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प्रदूषण : नवजातों के लिए है और नुकसानदेह

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण ऐसे स्तर पर पहुंच गया है, जो हानिकारक तो है ही, जानलेवा भी है। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर सर्दी के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षा सीमा से लगभग 30 गुना आगे पहुंच गया है। ऐसे माहौल में नवजातों पर अतिरिक्त ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि उन पर इसका बुरा असर और अधिक होता है। 

नवजात की सेहत
दिल्ली में सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण के साथ सर्दी- जुकाम और फ्लू आदि की समस्या भी आम हो जाती है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों पर इसका असर और अधिक होता है। नवजात की प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर होती है, जिस कारण उन्हें वायु प्रदूषण और सर्दी से काफी नुकसान की आशंका रहती है। ठंडी हवा बच्चे के फेफड़ों में सांस लेने की समस्याएं पैदा कर सकती है। चाहे वह स्मॉग हो या कड़कड़ाती ठंड, नवजातों को इनमें से किसी भी स्थिति में घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। बच्चे को ऐसी जगह में रखने की जरूरत होती है, जो न ज्यादा गर्म हो और न ही ज्यादा ठंडी।

फेफड़ों पर होता है अधिक असर
नवजातों के फेफड़े बहुत ही संवेदनशील होते हैं। फेफड़े विकसित होने वाले सबसे अंतिम अंग हैं, जिसका खास तौर पर यह अर्थ है कि अगर नवजात अपरिपक्व है तो उसके फेफड़ों को प्रदूषण से सुरक्षित रखने की जरूरत है। बच्चे के फेफड़े प्रदूषण की आदत डालने में सक्षम नहीं हैं। अपने बच्चे को घर में रखकर आप उसके फेफड़ों पर प्रदूषण का स्तर पड़ने से रोक सकते हैं। शुरुआत के कुछ हफ्तों में उसे अलग रखना और उसे जीवाणुरहित कपड़े पहनाना बहुत जरूरी होता है। नवजातों को अकसर सर्दी व फ्लू के कीटाणु नुकसान पहुंचाते हैं, जिस वजह से उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ता है। 

पाचन-तंत्र भी होता है कमजोर
नवजातों का पाचन-तंत्र भी इस तरह के कीटाणुओं से निबटने के लिए तैयार नहीं होता। ये असल में आसानी से पचने योग्य मां के दूध या फॉर्मूले के लिए ही तैयार होता है। मतली, उल्टी और डायरिया पेट की संक्रामक बीमारियों की पारंपरिक निशानी है। रोटावायरस नवजातों व बच्चों में उल्टी आने व डायरिया का प्रमुख कारण है। यह 3 माह से 15 माह तक के बच्चों में सबसे सामान्य है। एडीनो वायरस व एस्ट्रो वायरस पेट के ऐसे दो अन्य कीड़े हैं, जो अकसर ही नवजातों व बच्चों को संक्रमित करते हैं। नवजात के लिए ये वायरस जानलेवा साबित हो सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान
सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण कई गुना बढ़ जाता है। माता-पिता व संबंधियों को नवजातों को बार-बार छूने से बचना चाहिए। ये बच्चे की छोटी उंगलियों व अंगूठों को छूना चाहते हैं और बच्चे की मुलायम त्वचा को महसूस करना चाहते हैं। लेकिन नवजात बच्चे को एक छोटा सा स्पर्श भी उस तक कीटाणु, बैक्टीरिया या वायरस पहुंचा सकता है। नवजात बच्चे के माता-पिता को यह सुझाव दिया जाता है कि अकारण ही बच्चे को छूने से बचें। बेहतर होगा कि उन्हें कीटाणुयुक्त उंगलियों से दूर रखें या हाथ अच्छी तरह धोकर ही बच्चे को छुएं।

(नर्चर आईवीएफ सेन्टर की नारी रोग व प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. अर्चना बजाज धवन से की गई बातचीत पर आधारित।)  

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