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28 अक्तूबर, 2020|3:41|IST

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Health TIPS: डायरिया से बचे रहेंगे, सफाई का रखें ध्यान

बार-बार दस्त लगे तो इसे डायरिया कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार यदि दिन में पांच या इससे अधिक बार मल त्याग के लिए जाना पड़े तो इसे चिंताजनक स्थिति माना जाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यदि दिन में तीन से अधिक बार ज्यादा मात्रा में ढीला मल त्याग हो रहा है तो इसे डायरिया का लक्षण माना जाना चाहिए। डायरिया दो तरह का होता है। एक्यूट और क्रॉनिक। एक्यूट डायरिया जीवाणु, विषाणु या पैरासाइट के कारण होता है। यह सामान्यत: हफ्ते भर में ठीक हो जाता है, लेकिन जब बीमारी हफ्ते भर से ज्यादा रह जाए तो उसे क्रॉनिक कहा जाता है। क्रॉनिक डायरिया आंत की विभिन्न बीमारियों के कारण हो सकता है। इसमें पाचन-तंत्र की गंभीर गड़बड़ी पाई जाती है। 

क्या हैं कारण
0 सबसे बड़ा कारण है खाने-पीने की चीजों में प्रदूषण, उनका बासी या खराब होना।
0 प्रदूषित पानी पीने से डायरिया की स्थिति पैदा हो सकती है।
0 वायरल संक्रमण।
0 आंतों में बैक्टीरिया का संक्रमण।
0 पाचनशक्ति कमजोर होना।
0 शरीर में पानी की कमी होना।
0 किसी खास बीमारी के कारण आंतों में कमजोरी आ जाए तो भी डायरिया हो सकता है।

वायरस हैं जिम्मेदार 
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार तीन तरह के वायरस खासतौर से डायरिया का संक्रमण फैलाते हैं। नोरो-वायरस और रोटा-वायरस पांच साल से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा संक्रमित करते हैं। वयस्कों को भी ये अपना शिकार बना सकते हैं, पर एडेनो-वायरस किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए डायरिया का कारण बन सकता है।  

क्या-क्या हैं लक्षण 
डायरिया का शुरुआती लक्षण है बार-बार दस्त लगना। दस्त पतला होता है, उसमें पानी का अंश ज्यादा होता है। दिन भर में चार-पांच या इससे भी ज्यादा बार दस्त हो सकते हैं। बीमारी बढ़ने लगे तो आंतों में मरोड़ या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द भी होने लगता है। डायरिया जल्दी काबू में न आए तो डीहाइड्रेशन की स्थिति पैदा हो सकती है और मरीज कमजोरी महसूस कर सकता है। ऐसी स्थिति में बुखार आना सामान्य बात है। शरीर में पानी के साथ खनिज तत्वों की ज्यादा कमी होने लगे तो मरीज बेहोशी की हालत में जा सकता है और स्थिति जानलेवा बन सकती है।

कौन आता है इसकी चपेट में 
पांच साल तक के बच्चे डायरिया की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होती है। साफ-सफाई में जरा-सी असावधानी उनके लिए डायरिया का कारण बन जाती है। गंदे हाथों से छूने, डायपर बदलते समय सफाई पर ठीक से ध्यान न देने अथवा बच्चों द्वारा गंदी चीजों को छूकर आंख, मुंह, नाक आदि छूने-मलने से संक्रमण की स्थिति पैदा हो सकती है। पूरी दुनिया में डायरिया के कुल मामलों में से नब्बे फीसदी विकासशील और अविकसित देशों में होते हैं। बच्चों के बाद, डायरिया की चपेट में आने वालों में बुजुर्गों की संख्या सबसे ज्यादा है।

बरसात में रहें सावधान 
गर्मी के अलावा बरसात के मौसम में डायरिया की आशंका सबसे ज्यादा होती है। बारिश की वजह से नदी-नाले, ताल-तलैया सब उफान पर होते हैं। जगह-जगह जमी गंदगी तैरने लगती है। अतिरिक्त सावधानी न रहे तो पीने का पानी भी आसानी से प्रदूषित हो जाता है। इससे डायरिया के विषाणु किसी को भी बड़ी आसानी से संक्रमित कर सकते हैं। पानी में भीगने और मिट्टी में खेलने की बच्चों की आदत होती है। इस कारण वे ज्यादा आसानी से इसके शिकार बनते हैं। बरसात के मौसम में खाने-पीने की चीजों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करना चाहिए। 

पानी की कमी न होने दें 
डायरिया हो जाए तो इस बात का सबसे पहले ध्यान रखें कि शरीर में पानी की कमी न हो पाए। समय-समय पर ओआरएस घोल पीते रहें। नीबू-पानी पिएं। एक गिलास पानी में एक चुटकी नमक और थोड़ी-सी शक्कर मिलाकर बार-बार पिएं। इससे शरीर डीहाइड्रेशन का शिकार नहीं होगा। साफ-सुथरे फलों का रस पिएं। बाजार में बिकने वाला जूस भूलकर भी न पिएं। तरल पदार्थों का सेवन करें, लेकिन दूध और दूध से बनी चीजों से परहेज करें।

हाथ धोएं डायरिया से बचें
महज ठीक तरह से हाथ धोकर भी डायरिया से काफी हद तक बचे रहा जा सकता है। बच्चों के लिए हाथ धोने का तरीका खासतौर से महत्वपूर्ण है। असल में बच्चे हाथ धोने पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। बाथरूम से आने के बाद, खेलने-कूदने के बाद या खाने से पहले अगर बड़े ध्यान न दें तो बच्चे अकसर लापरवाही कर जाते हैं और डायरिया की चपेट में आ जाते हैं। जाहिर है कि बच्चों में हाथ धोने की आदत डालने की जरूरत होती है। हाथ धोने के पानी में जरा भी शंका हो तो गुनगुने पानी से हाथ धोएं। एंटी बैक्टीरियल साबुन इस्तेमाल करें। साबुन में झाग उठाकर कम से कम 20 से 30 सेकेंड तक बच्चे का हाथ धोएं। हाथ धोने के बाद साफ और सूखे तौलिये से हाथ पोंछना भी न भूलें। 

कब जाएं डॉक्टर के पास 
सामान्य घरेलू उपायों से डायरिया काबू में न आए तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाना चाहिए। बहुत छोटे बच्चों को डायरिया हो जाए तो भी घरेलू उपचारों का ज्यादा खतरा नहीं उठाना चाहिए। बच्चों के मामले में ज्यादा लापरवाही इसलिए भी ठीक नहीं है कि ज्यादा समय तक डायरिया रह जाए तो यह शरीर और मस्तिष्क के विकास पर बुरा असर डाल सकता है। एक बार ठीक होने के बाद डायरिया के लक्षण दोबारा दिखने लगें तो डॉक्टर को दिखाना बेहतर है। कोई भी असामान्य लक्षण दिखाई दे तो भी डॉक्टर के पास जाना ही बेहतर है। आसपास कोई प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र हो तो डायरिया के इलाज के लिए यह निरापद उपाय हो सकता है।

आजमाएं ये उपाय
1. डायरिया होते ही मिर्च-मसाले की चीजें खाना तुरंत बंद कर दें।
2. पानी और तरल पदार्थ भरपूर मात्रा में लें।
3. केला और सेब का मुरब्बा खाएं।
4. छाछ या दही के साथ ईसबगोल की भूसी लेने से पेट की एक-दो बार में ही अच्छी सफाई हो जाती है और मल बंधकर आने लगता है।
5. चावल डायरिया में फायदेमंद साबित हुआ है। इससे आंतों की हलचल ठीक होने लगती है और मल बंधने लगता है। 
6. अदरक का रस, नीबू और काली मिर्च का जरा-सा चूर्ण पानी में मिलाकर पीने से राहत मिलती है। 
7. भूख लगने पर मूंग की खिचड़ी और साबूदाना खाएं। भोजन बंद न करें, पर पचने में हल्का भोजन लें।
8. फल और सब्जियों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छी तरह धो लें।
9. रेहड़ी-खोमचे पर कुछ खाएं तो पहले निश्चित कर लें कि वहां साफ-सफाई है या नहीं।
10. डायरिया की स्थिति में हो सके तो पानी को उबाल कर ठंडा करके पिएं।
11. वैज्ञानिक शोधों के अनुसार पीने के पानी को तांबे के बरतन में रखना बेहतर उपाय है। तांबे के बरतन में पानी रखने से 40-45 मिनट के भीतर तमाम तरह के रोगाणु नष्ट हो जाते हैं। 
12. भूरे चावल को उबाल कर छानें और जो माड़ निकले, उसे ठंडा करके डायरिया के मरीज को दें।

होमियोपैथी है कारगर

डायरिया में होमियोपैथी बिना किसी साइड इफेक्ट के बेहद कारगर साबित हो सकती है। दस्त की बीमारी में आमतौर पर लक्षण काफी स्पष्ट रहते हैं, इसलिए होमियोपैथी डॉक्टर के लिए इसका इलाज भी ज्यादा मुश्किल भरा नहीं रहता। अच्छी बात है कि लक्षण ठीक से मिल जाने पर डायरिया के अनुषंगी लक्षण बुखार, कमजोरी, थकावट आदि सभी परेशानियां आसानी से ठीक हो जाती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन नहीं 
करना चाहिए।  

बड़े काम का सेब 
कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ केलगरी के स्टीफन बी. फ्रीडमैन की अगुआई में हुए एक शोध के अनुसार डायरिया होने पर किसी इलेक्ट्रोलाइट पेय पदार्थ की तुलना में सेब का पतला जूस सबसे बेहतर इलाज हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सेब के पतले जूस से शरीर में पानी की कमी का इलाज किया गया तो यह 83 प्रतिशत बच्चों में कारगर रहा।  

(होमियोपैथी के विशेषज्ञ डॉ. ए. के. अरुण, एलोपैथ विशेषज्ञ डॉ. सुरेश यादव व आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य गोपालशरण गर्ग से की गई बातचीत पर आधारित)