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आपके भोजन में जरूरी हैं भरपूर मिनरल्स, इन्हें अपनी डाइट में शामिल करें ये चीजें

मिनरल्स यानी खनिज के बिना हमारा शरीर न तो त्वचा, मांसपेशियों, ऊतकों और लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण कर पाएगा और न ही ऑक्सीजन शरीर के विभिन्न भागों तक पहुंच...

Meenakshiमनोज शर्माWed, 03 Oct 2018 06:22 PM

मिनरल्स

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मिनरल्स यानी खनिज के बिना हमारा शरीर न तो त्वचा, मांसपेशियों, ऊतकों और लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण कर पाएगा और न ही ऑक्सीजन शरीर के विभिन्न भागों तक पहुंच पाएगी। मस्तिष्क और विभिन्न अंगों के बीच जो संदेशों का आदान-प्रदान होता है, वो भी शरीर में खनिज पदार्थों के संतुलन के कारण ही हो पाता है। हमारा शरीर खनिज पदार्थों का निर्माण नहीं करता, इसलिए भोजन के माध्यम से इसकी पूर्ति करनी होती है। 

हमारा शरीर उन सभी पोषक तत्वों का निर्माण नहीं करता, जिनकी हमारे शरीर को ठीक प्रकार से कार्य करने के लिए आवश्यकता होती है। इसलिए हमें उन्हें अपने भोजन से प्राप्त करना पड़ता है। पोषक तत्व दो प्रकार के होते हैं, मैक्रोन्यूट्रीएंट्स और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स। मैक्रोन्यूट्रीएंट्स में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन और वसा आते हैं, जबकि माइक्रोन्यूट्रिएंट्स में विटामिन्स और मिनरल्स आते हैं। हालांकि मिनरल्स और विटामिन्स दोनों ही माइक्रोन्यूट्रिएंट्स हैं, लेकिन ये दोनों एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। विटामिन्स, आर्गेनिक होते हैं और उष्मा, वायु या एसिड के द्वारा टूट जाते हैं, जबकि मिनरल्स इन-आर्गेनिक होते हैं और अपनी रासायनिक संरचना बनाए रखते हैं। माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, को हिडन हंगर भी कहा जाता है। 

क्यों जरूरी हैं हमारे लिए मिनरल्स    
मिनरल्स की आवश्यकता हमें शरीर के कई कार्यों के लिए होती है। हड्डियों, दांतों, त्वचा, बालों, मांसपेशियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए तथा रक्त और तंत्रिकाओं की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए मिनरल्स जरूरी हैं। हम जिस भोजन का सेवन करते हैं, वो मेटाबॉलिक प्रक्रिया के द्वारा ऊर्जा में बदलता है। इसके लिए भी विभिन्न मिनरल्स की जरूरत होती है। शरीर के विकास और ठीक प्रकार से कार्य करने के लिए मिनरल्स बहुत जरूरी हैं।

मिनरल्स 

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पोटैशियम 
पोटैशियम एक इलेक्ट्रोलाइट है और रक्त के प्रवाह में तुरंत अवशोषित हो जाता है। हृदय को स्वस्थ रखने और पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली में भी पोटैशियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पोटैशियम तंत्रिकाओं या मांसपेशियों के ठीक प्रकार से कार्य करने के लिए जरूरी है। 

स्रोत : केला, टमाटर, आलू, शकरकंदी, हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, ब्रोकली, खट्टे फल जैसे संतरा, कम वसा वाला दूध और दही तथा फलियों में यह अच्छी मात्रा में पाया जाता है।  
कमी और अधिकता से होने वाली समस्याएं: पोटैशियम की कमी से थकान बहुत होती है और हृदय की धड़कनें अनियमित हो जाती हैं। इसकी अधिकता उच्च रक्तदाब का कारण बन सकती है। 
प्रतिदिन ली जाने वाली मात्रा : 2,000 मिली ग्राम पोटैशियम प्रतिदिन लेना चाहिए।

सोडियम
सोडियम रक्त के दाब और उसके वॉल्यूम को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये मांसपेशियों और तंत्रिकाओं की कार्यप्रणाली के लिए जरूरी है।
स्रोत : नमक इसका सबसे महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। दूध और शलजम में भी यह थोड़ी मात्रा में पाया जाता है।
कमी और अधिकता से होने वाली समस्याएं: सोडियम की कमी से थकान अधिक होती है। जी मचलाना, मांसपेशियों में ऐंठन और मानसिक असंतुलन की समस्या हो जाती है। इसका स्तर बढ़ने से उच्च रक्त और हृदय से संबंधित बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।
प्रतिदिन ली जाने वाली मात्रा : महिलाओं को 1300 मिली ग्राम प्रतिदिन व पुरुषों को 1500 मिलीग्राम प्रतिदिन लेना चाहिए।

आयरन
यह हीमोग्लोबिन का अभिन्न भाग है, जो लाल रक्त कणिकाओं में पाया जाता है। लाल रक्त कणिकाएं आपके शरीर के ऊतकों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराती हंै। 
स्रोत : आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों में अंडे, फलियां, हरी पत्तेदार सब्जियां और सूखे मेवे सम्मिलित हैं।
कमी और अधिकता से होने वाली समस्याएं: आयरन की कमी से एनीमिया हो जाता है। अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होती है। इसकी अधिकता हृदय को बीमार बना सकती है।
प्रतिदिन ली जाने वाली मात्रा : महिलाओं को 12 मिलीग्राम प्रतिदिन और पुरुषों को 8 मिलीग्राम प्रतिदिन लेना चाहिए।

मैग्नीशियम
मैग्नीशियम ऊर्जा उत्पादन में योगदान देता है, एंजाइम्स को उद्दीप्त करता है और कैल्शियम के स्तर को दुरुस्त रखता है।
स्रोत : साबुत अनाज, अखरोट, काजू, बादाम और पत्तेदार सब्जियों में पाया जाता है।
कमी और अधिकता से होने वाली समस्याएं: मैग्नीशियम का निम्न स्तर उच्च रक्तदाब और हृदय रोगों का कारण बन सकता है।  
प्रतिदिन ली जाने वाली मात्रा : महिला और पुरुष दोनों को 10-12 मिली ग्राम प्रतिदिन लेना चाहिए।

प्रमुख मिनरल कैल्शियम

कैल्शियम हमारे शरीर में सबसे अधिक पाया जाने वाला मिनरल है। यह हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में भी सहायता करता है। मांसपेशियों के संकुचन और तंत्रिकीय संवेदनाओं के आदान-प्रदान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रक्त नलिकाओं को सिकुड़ने और फैलने के लिए भी कैल्शियम की आवश्यकता होती है।


कमी और अधिकता से होने वाली समस्याएं
कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है। अधिकता के कारण बेचैनी, रक्तदाब अधिक होना और पथरी की समस्या हो जाती है। 
प्रतिदिन ली जाने वाली मात्रा
महिलाओं के लिए प्रतिदिन 1,000 मिलीग्राम और पुरुषों के लिए प्रतिदिन 1,200 मिलीग्राम जरूरी है।

आवश्यकता के अनुसार खनिज
मैक्रो-मिनरल्स 
जिन मिनरल्स की आवश्यकता हमें अधिक मात्रा में होती है, उन्हें मैक्रो-मिनरल्स कहते हैं। इन्हें मेजर मिनरल्स भी कहा जाता है। मैक्रो-मिनरल्स में कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटैशियम, सल्फर और क्लोराइड शामिल हैं। 
माइक्रो मिनरल्स 
जिन मिनरल्स की बहुत थोड़ी मात्रा की ही हमारे शरीर को आवश्यकता होती हैं, उन्हें माइक्रो मिनरल्स या ट्रैस एलिमेंट्स कहते हैं। आयरनर्, ंजक, मैग्नीज, कॉपर, आयोडीन, फ्लोराइड, कोबाल्ट और सेलेनियम माइक्रो मिनरल्स माने जाते हैं।

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