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बंगाल चुनाव 2021बंगाल चुनाव: दूसरे चरण से मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने की कोशिश में भाजपा, ममता और शुभेंदु के बीच अहम मुकाबला

रामनारायण श्रीवास्तव, हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Published By: Himanshu Jha
Wed, 31 Mar 2021 12:08 AM
बंगाल चुनाव: दूसरे चरण से मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने की कोशिश में भाजपा, ममता और शुभेंदु के बीच अहम मुकाबला

पश्चिम बंगाल और असम के सबसे अहम माने जा रहे दूसरे चरण के लिए मतदान की पूरी तैयारी हो गई है। दोनों राज्यों में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने इस चरण के लिए पूरी ताकत झोंकी है। इसमें पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट भी शामिल है, जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा ने यहां ममता को घेरने के लिए स्थानीय दिग्गज शुभेंदु अधिकारी को चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं, उसने प्रचार अभियान में भी एक एक घर का दरवाजा खटखटाया है।

पश्चिम बंगाल और असम के दूसरे चरण के चुनाव के पहले के लिए सभी दलों ने पहले चरण के मतदान को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। बंगाल में पहले चरण की तरह दूसरे चरण में भी 30 सीटों के लिए मतदान होना है। इनमें नंदीग्राम सीट भी शामिल है, जहां तृणमूल कांग्रेस छोड़कर गए शुभेंदु अधिकारी से दो-दो हाथ करने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर की परंपरागत सीट को छोड़कर चुनाव मैदान में उतरी है। भाजपा ने भी यहां पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को शुरू से ही मोर्चे पर लगाया हुआ है और उन्होंने स्थानीय नेता और कार्यकर्ताओं के साथ एक एक बूथ की रणनीति तैयार की है।

भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम नेताओं ने चुनाव प्रचार कर इस चरण में पूरी ताकत झोंकी है। मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए भाजपा नेता और गृह मंत्री अमित शाह का पहले चरण की 30 सीटों में 26 सीटें जीतने का दावा भी अहम भूमिका निभा सकता है। पश्चिम बंगाल में इस चरण में जिन 30 सीटों पर मतदान होना है उनमें मतुआ समुदाय भी अहम माना जा रहा है।

इस चरण की लगभग आधी से ज्यादा सीटों पर वह निर्णायक भूमिका में माना जा रहा है। भाजपा ने इस समुदाय को अपने साथ लाने के लिए पूरी ताकत झोंकी है। इस चरण की सीटों पर पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया था। इस दृष्टि है यह उसका मजबूत गढ़ है, लेकिन भाजपा को भी इसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा सेंध लगाने की उम्मीद है। इससे तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच हर सीट पर कड़ा मुकाबला होता दिख रहा है।

असम में दूसरे चरण में 39 सीटों के लिए मतदान होना है। राज्य में पहले चरण में 47 सीटों के लिए मतदान हुआ था। उसके बाद अब यह चरण सबसे ज्यादा अहम होगा क्योंकि इसके बाद आखरी चरण के लिए मतदान होगा। इस चरण से सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी बढ़त बनाने की कोशिश करेंगे, ताकि आखिरी चरण में निर्णायक बढ़त हासिल की जा सके।

भाजपा ने असम में अपनी पूरी ताकत झोंकी है क्योंकि उसे विपक्षी गठबंधन से ज्यादा खतरा महसूस हो रहा है।विपक्ष के पास मजबूत नेता भले ही ना हो लेकिन विभिन्न दलों की एकजुटता भाजपा के लिए दिक्कत पैदा कर सकती है। ऐसे में भाजपा ने वहां पर विपक्षी गठबंधन से पैदा होने वाले ध्रुवीकरण को भुनाने की कोशिश भी करेगी।

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