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Parenting tips : खुद से करें इंटरनेट की लत से दूर रहने की शुरुआत

mobile addiction

सुधार के लिए किसी दूसरे को दोष देने से पहले खुद में झांकना जरूरी होता है। बच्चे को मोबाइल से दूर करने के लिए भी इसी बात पर ध्यान देने की जरूरत है, बता रही हैं स्वाति गौड़

अपने बच्चे के हाथ में मोबाइल फोन देखते ही क्या आप भी पैनिक में आ जाती हैं? क्या आपके बार-बार मना करने के बावजूद आपका बच्चा मोबाइल फोन या टैबलेट में सारा दिन व्यस्त रहता है? क्या आपकी कई चेतावनियों के बावजूद बच्चा सोशल मीडिया पर सक्रिय है और सारा दिन बस अपनी सेल्फी और स्टेटस ही अपडेट करता रहता है? अगर हां, तो ना केवल बच्चे के लिए, बल्कि आपके लिए भी यह सतर्क होने का समय है। कई शोधों में यह बात सामने आयी है कि ज्यादातर बच्चे अपने अभिभावकों की विभिन्न व्यस्तताओं और हमेशा मोबाइल में व्यस्त रहने की आदत की वजह से मोबाइल फोन एडिक्शन का शिकार हो रहे हैं। 

आपकी ही नहीं, सबकी परेशानी है
भारत समेत उभरती अर्थव्यवस्था वाले 11 देशों में हुए एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के खुमार की वजह से ज्यादातर लोग अपने बच्चों की परवाह करना भूल रहे हैं। पीईडब्ल्यू रिसर्च सेंटर, वॉशिंगटन के अध्ययन के मुताबिक, औसतन 64 फीसदी लोग सोशल मीडिया या मैसेजिंग एप का उपयोग करते हैं। 90 फीसदी लोगों का कहना है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया उन्हें अपनों से जोड़ता है, जिससे उन्हें खुशी मिलती है। लेकिन सर्वे में शामिल 79 फीसदी लोगों ने माना कि इससे उनके बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे सावधान रहने की जरूरत है। कम उम्र में मोबाइल की लत से बच्चों के सर्वांगीण विकास में रुकावटें आ रही हैं। उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही है, वे मोटापे के शिकार हो रहे हैं और किसी चीज पर ठीक से ध्यान केंद्रित करने में भी उन्हें अकसर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गतिविधियों में बनाएं हिस्सेदार
बच्चे को आप बाहर अकेला खेलने जाने देंगी नहीं और घर में खेलने की जगह ही नहीं होती। ऐसे में आजकल के बच्चों के पास मनोरंजन के रूप में केवल मोबाइल फोन ही बचता है, क्योंकि एक समय बाद वे टीवी देख-देखकर भी बोर हो जाते हैं। इसलिए मोबाइल की लत का सारा दोष अपने बच्चे के सिर मढ़ना भी ठीक नहीं है। अच्छा रहेगा कि आप घर और बाहर की गतिविधियों में बच्चों की हिस्सेदारी बढ़ाएं। उन्हें घर के बजाय बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें और समय निकालकर उनके साथ बाहर जाकर खेलें। क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस और तैराकी जैसे खेलों में अपने बच्चों के साथ हिस्सा लें। इंडोर गेम्स के रूप में कैरम और शतरंज बच्चों को सिखाएं, साथ ही उन्हें अपने बचपन के खेलों, जैसे खो-खो, कबड्डी आदि के बारे में बताएं और उनके साथ खेलें भी। आसपास ही मिलने वाली छोटी-मोटी जरूरत की चीजों के लिए होम डिलीवरी सर्विस का इस्तेमाल ना करके बच्चों को बाजार भेजें।  

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नजर रखनी है जरूरी
हालांकि आजकल के बच्चों को सिक्योरिटी फीचर्स का तोड़ भी बखूबी पता होता है, फिर भी जहां तक हो सके इंटरनेट और वाई-फाई के इस्तेमाल के लिए पासर्वड वगैरह उनके संग साझा ना करें। इस बात का ध्यान रखें कि वे किस समय कितनी देर के लिए मोबाइल या इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इंटरनेट पर वे किस तरह की सामग्री देख रहे हैं या डाउनलोड कर रहे हैं। इसके लिए आजकल कई तरह की एप्स भी उपलब्ध हैं, जो गलत इस्तेमाल पर अलार्म बजा देती हैं या मोबाइल को स्विच ऑफ कर देती हैं। 

हानिकारक प्रभावों के बारे में बताएं
मोबाइल फोन से निकलने वाली हानिकारक तरंगों और उनसे होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में अपने बच्चों को बताएं। उन्हें इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उपलब्ध अच्छी और बुरी सामग्रियों के बारे में जागरूक करें। उन्हें बताएं कि किस तरह से मोबाइल का इस्तेमाल केवल एक सीमा तक ही ठीक है। आजकल आये दिन खबरों में ऐसे दुष्प्रभावों के बारे में बताया जाता है। घर में अकसर ऐसी बातों पर चर्चा करें। 

नियम बनाएं, उन्हें अपनाएं
बच्चे मोबाइल को बिल्कुल त्याग देंगे, ऐसा सोचना बेमानी है। अच्छा रहेगा कि मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर के इस्तेमाल की समय-सीमा निर्धारित करें। हर समय मोबाइल, इंटरनेट या सोशल मीडिया की बातों में बच्चों को शामिल ना करें। खाना खाते समय, टीवी देखते समय, घर में किसी मेहमान के आने पर मोबाइल के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दें। 

बच्चों को बार-बार समझाएं कि बिना पूछे वे आपके मोबाइल को छुएं भी नहीं। घर के बाहर हों तो मोबाइल उनके हाथ में ना दें, बल्कि उनसे बाहर की दुनिया की बातें करें और नयी चीजों के बारे में उन्हें बताएं। आजकल बच्चों को अपने घर, गली-मोहल्ले के अलावा अपने शहर की कोई खास जानकारी ही नहीं होती, क्योंकि उन्हें लगता है कि जरूरत पड़ने पर वे हर जानकारी मोबाइल से प्राप्त कर लेंगे।  

खुद पर भी रखें नियंत्रण
यह सबसे जरूरी काम है और इसे सबसे पहले करें, क्योंकि अगर आप खुद हर समय मोबाइल में व्यस्त रहेंगी, तो बच्चे भी आपकी ही नकल करेंगे। बच्चों के सामने मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करें। ध्यान रखिये, कई बार हमसे ही बुरी आदतें बच्चों तक पहुंचती हैं। जहां तक हो सके वीकएंड पर या जितनी देर आप घर में रहती हैं, मोबाइल, इंटरनेट या सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम से कम करें। हर छोटी-छोटी बात पर अपने बच्चों संग तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर ना करें। 

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