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महिलाएं खुद को देंगी वक्त तो जिंदगी होगी बेहतर

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ऑफिस की जिम्मेदारी, घर का काम, बच्चों की परवरिश और न जानें क्या-क्या। लेकिन इन सबके बीच आपने खुद के लिए क्या किया? बस, तनाव ही तो झेला, क्योंकि काम और निजी जिंदगी के बीच आप संतुलन स्थापित नहीं कर पाई हैं। जिंदगी में कैसे बनाएं संतुलन, बता रहीं हैं स्वाति शर्मा

एक महिला है, जिसके आठ हाथ हैं। एक में बेलन, एक में बस्ता, एक में ऑफिस की फाइल। इस प्रकार हर हाथ में कुछ-न-कुछ थामे वह खड़ी है। इंटरनेट पर अकसर ऐसी तस्वीर वायरल होती है, खासतौर से महिला दिवस जैसे मौकों पर। काम तो पुरुष भी करते हैं, पर उनके लिए ऐसी कोई तस्वीर क्यों नहीं बनी? जवाब हम सभी के पास है। पुरुष कलछी उठा लें, तो वो उनका शौक होता है, लेकिन महिलाओं के लिए ये एक बड़ी जिम्मेदारी है। देखा जाए तो हमारे समाज में पुरुष के मुकाबले महिलाओं से ज्यादा उम्मीदें होती हैं। अगर वह बाहर का काम संभाल रहीं है, तो भी घर की जिम्मेदारी पूरी तरह उसी के कंधों पर डाल दी जाती है।

महिलाओं का कार्यक्षेत्र भी यहां दो हिस्सों में बंट जाता है, ऑफिस और घर। दोनों ही जगह उनसे सौ प्रतिशत प्रदर्शन की उम्मीद रखी जाती है। ऐसे में निजी जीवन सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। समय रेत की तरह सरक जाता है और अगले दिन का सूरज फिर से उसी नई शुरुआत की ओर इशारा करने लगता है। कामकाजी और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन न बना पाने के चलते अकसर महिलाएं तनावग्रस्त भी रहती हैं। लेकिन ऐसा कब तक चलेगा? इस संतुलन को हासिल करने के लिए आपको खुद ही कुछ कदम उठाने होंगे।

प्राथमिकताएं तय करें
हम सभी के पास दिन के चौबीस घंटे ही होते हैं। इन्हीं में हमको घर, बाहर और व्यक्तिगत जीवन की जिम्मेदारियां भी पूरी करनी होती हैं। इसकी तारतम्यता कई दफा सिर्फ इस बात पर बिगड़ जाती है कि हम अपने कार्यों की प्राथमिकताएं नहीं तय कर पाते हैं। कार्यों को अस्त-व्यस्त तरीके से करने के कारण हम उनमें ही उलझे रह जाते हैं और खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। इसका एक नुकसान यह भी होता है कि हमारे काम का परिणाम प्रभावित होने लगता है। कार्यों को व्यवस्थित तरीके से करने के लिए जरूरी है  कि उनकी प्राथमिकताएं तय की जाएं। ऐसा घर और ऑफिस दोनों ही जगह करना चाहिए। मान लीजिए, अधिक प्राथमिकता वाले कार्य को करने के बीच कोई दूसरा काम अचानक आ जाता है, तो उसे कुछ देर के लिए टाल भी सकती हैं।

विभाजन की प्रक्रिया अपनाएं
यहां विभाजन समय का करना है, जो कि ऑफिस के अनुरूप होगा। ऑफिस के समय पूर्ण रूप से वहीं के कार्यों पर ध्यान दें। इस बीच बच्चों की फिक्र होती है, तो एक या दो बार हालचाल ले लें। हर वक्त घर की फिक्र न करती रहें। ऑफिस में घर की बातें और समस्याओं की चर्चा न ही करें। जितना समय घर की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए देती हैं, उस दौरान अपने व्यावसायिक कार्यों से दूरी बनाकर रखें। ऐसा करना आपको मानसिक तनाव से दूर रखेगा और साथ ही आपके काम भी समय पर पूरे हो जाएंगे। ऐसा करके आप खुद के लिए भी थोड़ा समय निकाल पाएंगी।

काम को बांटना सीखें
जरूरी नहीं है कि हर काम की जिम्मेदारी आप खुद लें। आप छोटे-छोटे कामों को अलग-अलग लोगों में बांट कर पूरा कर सकती हैं। पति, दोस्त, बच्चे या घर के अन्य सदस्यों के साथ एक टीम की तरह काम करें। इससे समय रहते आपके सारे काम पूरे तो होंगे ही, साथ ही काम का दबाव आप पर कम पड़ेगा और आपका मिजाज खुशनुमा बना रहेगा।

सबको खुश रखना संभव नहीं
कहीं आप मिसेज परफेक्ट बनने की कोशिश तो नहीं करतीं? अगर हां, तो क्यों? एक बात समझ लीजिए, परफेक्ट कुछ भी नहीं होता। हर कार्य में किसी-न-किसी के हिसाब से कोई कमी रह ही जाती है और एक समय में सबको खुश करना भी मुमकिन नहीं है। इस कवायद में आप सिर्फ खुद को नुकसान पहुंचाती हैं। खुद पर काम को परफेक्ट तरीके से करने का दबाव कम डालें।

व्यायाम को महत्व दें
महिलाओं के अधिकतर काम बैठकर करने वाले होते हैं। ऐसे में शारीरिक गतिविधियां कम ही हो पाती हैं और थकान ज्यादा महसूस होती है। दिन में किसी भी वक्त व्यायाम के लिए समय निकालें। इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप जिम ही जाएं। घर पर हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कर सकती हैं या फिर कुछ देर के लिए टहलना भी फायदेमंद हो सकता है। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और दिन भर आप ऊर्जावान महसूस करेंगी।

जिम्मेदारियों के अनुरूप कार्य चुनें
यकीनन आप कामकाजी हैं, लेकिन काम का स्वभाव आपकी जिम्मेदारियों के अनुरूप रहे तो बेहतर रहेगा। जैसे अगर आपके बच्चे बहुत छोटे हैं, तो आप पर उनकी जिम्मेदारियां अधिक होंगी। ऐसे में आठ घंटे की नौकरी आपके लिए उपयुक्त नहीं होगी, क्योंकि घर पर बच्चे को भी समय देना होता है। इसलिए ऐसी नौकरी करें, जिसमें काम के घंटों को लेकर थोड़ा लचीलापन मिल सके।

दोस्त भी हैं जरूरी
दोस्त, सिर्फ मौज-मस्ती के लिए ही नहीं होते, बल्कि कई बार तो वे संकटमोचन भी बन जाते हैं। ज्यादातर महिलाओं की समस्या घरेलू होती है यानी उन्हें काम का दबाव उतना परेशान नहीं करता, जितना घरवालों का रवैया। और अगर अपनी समस्याओं को घर के किसी सदस्य से साझा किया भी जाए, तो उनकी प्रतिक्रिया एकतरफा ही होती है। इस स्थिति में आपके दोस्त ही काम आते हैं। अपने दोस्तों या जान-पहचान वालों में अपने से बड़ी उम्र के लोगों को अपनी समस्या साझा करें। उनके अनुभव आपको जीवन का रास्ता दिखा सकते हैं।

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  • Web Title:for better life Women will give time to themselves