DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बच्चा खुशियां ही नहीं ये बदलाव भी लाएगा

new born baby throw out of the hospital

बच्चे के जन्म के बाद जीवन में कई तरह के बदलाव आते हैं। उनमें से एक बदलाव का असर जीवनसाथी के साथ आपके रिश्ते पर भी पड़ता है। कैसे इस बदलाव का करें सामना, बता रही हैं सुमन बाजपेयी


बच्चे की किलकारी घर में गूंजी नहीं कि अचानक जीवन व रिश्ते में बदलाव दिखने लगता है। हालांकि उसके आने से पहले आप तरह-तरह की तैयारियों में जुट जाती हैं। उसकी तमाम जरूरतों से लेकर उसके लिए सुख-सुविधाएं, क्या-क्या आप नहीं करती हैं। इन सब तैयारियों के साथ-साथ अगर नन्हे-मुन्ने के साथ आने वाली खुशियों के अलावा जिम्मेदारियों के बारे में सोचकर बाकी तैयारियां भी कर ली जाएं, तो हर स्तर पर होने वाले बदलावों और चुनौतियों का सामना करना आपके लिए आसान होगा। पति-पत्नी से मां-बाप बनना रिश्ते में उथल-पुथल भी मचा सकता है। आपसी समझ से ही इस चुनौती पर जीत हासिल की जा सकती है। 

स्वीकार करें सच्चाई
यह मानकर चलें कि आपके पास समय की कमी होगी ही। अगर कामकाजी हैं तो पहले से ही यह स्वीकार करना बेहतर होगा कि मां बनने का असर कुछ वक्त के लिए आपके करियर पर भी पड़ सकता है। आपके अंदर शारीरिक व मानसिक बदलाव आ सकते हैं। आप पति की बजाय बच्चे को ज्यादा समय देंगी और हो सकता है इससे पति खुद को उपेक्षित महसूस करने लगें। आप बढ़ती जिम्मेदारी की वजह से थकान महसूस करेंगी और स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाएगा। बेवजह पति पर गुस्सा निकलेगा और दोनों एक-दूसरे से नाराज होकर अपने-अपने तरीके से जीने की कोशिश करने लगेंगे।  इनमें से बहुत कुछ होगा। और इन बदलावों को आप जितनी जल्दी स्वीकार लेंगी, उतनी जल्दी समस्या का निदान भी तलाश पाएंगी। 

सहायता लेने में हिचकिचाहट कैसी?
आजकल एकल परिवारों का चलन बढ़ गया है। अमूमन घरों में कोई बुजुर्ग या कोई अन्य सदस्य नहीं होता। नवजात बच्चे को अकेले संभालने से ज्यादा मुश्किल काम कुछ और नहीं होता । ऐसे में अगर आपको अपने परिवार के अन्य सदस्यों से मदद मांगनी पड़े, तो इसमें जरा भी हिचकें नहीं। मैक्स हॉस्पिटल, पंचशील की मेंटल हेल्थ व बिहेवियरल साइंसेज की कंसल्टेंट डॉ. सौम्या मुद्गल के अनुसार, ‘बच्चे के आगमन से छह महीने पहले से ही यह तय कर लें कि उस समय अपनी मदद व देखभाल के लिए किसे बुलाना है। मेड रखनी है तो उसका भी प्रबंध कर लें। अगर परिवार का कोई सदस्य उस समय आपके साथ हो तो एक भावनात्मक संबल मिलता है। आप उनके अनुभवों का फायदा बच्चे की परवरिश करने में उठा सकती हैं। साथ ही बेफिक्र होकर कुछ पल अपने लिए भी निकाल सकती हैं। अगर कोई मदद की पेशकश करे तो मदद लेने में जरा भी नहीं हिचकें। सच मानिए, इससे बच्चे की शुरुआती परवरिश आपके लिए आसान हो जाएगी।’

खुद को न करें नजरअंदाज
मां बनने के बाद शारीरिक बदलाव आना स्वाभाविक है। आपको अपने शरीर के बदले हुए आकार को लेकर तनाव हो सकता है। बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं द्वारा पति से दूरी बनाने की एक आम वजह यह है कि पत्नी को लगता है कि वह अब पहले जैसी सुंदर नहीं रही। बच्चे की जरूरतों को पूरा करने में खुद पर ध्यान देना संभव नहीं हो पाता। डॉ. सौम्या कहती हैं कि बेशक आप अपनी सहेलियों के साथ घूमने न जा पाएं, पर खुद के लिए समय अवश्य निकालें। खुद पर ध्यान देंगी तभी तो आप खुश रह पाएंगी और तभी रिश्ते में से खुशी झलकेगी। कभी-कभार पति पर बच्चे की जिम्मेदारी देकर बिना किसी अपराध बोध के पार्लर जाएं।

जिम्मेदारियां बांटें
घर का काम बढ़ेगा और बच्चे के जन्म के बाद काम को और मुस्तैदी से करना होगा। बच्चे को यह नहीं पता होता कि उसकी मां किसी और काम में व्यस्त है। उसे तो जो चाहिए, तुरंत उसकी मांग पूरी करनी होगी। पति को लगेगा कि आप केवल मां की भूमिका निभा रही हैं। इसके लिए पति को भी कामों में शामिल करें। उन्हें कुछ जिम्मेदारियां सौंपें। पति को अपने सपोर्ट सिस्टम का जरूरी हिस्सा बनाएं। मदद मांगने में हिचकें नहीं वरना हो सकता है कि आपका घर हमेशा अस्त-व्यस्त रहे और खाना अकसर बाहर से मंगवाना पड़े। आपस में तय कर लें कि कौन, कब, क्या काम करेगा। इस तरह आपसी संवाद भी बढ़ेगा और सामीप्य भी। ‘हैपिली मैरिड विद किड्स’ किताब के लेखक कैरोल उम्मेर्ल ंलडक्विस्ट कहते हैं कि महिलाएं यही सोचती हैं कि पति से मदद मांगने की जरूरत क्या है? क्या उन्हें नजर नहीं आ रहा कि मुझ पर काम का बोझ बढ़ गया है? अगर आपके पति इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं तो उनसे मदद करने का अनुरोध कीजिए। यकीन मानिए वे ज्यादा खुशी से काम करेंगे। काम पूरा होने के बाद उन्हें धन्यवाद अवश्य कहें। इसका फायदा यह होगा कि भविष्य में आपके पति बिना कहे घर से जुड़ी ढेर सारी जिम्मेदारी पूरी कर देंगे।

समझें एक-दूसरे की भावनाओं को
बच्चे के बाद आप लोगों की निजी जिंदगी पहले की तरह नहीं रह पाएगी, कम से कम छह महीनों तक। एक-दूसरे का सामीप्य, यहां तक कि ‘टच एंड किस’ भी शायद सपने जैसा लगने लगे। बेहतर होगा कि पहले ही इन विषयों पर बात कर लें। एक-दूसरे की भावनाओं व जिम्मेदारियों को समझें और रिश्ते में दूरी न आने दें। एक-दूसरे के साथ वक्त बिताने का मौका तलाशें। बच्चे से जुड़ी जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी साथ वक्त बिताया जा सकता है। फैमिली टाइम जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी कपल टाइम भी है। थोड़ा वक्त केवल एक-दूसरे के लिए भी निकालें। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Not only child bring happiness this change will also bring