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इस प्यार में न हो कोई भेदभाव

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अच्छी परवरिश देना कोई आसान काम नहीं है। घर में जब दो बच्चे हों तो यह चुनौती थोड़ी और बढ़ जाती है। कैसे दोनों बच्चों को उनके हिस्से का बराबर प्यार दें, बता रही हैं मोनिका अग्रवाल


हर समय बच्चों को उपदेश ना दें। बच्चों की सभी बातें धैर्य के साथ सुनकर उनकी समस्याओं का समाधान तलाशने की कोशिश करें।
 दोनों बच्चों के साथ भरपूर क्वॉलिटी टाइम बिताएं। किसी एक के साथ पक्षपात न करें। एक की प्रशंसा करते समय, सचेत ढंग से दूसरे की भी तारीफ करें।
बड़ा बच्चा हो या छोटा, गलती करने पर उसे दूसरे बच्चे के सामने ना डांटें। उसे अलग से समझाएं।
बच्चों को एक-दूसरे के ऊपर हावी ना होने दें। उनके आत्मसम्मान की रक्षा करना आपकी जिम्मेदारी है।

आप अगर एक से ज्यादा बच्चों की मां हैंतो क्या आपको एक बच्चा दूसरे से ज्यादा प्यारा है? इसका सीधा सा जवाब होगा- नहीं। पर, बच्चे को भी ऐसा ही लगे, यह जरूरी नहीं। हो सकता है, उसे यह महसूस हो कि उसके साथ पक्षपात होता है। शोध बताते हैं कि अगर बच्चे के मन में ऐसी कोई बात घर करने लगी हो तो उसे दूर करना जरूरी है। उम्र बढ़ने के साथ यह सोच प्रबल होती जाती है। अगर बच्चा पूछे कि आप किसे सबसे ज्यादा पसंद करती हैं तो आपका जवाब दोनों को या सबको होना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को समान प्यार की जरूरत होती है। ऐसा न होने पर उन्हें मानसिक और भावनात्मक चोट पहुंचती है। 

मम्मी, भाई ने मेरी बुक फाड़ दी। तब तो आपने  कुछ नहीं कहा। मुझसे फटी होती तो मुझे कितनी डांट पड़ती।  या मम्मी निक्की ने उस दिन पेंसिल बॉक्स तोड़ दिया था। उसके बाद भी पापा ने उससे कुछ नहीं कहा । आज मेरी पेंसिल खो गई तो मुझे इतनी डांट क्यों पड़ रही है?  आप दोनों सिर्फ उसी को प्यार करते हो, मुझसे नहीं।

कुछ ऐसा ही होता है, बच्चों की शिकायत का लहजा। उनमें गुस्सा, होड़ और जलन जैसी भावनाएं होती हैं। हो सकता है कि उन्हें महसूस  हुआ होगा कि उन्हें उनके भाई या बहन की तुलना में कम महत्व दिया जा रहा है। ऐसे में अपने व्यवहार, बातचीत के तरीके, बच्चों को समझाने व डांटने के तरीके में बदलाव लाकर ऐसी स्थितियों से बच सकती हैं। 
 

तुलना से बचें
पेरेंट्स अपने बच्चे की तुलना जब दूसरे के साथ करते हैं तो इससे उनमें हीन भावना पैदा हो जाती है। इससे उनके मन में जलन व प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा होने लगती  है। यह भावना रिश्तों में भी दूरी पैदा कर देती है। इसलिए बच्चों की आपसी तुलना से बचें। किसी एक की तारीफ करते हुए यह याद रखें कि कहीं इससे दूसरे बच्चे को बुरा न लग रहा हो।  
बच्चों को करीब लाएं
बच्चों के आपसी प्यार को बढ़ाने की  दिशा में जरूरी कदम उठाएं क्योंकि वे सिर्फ अपने नजरिये से देखते हैं। उन्हें प्यार से समझाएं और उन्हें कुछ समय उनके भाई -बहन के साथ अकेले बिताने दें। इससे उनके बीच प्यार और समझदारी बढ़ेगी और वे धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आएंगे। 
बच्चे के मन को जानें
बच्चों की बात सुनें और उनसे बात करें। कहानियों और उदाहरणों के जरिये उन्हें समझाएं। अगर बच्चा बार-बार  यह कहे कि आप भाई या बहन को ज्यादा प्यार करती हैं तो यह जानना जरूरी है कि वह ऐसा क्यों सोच रहा है। इस बात को समझने की कोशिश करें कि वह ऐसा क्यों कह रहा है और कोशिश करें कि भविष्य में उसे दोबारा ऐसा महसूस न हो।
रवैया रखें तटस्थ 
बच्चों में झगड़ा होता है, तो वे शिकायत करने के लिए माता-पिता के पास आते हैं। ऐसे में उनकी बात को ध्यान से सुनें और उनके झगड़े की तह में जाएं। किसी एक को कसूरवार ठहराने की बजाय तटस्थ रहें। उन्हें अपना झगड़ा सुलझाने की सलाह दें। अगर झगड़ा बढ़ जाता है तो बीच-बचाव के लिए आएं। जिसकी गलती हो, उसे सजा दें। यदि वे झगड़ा स्वयं सुलझा लें तो उनकी सराहना भी करें।
समझाएं अहमियत 
अगर उनके बीच झगड़ा खत्म नहीं होता तो उन्हें कुछ समय के लिए  एक-दूसरे से अलग रहने की चेतावनी दें। इस बीच दोनों को एक-दूसरे की अहमियत बताएं, समझाएं कि जिसकी तुम शिकायत कर रहे हो, वह तुमसे प्यार भी तो करता है। उन्हें कहें कि वे प्यार से मिल-जुल कर रहें।
शेयरिंग का पाठ पढ़ाएं
बच्चों में शेयरिंग की आदत डलवाएं। खासतौर पर खाने-पीने की चीजें एक-दूसरे से शेयर करने को कहें। उनके लिए अलग-अलग खिलौने लाने के बजाय एक ही खिलौने को आपस में शेयर करने के लिए कहें। इससे बच्चे में किसी चीज पर अधिकार जमाने और उसके लिए लड़ने जैसी भावना विकसित नहीं होगी। बच्चा बड़ा हो जाता है तो उसे पर्सनल स्पेस की जरूरत होती है। तब उसे अपना एक कोना चाहिए ताकि वहां वह शांति से पढ़ाई या अपनी रुचि के काम कर सके। लेकिन अलग-अलग कमरे की बजाय उन्हें एक कमरा दें और उनसे सामान शेयर करने को कहें। 
योग्यता पहचानें
योग्यता किसी धनवान का घर नहीं खोजती। जैसे कुम्हार मिट्टी को चाक पर चढ़ा कर उसे मनचाहे आकार में ढालने के बाद ही उतारता है, उसी तरह माता-पिता को बचपन से ही बच्चों में अच्छी आदतें डालने का प्रयास करना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि आप बच्चे की योग्यता को पहचानें और उसे बढ़ावा दें। बच्चों की आपस में तुलना कभी न करें। इससे उनके मन में एक-दूसरे के प्रति गुस्से की भावना पनपने लगेगी। याद रखें कि हर बच्चा खास होता है, वह अपने जैसा होता है और उसे अपने जैसा ही रहने देना चाहिए। 
(बाल मनोविशेषज्ञ डॉ. स्वाति मित्तल से 
बातचीत पर आधारित)

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  • Web Title:There should be no discrimination in this love