए काफी मायने रखता है। भवानीपुर ने न सिर्फ ममता का हाथ थामे रखा, बल्कि फर्श से अर्श तक पहुंचाने में मदद की है। सासंद, केंद्रीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री बनने के सफर में भवानीपुर ने ममता बनर्जी का साथ दिया है। मगर अब भवानीपुर तेजी से बदल रही है। 2 लाख से अधिक मजबूत मतदाताओं की आबादी वाले भवानीपुर में अब लगभग 60% गैर-बंगाली है। 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से यहां वोट का पैटर्न और आबादी का मिजाज बदलता दिख रहा है और यह भाजपा के करीब जाती दिख रही है। पिछले कई अलग-अलग चुनावों की बात करें तो भवानीपुर से ममता बनर्जी की पार्टी का वोट शेयर गिरा है।

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  • Web Title:For first time in three decades Mamata banerjee moves out from Bhowanipore to contest nandigram