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मुंह की सेहत पर न पड़े डायबिटीज का असर

डाइबिटीज एक खतरनाक स्वास्थ्य समस्या है। यह तब उत्पन्न होती है, जब मानव शरीर चीनी पचाने की अपनी क्षमता खोना शुरू कर देता है या पूरी तरह से खो देता है। कोई भी व्यक्ति डाइबिटीज के टाइप 1 या टाइप 2 से पीड़ित हो सकता है, लेकिन इनमें से किसी एक के भी होने पर मानव शरीर की गतिविधियां बाधित होने लगती हैं। यह बाधा शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है, विशेष रूप से आंखें, गुर्दे, हृदय, मसूड़े, नाक आदि। यह बीमारी जल्द ही उन्हें एक गंभीर समस्या में बांध देती है। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, देश की कुल आबादी के लगभग 20.3 प्रतिशत लोग डाइबिटीज से पीड़ित हैं और उनकी संख्या दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ती जा रही है। 

मुंह से शुरुआत की आशंका
कई शोध कार्यों और सर्वेक्षणों ने भविष्यवाणी की है कि यदि इससे गंभीरता से नहीं निपटा गया तो जल्द ही डाइबिटीज एक महामारी बन जाएगी, क्योंकि इसके मरीजों की संख्या हर साल 30-50% की तीव्र गति से बढ़ रही है। अधिकतर यह पाया जाता है कि लोगों में डाइबिटीज के शुरुआती लक्षण मुंह में दिखाई देते हैं। इसलिए समय पर निदान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए मुंह के स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान देने की आवश्यकता एक प्राथमिकता होनी चाहिए। पीरियोडॉन्टल (गोंद) रोग, कैविटी, शुष्क मुंह होना, फंगल संक्रमण आदि मुंह और दांत की आम समस्याएं हैं, जो पहले से ही डाइबिटीज के जोखिम का सामना कर रहे लोगों में मिलती हैं। ऐसे में उन्हें और अधिक सावधान रहने की जरूरत होती है।

प्रारम्भिक गम रोग (मसूड़ों की सूजन)
डाइबिटीज शरीर की बैक्टीरिया से लड़ने की ताकत को कम कर देती है। यदि आप नियमित ब्रशिंग और फ्लॉसिंग नहीं करते तो यह निश्चित रूप से आपको बड़ी मुश्किल में डाल देगी। आपके दांतों पर जितने अधिक समय तक परत बनी रहेगी, यह मसूड़ों (दांत के चारों ओर मसूड़ों के हिस्से) के लिए उतनी ही अधिक परेशानी का कारण हो सकती है। इसका परिणाम मसूड़ों की सूजन है, जो मसूड़ों में रक्तस्राव का भी कारण बनती है।

एडवांस्ड गम रोग (पेरियोडोंटाइटिस)
मसूड़ों की सूजन का सबसे गंभीर चरण पेरियोडोंटाइटिस है, जो आपके दांतों पर पकड़ बनाए रखने वाले नरम ऊतकों और हड्डियों को हटा देता है। आखिरकार यह मसूड़ों और जबड़ों की हड्डियों का पूरी तरह क्षरण कर देता है, जो दांतों के गिरने का कारण बनता है। डाइबिटीज रोगियों के लिए पेरियोडोंटाइटिस और अधिक गंभीर समस्या बन जाता है, क्योंकि ब्लड शुगर के स्तर में वृद्धि से संक्रमण का प्रतिरोध करने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है। इससे चिकित्सा प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

डाइबिटीज रोगियों की दंत चिकित्सा
अपने दांतों और मसूड़ों को डाइबिटीज के कारण होने वाले नुकसान से बचाने के लिए इसे गंभीरता से लेना चाहिए और चार बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गंभीर प्रतिबद्धता है जरूरी
अपने रक्त में शुगर के स्तर की ध्यान से निगरानी करें और अपने शुगर के स्तर को केवल एक निर्धारित सीमा में ही रखने के लिए संबंधित डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें। आप जितनी अच्छी तरह ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करेंगे, आपको दांतों या मसूड़ों संबंधित समस्याओं का जोखिम उतना ही कम हो जाएगा।

एक दिन में दो बार ब्रश करें 
आदर्श रूप से भोजन के बाद हर बार ब्रश करने की जरूरत होती है, सुबह जागने के बाद और रात को सोने से पहले। यदि आप चार बार ब्रश करने में सहज नहीं हैं तो प्रतिदिन कम से कम दो बार ब्रश करना आवश्यक है। इससे सभी हानिकारक बैक्टीरिया और कचरे बेहतर तरीके से बाहर निकल जाते हैं। कड़क ब्रश करने से कोई लाभ नहीं होगा, क्योंकि इससे रक्तस्राव हो सकता है और मसूड़ों में सूजन हो सकती है।  हर तीन महीने में कम से कम एक बार टूथब्रश बदलना जरूरी होता है।

आपकी सुंदर मुस्कुराहट बिगड़ न जाए
डाइबिटीज मानव शरीर में खतरनाक रूप से उच्च ब्लड शुगर के ऐसे स्तर के साथ प्रवेश करती है, जो पूरे शरीर को बिगाड़ सकती है। खासकर दांतों और मसूड़ों पर शुरू में ही इसका असर दिखता है। इस घातक बीमारी के कारण आपकी खूबसूरत मुस्कराहट को कोई नुकसान न हो, इसका ध्यान रखना आपके हाथ में है। याद रखें, आपको तेजी से बढ़ रहे ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने की आवश्यकता है, क्योंकि इसके बढ़ते हुए स्तर के साथ मुंह और दांतों की सेहत से संबंधित कई समस्याएं बढ़ती चली जाती हैं।

दिनचर्या में फ्लॉसिंग शामिल करें
दांतों के बीच और गम लाइन के नीचे से परत को निकालने के लिए फ्लॉसिंग एक स्वस्थ अभ्यास है। अगर इसे दैनिक दंत दिनचर्या में शामिल कर लिया जाये तो यह चमत्कार कर सकता है, क्योंकि यह उन भोजन के टुकड़ों और अंश को भी आसानी से निकाल देता है, जहां टूथब्रश नहीं पहुंच पाते।

बेहतर जीवनशैली की आदत डालें
धूम्रपान, मदिरापान और तंबाकू का सेवन जैसी अस्वास्थ्यकर जीवनशैली वाली दिनचर्या मसूड़ों के रोग सहित डाइबिटीज संबंधी जटिलताओं के जोखिम को गंभीर रूप से बढ़ा सकती है। इन अस्वास्थ्यकर दिनचर्याओं को तुरंत कम करना होगा, क्योंकि वे डाइबिटीज और दंत चिकित्सा दोनों के लिए खतरनाक हैं।

(रीजोव क्लिनिक की दंत चिकित्सक डॉ. प्रियंका गोयत से की गई बातचीत पर आधारित) 

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  • Web Title:oral health and diabetes