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परवरिश: सवालों की होगी बौछार ऐसे रहें तैयार

पांच साल की अनिका और सात साल का अक्षय अपनी मां को बिलकुल चैन नहीं लेने देते। जब शरारतें नहीं कर रहे होते तो उनके शैतान दिमाग में अजब-गजब सवाल घूमने लगते हैं। उनकी मां अंकिता किसी भी समझदार मां की तरह उनके सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन कभी-कभी सवाल इतने अटपटे होते हैं कि उसके लिए भी उत्तर दे पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। यह समस्या सिर्फ अंकिता की ही नहीं है बल्कि उस जैसी तमाम उन मांओं की है जो आज के दौर में बढ़ते बच्चों को एक संतुलित परवरिश देने का पूरा प्रयास कर रहीं हैं। कैसे बच्चों के सवालों का सामना करें, आइए जानें:

सवालों को दें अहमियत 
जब बच्चा कोई सवाल पूछे तो उसमें दिलचस्पी जरूर दिखाएं। बच्चों को सवाल पूछने पर हतोत्साहित बिल्कुल ना करें। उन्हें अक्सर बहुत सी चीजें आकर्षित करती हैं, लेकिन जब उनसे जुड़े सवालों के जवाब उन्हें नहीं मिलते हैं तो वह अपने तरीकों से उत्तर तलाशने की कोशिश करते हैं। उनका कोई सवाल पूछना माता-पिता के लिए एक बहुत बढ़िया मौका होता है कि वह अपने बच्चों से संवाद कायम कर सकें और उन्हें बातों ही बातों में कोई महत्वपूर्ण जानकारी दे सकें। जैसे कि अगर बच्चा आपसे सवाल पूछे कि बारिश कैसे होती है? तो आप बातों ही बातों में उसे पानी के भाप बनने से लेकर बारिश की बूंदों में बदलने की पूरी प्रक्रिया समझा सकती हैं। फिर उससे दोबारा जरूर पूछें कि क्या उसे बारिश होने की पूरी प्रक्रिया अच्छी तरह समझ आ गयी है या नहीं?

अटपटे सवालों के सुलझे हुए जवाब 
जब बच्चा बड़ा हो रहा होता है तो हर नई चीज उसे अपनी ओर आकर्षित करती है। उम्र से इस जिज्ञासा का कोई लेना-देना नहीं है। बच्चा चाहे छह साल का हो या सोलह साल का हो, उसकी कुछ भी नया जानने की इच्छा कभी खत्म नहीं होती। छोटे बच्चे जहां चिड़ियां और खरगोशों की बात करते हैं, वहीं बड़े बच्चे दूसरे तरह के सवाल पूछते हैं। उनकी जिज्ञासा अक्सर हमारी शारीरिक सरंचना या फिर विपरीत लिंग से बनने वाले रिश्तों को लेकर होती है। वे अपनी उम्र के हिसाब से सवाल पूछते हैं। यह बहुत जरूरी है कि बच्चे को उसके सवालों के लिए आप कभी ना डांटें। अगर सवाल का जवाब तुरंत देना संभव ना हो तो उसे प्यार से समझाएं कि आप थोड़ा फ्री होकर आराम से जवाब देंगी।

जब उत्तर आपके पास ना हो 
अंतरिक्ष से लेकर हवाई जहाज तक बच्चों को सभी कुछ आकर्षित करता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी जरूरी नहीं कि आपके पास हर सवाल का जवाब हो। ऐसे में कुछ भी मनगढंत  जवाब देने की जगह बच्चे को प्यार से कहें कि इस सवाल का जवाब अभी आपके पास नहीं है, लेकिन आप पता करने की कोशिश करेंगी। चाहे तो बच्चे को अपने साथ बैठा कर इंटरनेट  या एनसाइक्लोपीडिया खोल लें और उसकी जिज्ञासा शांत करने की कोशिश करें। इससे एक ओर आप दोनों के बीच रिश्ता मजबूत होगा, वहीं बच्चे को भी भरोसा होगा कि आप उसकी हर दुविधा में उसका साथ देने के लिए खड़ी हैं।

नई चीजों को लेकर  दिलचस्पी पैदा करें 
जरूरी नहीं है कि हमेशा ही बच्चों के दिमाग में कोई सवाल घूम रहा हो। लेकिन अगर कभी किसी चीज को देख कर आपको यह लगे कि आपके बच्चे को उसके विषय में पता होना चाहिए तो उसकी दिलचस्पी उसमें पैदा करें। उदाहरण के तौर पर अगर पार्क में आप कोई नया पंछी या फूल देखें तो बच्चे को उसे देखने के लिए आदेश देने की बजाय खुद ही कहें कि वाह! कितना खूबसूरत फूल है। बच्चे का ध्यान खुद-ब-खुद उसकी तरफ चला जायेगा। दरअसल, यह बच्चे की आदत होती है कि समझाये जाने या कहे जाने पर अक्सर वो उस काम को नहीं करते हैं या टाल जाते हैं, लेकिन जब उन्हें लगता है कि बड़े किसी चीज में दिलचस्पी दिखा रहे हैं तो वो भी उस ओर ध्यान देने लगते हैं। 
 

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  • Web Title:Parenting: How to answer kids endless questions