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अनोखीलॉकडाउन ने तमाम महिलाओं को संकट में डाला,भविष्य में बढ़ी आर्थिक चुनौतियां

हिन्दुस्तान ब्यूरो ,नई दिल्लीPublished By: Manju Mamgain
Tue, 08 Sep 2020 02:11 PM
लॉकडाउन ने तमाम महिलाओं को संकट में डाला,भविष्य में बढ़ी आर्थिक चुनौतियां

लॉकडाउन ने दुनियाभर की तमाम महिलाओं को संकट में डाल दिया। एक शोध से पता लगा है कि उस दौरान महिलाएं अनचाहे गर्भधारण से जूझीं लेकिन तालाबंदी के कारण वे गर्भपात नहीं करा पायीं। उन्हें अपने और बच्चे के भविष्य की चिंता सताने लगी है। एक अध्ययन से पता लगा कि गर्भपात न करा पाने वाली महिलाएं भविष्य में आर्थिक और रोजगार से जुड़ी चुनौतियां झेलती हैं। 

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक प्रो. डायना ग्रीन ने गर्भपात के महिलाओं पर मानसिक व सामाजिक असर पर दस वर्षों तक अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जो महिलाएं चाहकर भी गर्भपात नहीं करा पाती हैं, उन्हें अपने आगे के जीवन में इस बात का बहुत पछतावा होता है। बच्चे की जिम्मेदारी के कारण कई महिलाएं अपने हिसंक पति को नहीं छोड़ पातीं। 

शोध के दौरान प्रो. ग्रीन ने पाया कि कई महिलाओं को बच्चों के इस अतिरिक्त भार के कारण गरीबी रेखा के नीचे जीवन गुजारना पड़ा। कई महिलाओं को अपने रोजगार छोड़ने पड़े। दूसरी तरफ, शोधकर्ताओं ने ऐसी महिलाओं के जीवन के दस वर्ष भी देखे जिन्होंने समय रहते गर्भपात करा लिया था।

शोधकर्ता बताती हैं कि आमधारणा से विपरीत ये महिलाएं अपने फैसले को लेकर संतुष्ट रहीं, उनमें कोई पश्चाताप की भावना नहीं पैदा हुई। वे आर्थिक और सामाजिक रूप से भी ज्यादा मजबूत रहीं। गौरतलब है कि आमतौर पर माना जाता है कि गर्भपात कराने के बाद महिलाएं अपने फैसले को लेकर पछताती हैं।  

देश में 9.2 लाख महिलाएं तालाबंदी में गर्भपात नहीं करा पायीं-  
मैरी स्टॉप्स इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, तालाबंदी के दौरान जनवरी से देश में 9.2 लाख महिलाओं को गर्भपात की सुविधा नहीं मिल सकी। यानी अगर उस दौरान सुरक्षित तरीके से गर्भपात की सुविधा होती तो ये महिलाएं उसका उपयोग करतीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि एक स्थिति यह भी हो सकती है कि गर्भधारण के सुरक्षित तरीके उपलब्ध न होने के कारण बहुत सी महिलाओं ने असुरक्षित या घरेलू तरीके अपनाकर गर्भपात की कोशिश की हो जोकि जानलेवा भी हो सकता है। हालांकि ऐसा कोई सरकारी डाटा उपलब्ध नहीं। 

कोरोनाकाल के 2 करोड़ बच्चे-  
यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 के अंतिम महीनों में भारत में लगभग दो करोड़ ज्यादा बच्चे पैदा होने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण तालाबंदी के समय अनचाहा गर्भ ठहरना है। पूरी दुनिया में करीब सात करोड़ अतिरिक्त बच्चे पैदा होने का अनुमान है।

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