DA Image
हिंदी न्यूज़ › विधानसभा चुनाव › असम चुनाव 2021 › असम में आसान नहीं है कांग्रेस की राह, AIUDF से गठबंधन से नाराज हो सकते हैं परंपरागत वोटर
असम चुनाव 2021

असम में आसान नहीं है कांग्रेस की राह, AIUDF से गठबंधन से नाराज हो सकते हैं परंपरागत वोटर

सुहेल हामिद, हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Published By: Himanshu Jha
Wed, 27 Jan 2021 06:34 AM
असम में आसान नहीं है कांग्रेस की राह, AIUDF से गठबंधन से नाराज हो सकते हैं परंपरागत वोटर

असम में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिए कांग्रेस ने महागठबंधन बनाया है। पर विपक्षी वोट को एकजुट रखने की कोशिश ने चुनाव में पार्टी की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। कांग्रेस को जहां एक तरफ भाजपा के अक्रामक प्रचार का मुकाबला करना है, वहीं पार्टी को एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन को लेकर भी सफाई देनी पड़ रही है। क्योंकि, एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन से असमिया मुस्लिम मतदाता नाराज हो सकते हैं।

प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि एआईयूडीएफ को लेकर असमिया मुस्लिम की राय अलग है। असमिया मुस्लिम एआईयूडीएफ के नेता मौलाना बदरुद्दीन अजमल के साथ नहीं है। एआईयूडीएफ को बांग्ला बोलने वाले मुस्लिम की पार्टी मानते और उसके खिलाफ वोट करते रहे हैं। पिछले चुनावों में असमिया मुस्लिम का वोट कांग्रेस को मिलता रहा है।

इसके साथ ऊपरी और मध्य असम के मतदाता भी एआईयूडीएफ को बहुत पसंद नहीं करते हैं। इसलिए, पार्टी को एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन पर सफाई देनी पड़ रही है। गठबंधन के ऐलान के बाद असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रिपुण बोरा कई बार दोहरा चुके हैं कि वह गठबंधन में एआईयूडीएफ को सांप्रदायिक राजनीति करने की कतई इजाजत नहीं देगें।

असम प्रदेश कांग्रेस नेता मानते हैं कि विधानसभा चुनाव में पार्टी अपने परंपरागत मतदाताओं को साथ रखने में सफल रहती है, तो एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन सत्ता की दहलीज तक पहुंचा सकता है। क्योंकि, निचले असम में मतदाताओं पर एआईयूडीएफ की अच्छी पकड़ है और वह अपना वोट बैंक ट्रांसफर कर सकती है। वर्ष 2016 के चुनाव में कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच बिखराव की वजह से भाजपा 27 सीट जीतने में सफल रही थी।

कांग्रेस मानती है कि एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन से भाजपा सांप्रदायिक धुव्रीकरण कर सकती है। पार्टी के एक नेता ने कहा कि इस विषय पर विचार किया गया था, पर हमारा मानना है कि हम एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन नहीं करते हैं, तो भी भाजपा धुव्रीकरण करेगी। इसलिए, विपक्षी वोट को एकजुट रखने के लिए छह पार्टियों ने मिलकर गठबंधन बनाया है।

तरुण गोगोई को पद्म भूषण का असर
असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को मरणोपरांत पदम भूषण देने के ऐलान से विधानसभा चुनाव में भाजपा को फायदा मिल सकता है। तरुण गोगोई को असम में सभी क्षेत्रों के लोग पसंद करते थे। पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा से भाजपा को ऊपरी असम और आहोम समुदाय में पकड़ मजबूत करने में मदद मिल सकती है। वहीं, कांग्रेस तरुण गोगोई के नाम पर वोट नहीं मांग पाएगी। क्योंकि, भाजपा ने भी उन्हें सम्मान दिया है।

संबंधित खबरें