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गट फीलिंग या सिक्स्थ सेंस पर कब करें भरोसा

अकसर लोगों के दिमाग में यह प्रश्न आता है कि यह गट फीलिंग खुद-ब-खुद दिमाग में आती है, तो क्या इसे हर बार सुनना सही है? 
गट फीलिंग पर कब दें ध्यान
जब आपको उसमें पूरा अनुभव हो : आपकी गट फीलिंग कभी भी काम कर सकती है। फिर आप किसी नए व्यक्ति से बात कर रही हों या सड़क पार कर रही हों। गट फीलिंग आपको कभी भी सचेत कर सकती है। लेकिन उस पर हमेशा ध्यान देना भी सही नहीं होता। इसके लिए आपको पूरा अनुभव होना जरूरी है। इस बात पर ध्यान दें कि आपकी गट फीलिंग कब-कब बिल्कुल सही होती है। किस स्थिति में वो आपको सचेत करती है। अनुभवों के आधार पर ही अपनी गट  फीलिंग पर विश्वास करें। अगर पहले किसी मामले में आपकी गट फीलिंग सही साबित हो चुकी है तो आप भविष्य में भी वैसी ही गट फीलिंग पर विश्वास कर सकती हैं। 
जब दूसरे विकल्प की जरूरत महसूस हो: आमतौर पर गट फीलिंग तब सही होती है, जब वह बात आपके शरीर से संबंधित होती है। तो, जब भी आपको लगे कि आपके शरीर को आराम की जरूरत है या फिर आपको किसी बीमारी के लक्षण खुद में नजर आएं, पर डॉक्टर उसे गंभीरता से न ले, तो अपनी गट फीलिंग पर विश्वास करें। बहुत सारे ऐसे उदाहरण हैं, जब डॉक्टर को दिखाने और टेस्ट करवाने के बावजूद टेस्ट में कुछ नहीं आता, लेकिन शरीर नियमित रूप से आराम मांगता है। अपने अंदर की आवाज पर ध्यान दें और खुद को आराम दें।
जब घर खरीद रही हों : 
हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना घर हो, लेकिन कभी लोग पैसों की कमी या किसी अन्य कारण से अपनी खुशियों के साथ समझौता कर लेते हैं। लेकिन एक रिसर्च से पता लगा है कि जब बात बड़ी खरीद की होती है, तो उस  समय अपनी अंदर की आवाज पर ही ध्यान देना चाहिए। अपनी गट फीलिंग पर ध्यान देने वाले लोग उन लोगों के मुकाबले ज्यादा खुश होते हैं, जो सीधे तौर पर पैसों पर ध्यान देते हैं।

खुद से करें कुछ सवाल
कई बार ऐसा होता है कि हमारा दिमाग कुछ कहता है और गट फीलिंग कुछ और। उस स्थिति में यह समझना मुश्किल होता है कि दिमाग की सुनी जाए या गट फीलिंग पर ध्यान दिया जाए। ऐसी स्थिति में सबसे पहले खुद से ही सवाल करें और जो पहला जवाब आपके दिमाग में आए, उसे ही सुनें। यह इतना आसान भी नहीं है, क्योंकि उस समय दिमाग में हजारों विचार दौड़ रहे होते हैं, लेकिन अपने मन पर विश्वास करें।
इन स्थितियों को करें अनदेखा

  • अगर आपके सामने कोई झूठ बोल रहा है, तो उस समय आने वाली गट फीलिंग को अनदेखा कर दें। जी हां, आप किसी व्यक्ति के झूठ के आधार पर कोई निर्णय नहीं ले सकतीं। मनोविज्ञान के हिसाब से अगर देखा जाए, तो हर व्यक्ति के झूठ बोलने का अलग तरीका होता है। ऐसे में आप अपनी गट फीलिंग को न सुनें या उसे सही साबित करने की कोशिश न करें। झूठ बोलने वाले व्यक्ति की बॉडी लैंग्वेज, बोलने का तरीका और दूसरे लक्षण उसके झूठ की ओर इशारा करते हैं। ऐसे में उन्हें अनदेखा कर आगे की ओर बढ़ना चाहिए। उसके झूठ को सच साबित करने के चक्कर में अपनी ऊर्जा खराब न करें।
  • जब किसी को नौकरी पर रख रही हैं, तब भी अपनी गट फीलिंग की अनदेखी करें। आप किसी को भी सिर्फ इस वजह से नौकरी पर नहीं रख सकती हैं कि इस काम के लिए आपका मन हामी भर रहा है। गट फीलिंग को नजरंदाज करते हुए आपको उसकी योग्यता, प्रतिबद्धता आदि को ध्यान में रखते हुए उसे नौकरी देनी होगी।
     
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  • Web Title:when to trust your gut feeling