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Asian Games 2018: ब्रिज में गोल्ड जीतने वाले खिलाड़ियों ने कहा- ये कोई जुआ नहीं है, टैलेंट का खेल है!

स्वर्ण विजेता ब्रिज खिलाड़ियों ने गोल्ड जीतने के बाद कहा कि उनके खेल को जुआ नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि इसमें भाग्य नहीं कौशल के दम पर जीत दर्ज की जाती है। 

Pranab Bardhan and Shibhnath Sarkar win bridge gold for India | Asian Games 2018

28वें एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए कुल 69 मेडल बटोर लिए हैं। इसमें से एक गोल्ड मेडल भारत ने ब्रिज में जीता जो पहली बार ही शामिल किया गया है और अधिकतर लोगों को इसके बारे में मालूम भी नहीं है। स्वर्ण विजेता ब्रिज खिलाड़ियों ने गोल्ड जीतने के बाद कहा कि उनके खेल को जुआ नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि इसमें भाग्य नहीं कौशल के दम पर जीत दर्ज की जाती है। 

'शतरंज से ज्यादा चैलेंजिंग है'
प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार ने शनिवार को एशियाई खेलों में ब्रिज में पुरूष युगल में स्वर्ण पदक जीता। इस खेल को पहली बार एशियाई खेलों में शामिल किया गया था। बर्धन ने कहा, ''यह खेल तर्क पर आधारित है। यह शतरंज की तरह माइंड गेम है लेकिन उससे अधिक चुनौतीपूर्ण है। शतरंज में दो खिलाड़ी एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। यहां आपको अपने साथी के साथ खेलना होता है जिससे आप मैच के दौरान बात नहीं कर सकते। आपको एक दूसरे की चाल को समझना होता है।" 

'यह जुआ नहीं है, इसमें किस्मत काम नहीं आती'
उन्होंने कहा, ''यह निश्चित तौर पर जुआ नहीं है। हर किसी को शुरू में एक जैसे पत्ते मिलते हैं इसलिए इसमें भाग्य तो शामिल ही नहीं है। आपको परिस्थितियों के अनुसार खेलना होता है।" सरकार ने कहा कि यह युवाओं का भी खेल है और यह सोच गलत है कि केवल उम्रदराज लोग ही इसे खेलते हैं। उन्होंने कहा, ''सिंगापुर टीम में युवा खिलाड़ी है। कई खिलाड़ी 20 से 30 साल के हैं। यह एलीट वर्ग का खेल है। पश्चिम बंगाल में सभी वर्गों के लोग इस खेल को खेलते हैं।

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  • Web Title:indian gold medal winners in bridge says the game is not gambling and it is as difficult as chess