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आपको चाहिए पोषण कुछ खास

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आपको चाहिए पोषण कुछ खास

अधिकांश महिलाएं इस बात से बेखबर होती हैं कि उनके शरीर की पोषण की मांग बाकियों से काफी अलग है। महिलाओं की शारीरिक संरचना और दिनभर के कामकाज व अन्य जिम्मेदारियों को देखते हुए पोषण में उन्हें कुछ ज्यादा और कुछ खास की जरूरत होती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए यदि आप अपने खानपान में बदलाव करें तो फिटनेस और खूबसूरती दोनों उम्र के हर पड़ाव में बरकरार रख सकती हैं।

गर्भधारण क्षमता के लिए फोलिक एसिड
महिला होने के नाते मां बनना आपके जीवन की सबसे बड़ी और अहम भूमिका है। गर्भधारण से लेकर बच्चे के  पालन-पोषण में मां की जिम्मेदारी का हिस्सा बाकियों से कहीं ज्यादा हो जाता है। ऐसे में शरीर में फोलिक एसिड की मौजूदगी बेहद जरूरी हो जाती है। फोलिक ऐसिड गर्भधारण क्षमता के लिए बेहद जरूरी तत्व है। इसकी कमी आप से मां बनने की खुशी छीन सकती है। मां में फोलिक एसिड की कमी से नवजात को बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। मस्तिष्क के सामान्य विकास के लिए भी यह बेहद जरूरी है। सीएसजेएम यूनिवर्सिटी के ह्यूमन न्यूट्रिशन डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भारती दीक्षित के अनुसार अगर आप मां बनने की योजना में हैं या उम्र के उस दौर से गुजर रही हैं, तो तीन महीने पहले से ही फोलिक एसिड लेना शुरू कर दें।  इससे गर्भपात की संभावनाओं में कमी आती है। फोलिक एसिड लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए भी अहम है। यह आपको एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी से भी बचाता है। 
इसकी पूर्ति के लिए गर्भवती महिला को हरी पत्तेदार सब्जियां, स्ट्रॉबेरी, फलियां, संतरे, मौसमी और सलाद का सेवन करना चाहिए।
 

चाहिए कैल्शियम ज्यादा   
चाहिए कैल्शियम ज्यादा   

चाहे युवा उम्र में गर्भावस्था की बात हो या ढलती उम्र में मेनोपॉज की, इस दौरान महिलाओं में कैल्शियम की आवश्यकता बढ़ जाती है। डॉ. भारती के अनुसार मेनोपॉज के दौरान महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी हो जाने से उनकी हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं। इसलिए उन्हें ढलती उम्र में कैल्शियम की ज्यादा आवश्यकता हो जाती है। वहीं गर्भावस्था में लिया गया कैल्शियम न सिर्फ होने वाले शिशु की हड्डियों को मजबूती देता है, बल्कि इस अवस्था में उच्च रक्तचाप से भी बचाता है।
इसकी पूर्ति के लिए आपको डेयरी उत्पाद, मेवे, रागी, ओट्स आदि को अपनी खुराक में शामिल करना चाहिए। 
अहम है विटामिन डी 
विटामिन डी कैल्शियम, आयरन, फास्फेट, जिंक और मैग्नीशियम जैसे अन्य पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है। इसके साथ ही विटामिन डी गर्भावस्था में भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। विटामिन डी इंसुलिन की सक्रियता में भी इजाफा करता है। इंसुलिन की सक्रियता बढ़ने से गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज के विकसित होने की संभावनाएं कम होती हैं। गर्भवती महिलाएं बैक्टीरियल वेजाइनिटिस रोग से बचना चाहती हैं तो उन्हें विटामिन डी को अपनी खुराक में शामिल करना चाहिए। विटामिन डी भ्रूण को फेफड़ों की समस्या और अस्थमा जैसे रोगों से सुरक्षित रखता है। सुबह सूरज की किरणें इसका सबसे अच्छा स्रोत हैं। 
फैटी फिश, मशरूम, अतिरिक्त पोषण युक्त अनाज 
यानी फोर्टिफाइड सीरियल्स, अंडा खासकर उसका पीला भाग, फोर्टिफाइड मिल्क और डेरी उत्पाद इसकी कमी नहीं होने देंगे। 
 

एनीमिया से बचाएगा आयरनयुक्त आहार
एनीमिया से बचाएगा आयरनयुक्त आहार


आयरन का सीधा संबंध हमारे रक्त से है। लाल रक्त कणिकाओं में एक प्रोटीन होता है, जिसे हिमोग्लोबिन कहते हैं। यह ऑक्सीजन को सारे शरीर में पहुंचाता है। शरीर में इसके निर्माण में आयरन की खासी भूमिका होती है। लिहाजा, आयरन कम तो खून कम। महिलाओं में एनीमिया यानी रक्त की कमी होना आम समस्या है। इसका नतीजा बेवजह की थकान और सेहत की कई समस्याओं के रूप में सामने आता है। इसकी कमी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर डालती है, नतीजन संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मां में आयरन की कमी बच्चे में अस्थि रोगों को बढ़ावा देती है। 
डॉ. भारती की मानें तो आयरन की कमी को दूर करने के लिए खुराक में विटामिन सी और बी-12 को भी शामिल कीजिए। ये तत्व आयरन अवशोषित करने में मददगार होते हैं। नट्स, बींस, हरे पत्ते की सब्जियां, डेरी उत्पाद, अंडे का पीला भाग, चीज , ऑरेंज जूस, टूना मछली, सालमन फिश आदि में आपको आयरन की भरपूर मात्रा मिलती है।
स्तन कैंसर से बचाता है ओमेगा-3 फैटी एसिड
ओमेगा-3 फैटी एसिड एक प्रकार की वसा है, जो शरीर में हार्मोन्स के निर्माण के साथ ही शारीरिक और मानसिक विकास में मददगार बनता है। सीधी भाषा में कहा जा सकता है कि यह हमारी कोशिकाओं में इंर्धन पहुंचाने का काम करता है। तमाम विटामिन की तरह ही इसकी भी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है। इसकी कमी महिलाओं में होना आम हो गया है। दरअसल शरीर इसका निर्माण खुद नहीं कर सकता। इसकी पूर्ति हमें अपनी खुराक के द्वारा ही करनी पड़ती है। इसकी कमी उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, रक्त में कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर, डायबिटीज, सूजन, आंत के रोग, अल्जाइमर जैसे रोगों का कारण हो सकती है। अनुसंधानों से साबित हो चुका है कि यह महिलाओं के लिए इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इसकी कमी स्तन कैंसर का कारण हो सकती है। वसा की आवश्यकता उसमें घुलनशील विटामिन ए,डी,ई और विटामिन-के के लिए पड़ती है और ओमेगा थ्री की कमी इस आवश्कता को पूरा नहीं होने देती। यह हमारे तंत्रिका तंत्र के लिए भी बहुत उपयोगी होता है।  महिलाओं में इसकी कमी त्वचा को भी शुष्क और निस्तेज बनाती है। 
यह अखरोट जैसे सूखे मेवों, मूंगफली, अलसी, सूरजमुखी, सरसों के बीज, कनोडिया या सोयाबीन, स्प्राउट्स, टोफू, गोभी, हरी बीन्स, ब्रोकली, शलजम, हरी पत्तेदार सब्जियों और स्ट्रॉबेरी, रसभरी टूना, सालमन, हिलसा और सार्डिन जैसी मछलियों और शैवाल, झींगा आदि में पाया जाता है। इसे लेते वक्त विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है। अधिक वसा मोटापे का कारण बन सकती है। ओमेगा-3 युक्त तेल में खाना बनाने से इसकी आपूर्ति स्वत: ही हो जाती है। जहां तक सी-फूड का सवाल है, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के वैज्ञानिकों ने सप्ताह में 2-3 बार लेना बेहतर माना है। 
सेहत दुरुस्त रखेगी रेशेदार खुराक 
यूं तो फाइबर को पोषक तत्वों में शामिल नहीं किया जाता, फिर भी इसकी मौजूदगी खुराक के लिए जरूरी है। इसे हमारे शरीर का क्लीनिंग एजेंट यानी सफाई करने का माध्यम भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यह पाचन तंत्र सही रखता है। फाइबर यानी रेशेदार खाद्य पदार्थ में ग्लूकोज सोखने की क्षमता ज्यादा होती है, इसलिए डाइबिटीज से बचाव के लिए भी इसे अच्छा माना जाता है। इसकी पर्याप्त मात्रा कोलोरेक्टल कैंसर से भी बचाव करती है। वजन कम करने में भी फाइबर आपकी मदद करेगा। शोध में यह बात भी सामने आई है कि रेशेदार खाद्य पदार्थ रक्तचाप और सूजन को भी कम करने में मदद करते हंै, साथ ही दिल के लिए लाभकारी होते हंै। 
इसके लिए आपको हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, मोटे अनाज, बीन्स, मेवे, अंकुरित अनाज आदि खाने होंगे। अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन के अनुसार महिलाओं को प्रतिदिन 25 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है।  

कब और कितना लें पोषण
कब और कितना लें पोषण

फोलिक एसिड
18 साल से 50 साल की उम्र तक - 400 माइक्रोग्राम प्रतिदिन 
गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली मां - 400 से 800 माइक्रोग्राम प्रतिदिन 
कैल्शियम 
19 से 50 की उम्र तक  - 1000 एमएल प्रतिदिन
स्तनपान कराने वाली मां -1300 एमएल प्रतिदिन
50 के ऊपर - 1200 एमएल  प्रतिदिन
आयरन 
19 से 50 की उम्र तक -18 एमजी प्रतिदिन 
गर्भवती महिला- 27 एमजी रोज 
स्तनपान कराने वाली मां- 09 एमजी प्रतिदिन
ओमेगा 3 फैटी एसिड 
18 से 50 की उम्र तक - कम से कम 250 से अधिकतम 500 एमजी तक  
विटामिन-डी
18 से 50 की उम्र तक - 05 माइक्रोग्राम या फिर 200 इंटरनेशनल यूनिट 
50 से 70 की उम्र तक - 10 माइक्रोग्राम या फिर 500 इंटरनेशनल यूनिट 
70 की उम्र से ज्यादा -15 माइक्रोग्राम या फिर 600 इंटरनेशनल यूनिट 
(कैल्शियम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार) 

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  • Web Title:women need different style of diet and nutrition