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आपके हाथों में है पैसे की ताकत?

दूसरों पर निर्भर होना किसे पसंद है? आपको भी नहीं होगा, फिर आर्थिक रूप से किसी और पर निर्भर होना आप सहज रूप से कैसे स्वीकार कर लेती हैं। जिंदगी को अपनी शर्तों पर, अपने तरीके से जीने का सपना अगर आप भी देख रही हैं तो उसकी राह आर्थिक आत्मनिर्भरता से होकर ही गुजरती है। फिर यह बात कतई मायने नहीं रखती है कि आपकी शादी हो चुकी है या नहीं। पढ़ाई के बाद नौकरी करने का सपना तो अब बड़ी संख्या में भारतीय लड़कियां भी देखने लगी हैं, पर शादी, बच्चे का जन्म या पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच यह सपना उतनी ही तेजी से मुरझा भी जाता है। कई महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद कुछ सालों का करियर ब्रेक लेती हैं, पर फिर कभी ऑफिस की ओर वापस अपने कदम बढ़ा ही नहीं पातीं।  सच्चाई यह है कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना जितना पुरुषों के लिए जरूरी है, उतना ही महिलाओं के लिए भी है। आप उम्र के किसी भी पड़ाव पर हों, आर्थिक रूप से किसी और पर निर्भर होना आपके लिए क्यों ठीक नहीं है, आइए जानें:

परेशानियां बता कर नहीं आतीं
उन घरों के लिए आर्थिक चुनौतियां ज्यादा कठिन होती हैं, जहां सिर्फ पुरुष कमाते हैं। ऐसा कई घरों में देखा जाता है कि पैसों की दिक्कत आते ही पूरा परिवार बिखर-सा जाता है। कहीं जेवर तो कहीं खानदानी जमीन बेचने के लिए लोग मजबूर हो जाते हैं। पर, यह स्थिति उन घरों में अक्सर नहीं होती, जहां पति-पत्नी दोनों कमाते हैं। कई साल बाद वापस नौकरी की शुरुआत करने वाली मेधा कहती हैं, ‘मैं वापस नौकरी पर कभी नहीं आ पाती, अगर मेरी सास की तबीयत अचानक ना बिगड़ी होती। उनकी तबीयत जब बिगड़ी तो खर्चे का बोझ अकेले पति के लिए सहना कठिन हो गया। ऐसे में मेरे बचत के पैसों से वह दौर हमने पार किया। ये सब देखने के बाद मेरी नौकरी के खिलाफ रहने वाले पति को समझ आ गया कि मेरा भी कमाते रहना बेहद जरूरी है। पिछले छह महीने से नौकरी पर वापस आ गयी हूं और सच बताऊं , घर के रख-रखाव में भी कोई दिक्कत नहीं आ रही।’

दुनिया आगे बढ़ रही है और जरूरतें भी
दुनिया आगे बढ़ती जा रही है। हम सब नए से नया सामान खरीदने की चाहत रखते हैं। जिंदगी में कुछ न कुछ सुधार करते रहना किसे पसंद नहीं होता। ऐसे में खर्चे तो बढ़ेंगे ही। कभी स्कूल की फीस बढ़ जाती है तो कभी बड़े घर के लिए ज्यादा निवेश करना होता है। इस स्थिति में अगर घर की महिलाएं भी कमाती हैं तो चाहतों को पूरा करना थोड़ा आसान तो हो ही जाता है। कामकाजी महिलाएं घर के खर्चे में सहयोग तो कर ही सकती हैं, बड़े बदलावों और सुधारों में भी इनका बड़ा योगदान हो सकता है। दो साल से अपना बिजनेस शुरू करने वाली शैली कहती हैं, ‘मैं इस बात को पूरी तरह से मानती हूं कि महिलाओं को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना चाहिए। मेरे साथ ऐसा ही हुआ है। हम लोग अपना घर लेना चाहते थे। अकेले पति की कमाई से ये संभव नहीं हो पा रहा था। अब मैं भी कमा रही हूं तो दो महीने पहले हमने अपना घर खरीद लिया है।’

घरेलू हिंसा को तमाचा बनेगी आर्थिक आजादी
कई घरों में औरतें घरेलू हिंसा का सामना करती हैं और इसे झेलने का सिलसिला सालोसाल चलता है। इसकी प्रमुख वजह है, आर्थिक निर्भरता। उन्हें लगता  है कि अगर अलग होने का निर्णय ले लिया तो उनकी जिंदगी को कौन संभालेगा। घरेलू हिंसा की शिकार दीप्ति अपना अफसोस जताती हैं, ‘मेरी सहेलियां कमाती हैं, पति के साथ खुश भी हैं। पर, मैं अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने में भी सालों तक डरती रही। हमेशा लगता था, पति मुझे खिला रहे हैं तो वो जो चाहे कर सकते हैं। पर, ऐसी सोच गलत है। जुर्म के खिलाफ आवाज तो उठानी ही चाहिए। मैं दो साल पहले जिंदगी से परेशान होकर मां के घर आई तो अपनी बीएड की डिग्री का इस्तेमाल किया। आज मैं शहर के बड़े स्कूल में पढ़ा रही हूं और अब पति को भी मुझसे कोई दिक्कत नहीं है। हम साथ हैं, खुश है। यह बदलाव शायद मेरे आत्मविश्वास के कारण आ पाया।’

बढ़ेगी निर्णय लेने की क्षमता
जो लोग कमाते हैं, वो खुद से जुड़े निर्णय ज्यादा आसानी से ले पाते हैं और इससे आत्मविश्वास बढ़ता है। बुटीक चलाने वाली रेनू कहती हैं, ‘मैं शादी के पहले 10 साल तक हर निर्णय के लिए पति पर निर्भर थी। वो कहते थे कि खुद आगे बढ़ो, पर मैं वहीं की वहीं रह जाती थी। पर, अब जब मैं कमा रही हूं, तो धीरे-धीरे मैं खुद अपने निर्णय लेकर आगे बढ़ रही हूं। जल्द बुटीक की ब्रांच खोलने वाली हूं और तैयारियां मैं खुद कर रही हूं।’

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  • Web Title:Is the power of money in your hands