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Health TIPS: आर्थराइटिस रोग भी बढ़ा सकता है आपका वजन

मोटापा शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करता है। वजन बढ़ने से न केवल आपके जोड़ों और पैरों में दर्द होने लगता है, बल्कि अतिरिक्त भार के कारण शरीर पर जो दबाव पड़ता है, उसके कारण ऑस्टियो आथ्र्राइटिस की समस्या हो सकती है। कह सकते हैं कि मोटापे का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट ऑस्टियो आथ्र्राइटिस है। अगर आपका सही भार 50 किलोग्राम होना चाहिए, लेकिन आनुवंशिक कारणों या आवश्यकता से अधिक खाने के कारण आपका वजन सौ किलो हो गया है तो निश्चित ही यह आपके घुटने के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। यह अतिरिक्त दबाव समय के साथ ऑस्टियो आथ्र्राइटिस का कारण बन जाएगा। अंतत: जोड़ों में टूट-फूट इतनी अधिक हो जाएगी कि यह स्पाइन को प्रभावित करने लगेगी। गंभीर मामलों में कूल्हे और घुटने बदलवाने की आवश्यकता पड़ सकती है। युवावस्था में मोटापा बढ़ना चिंता का कारण है, क्योंकि इस उम्र में जिन लोगों का वजन अधिक होता है, उनको आगे चलकर ऑस्टियो आथ्र्राइटिस होने की आशंका बढ़ जाती है।

बढ़ती है आशंका
अधिकतर मोटे लोग घुटने के ऑस्टियो आथ्र्राइटिस  से पीड़ित होते हैं। इससे इनके चिकने और मुलायम ऑर्टिक्युलर कार्टिलेज में छोटी उम्र में ही टूट-फूट प्रारंभ हो जाती है। इससे घुटनों को और क्षति पहुंचती है और अंतत: इसके कारण आथ्र्राइटिस हो जाता है। जब हम चलते हैं, तब घुटनों पर हमारे शरीर के भार का 3 से 6 गुना दबाव पड़ता है। शरीर के आदर्श भार से ऊपर शरीर का जितना भी भार बढ़ता है, उससे जोड़ों पर अत्यधिक भार बढ़ता है, जिसके कारण कार्टिलेज क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। 
यह भी माना जाता है कि मोटे लोगों में वसीय ऊतक (फैट टिशु) एक हार्मोन लेप्टिन का निर्माण करते हैं, जो कार्टिलेज के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है और आथ्र्राइटिस का कारण बन जाता है। यह भार जोड़ों पर इतना अधिक दबाव डालता है कि इसके कारण तुरंत जोड़ों को नुकसान पहुंचने लगता है। इसकी शुरुआत जोड़ों में रक्त के सामान्य प्रवाह को बाधित (ब्लॉक) करने से होती है। यह आथ्र्राइटिस और दूसरी स्वास्थ्य जटिलताओं को ट्रिगर करता है।

वजन कम करना है जरूरी
जोड़ों में अधिक टूट-फूट होने पर कूल्हा और घुटना बदलवाना पड़ सकता है। यही वास्तविक समस्या है, क्योंकि जब तक मरीज अपना बढ़ा हुआ वजन कम नहीं करता, इन रिप्लेसमेंट सर्जरियों का कोई खास लाभ नहीं होता। कई बार देखा गया है कि अधिक वजन वाले बुजुर्ग अपने जोड़ों के दर्द का समाधान ढूंढ़ने के लिए सीधे ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरियों का विकल्प चुनते हैं। उन्हें यह पता ही नहीं होता कि इस समस्या की जड़ उनके मोटापे में है।

नियमित करें व्यायाम
मोटापे के कारण बढ़े हुए वजन को कम करने का सबसे आदर्श तरीका यह है कि या तो आप नियमित रूप से व्यायाम करें या डाइटिंग करें। फिजियोथेरेपी और दैनिक जीवन की गतिविधियों में परिवर्तन उन रोगियों की अत्यधिक सहायता कर सकता है, जिनका ऑस्टियो आथ्र्राइटिस प्रारंभिक चरण में है। वजन कम नहीं हो रहा है, कड़े व्यायाम या खानपान पर नियंत्रण करने जैसे सारे उपाय बेकार चले गए हैं तो आप विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद वजन कम करने वाली सर्जरी का विकल्प चुनें।
मोटापे से बचाव ऑस्टियो आथ्र्राइटिस और जोड़ों से संबंधित दूसरे दर्द को रोकने में सहायता कर सकता है। जब आप अपना वजन कम करने का प्रयास करें, तब भी यह ध्यान रखें कि जोड़ों को उसका नुकसान न हो। शरीर, विशेषकर हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों को मजबूत बनाना बहुत जरूरी है। सामान्य तौर पर हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायामों में चलना, दौड़ना, जॉगिंग, तैरना, एरोबिक्स आदि शामिल हैं।

अपना वजन धीरे-धीरे करें कम 
वजन अधिक है तो अपनी जीवनशैली या अपनी दिनचर्या में परिवर्तन करने से पहले किसी डॉक्टर से राय अवश्य ले लें। आपको यह समझना होगा कि मोटापे के कारण कुछ चीजें आपकी स्थिति को संभावित रूप से अधिक खराब कर सकती हैं। अपना वजन धीरे-धीरे कम करें। 

कौन है मोटा
पूरे विश्व में मोटापा स्वास्थ्य से जुड़ी एक प्रमुख समस्या है। बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) मोटापे को वर्गीकृत करता है, जिसका निर्धारण वजन (किलोग्राम)  और ऊंचाई के वर्ग (मीटर में) के आधार पर किया जाता है। उन्हें मोटा माना जाता है, जिनका बीएमआई 30 या उससे अधिक होता है।

मोटापे का उपचार
 

स्वस्थ ईिंटग प्लान अपनाएं
कम कैलरीयुक्त पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लें। अपने भोजन में फल, सब्जियों, सलाद, साबुत अनाज आदि अधिक मात्रा में शामिल करें। सैचुरेटेड वसा के सेवन से बचें और मिठाई व अल्कोहल का सेवन कम मात्रा में करें। एक दिन में तीन बार रेगुलर मील लें, जिनमें हैवी ब्रेकफास्ट, थोड़ा हैवी लंच और हल्का डिनर हो।

नियमित रूप से व्यायाम करें
वजन न बढ़े, इसके लिए एक सप्ताह में 150 से 300 मिनट व्यायाम करने की आवश्यकता होती है। तेज चलने, साइकिल चलाने जैसे व्यायाम बेहतर होते हैं।

अपने वजन पर नजर रखें
जो लोग सप्ताह में एक बार अपना वजन लेते हैं, वे अपने वजन को नियंत्रित करने में अधिक सफल होते हैं। वजन करने से आपको यह समझ में आ जाता है कि आपके प्रयास सफल हो रहे हैं।

(सर गंगाराम हॉस्पिटल के लैप्रोस्कोपिक ऑबेसिटी सर्जन डॉ. तरुण मित्तल से की गई बातचीत पर आधारित) 
 

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