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मोटापा जो बढ़ाए डायबिटीज का खतरा

डायबिटीज की समस्या अब आम होती जा रही है। यूं तो इसके अनेक कारण हैं, लेकिन उनमें सबसे प्रमुख कारण के रूप में सामने आ रहा है बढ़ता मोटापा। चाहे ऑफिस में काम करने वाले युवा हों या टीवी और कंप्यूटर पर अधिक समय बिताने वाली महिलाएं या फिर फास्ट फूड पर टूटने वाले बच्चे, सब मोटापे का शिकार हो रहे हैं और डायबिटीज उन्हें अपनी गिरफ्त में लेने की कोशिश कर रही है। अपोलो हॉस्पिटल के डॉ. अभिषेक शुक्ला कहते हैं कि यह बीमारी उन लोगों को अधिक होती है, जिनका वजन अधिक होता है। सामान्यतया बीएमआई 32 से ज्यादा के लोगों में यह बीमारी अधिक होती है।

डायबिटीज को जानना है जरूरी
डायबिटीज को दो रूपों में जाना जाता है। एक है टाइप 1 डायबिटीज और दूसरी है टाइप 2 डायबिटीज। टाइप 1 डायबिटीज में इंसुलिन कम बनती है या फिर इंसुलिन बननी बंद हो जाती है और इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। टाइप 2 डायबिटीज से प्रभावित लोगों का ब्लड शुगर स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिसको नियंत्रित करना बहुत मुश्किल होता है।

कौन बनते हैं आसान शिकार
0 ज्यादा मोटे या ओवरवेट लोग।
0 45 साल से ज्यादा उम्र के लोग।
0 जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति।
0 परिवार में किसी को भी टाइप 2 डायबिटीज हो।
0 व्यायाम न करने वाले।
0 जिनमें एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हो या ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर ज्यादा हो।

महिलाओं में बढ़ता खतरा
महिलाओं में भी डायबिटीज का बड़ा कारण मोटापा तो है ही, और भी कई कारण उन्हें डायबिटीज की ओर धकेलते हैं। गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को डायबिटीज हो जाती है, उन्हें टाइप 2 डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि किसी महिला का बच्चा 4 किलोग्राम का है तो उसे भी डायबिटीज हो सकती है। जिन महिलाओं को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम होता है, उनको डायबिटीज का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।

बच्चों के खानपान पर रखें नजर
आजकल टाइप 2 डायबिटीज के केस में बच्चों की तादाद भी बढ़ती जा रही है, इसलिए अपने बच्चों की उचित देखभाल के लिए यह भी जरूरी है कि आपको डायबिटीज की उचित जानकारी हो। यदि आपके बच्चे में डायबिटीज होने की आशंका है तो आपके पास कुछ खास जानकारियां होनी आवश्यक हैं। उनके खानपान और खेलकूद पर विशेष ध्यान दें, ताकि उनका वजन नियंत्रित रहे।

लक्षणों को पहचानें
जब टाइप 2 डायबिटीज होती है तो इसके कारण शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने से थकान, कम दिखना और सिरदर्द जैसी समस्या होती है। चूकि शरीर से तरल पदार्थ अधिक मात्रा में निकलते हंै, इसके कारण रोगी को अधिक प्यास लगती है। चोट या घाव लगने पर जल्दी ठीक नहीं होता। डायबिटीज के लगातार अधिक बने रहने का प्रभाव आंखों की रोशनी पर पड़ता है। इस कारण डायबिटिक रेटिनोपैथी नामक बीमारी हो जाती है, जिससे आंखों की रोशनी में कमी आ जाती है।
0 वजन ज्यादा होना डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है, वहीं वजन कम होना भी डायबिटीज होने का एक संकेत हो सकता है।
0 डायबिटीज के मरीज अचानक कमजोरी महसूस करने लगते हैं। जब रोगी को हाई ब्लड शुगर होती है तो शरीर को ग्लूकोज का प्रबंधन करने में परेशानी होती है।
0 काम करने के दौरान या बाद में थकान होना आम बात है, लेकिन हमेशा थकान बनी रहती है तो यह संकेत है कि आपको अपनी सेहत पर ध्यान देने और चेकअप करवाने की जरूरत है।
0 टाइप 2 डायबिटीज में मरीज का शुगर स्तर कुछ समय के लिए बढ़ जाता है। इसके लक्षण धीरे-धीरे नजर आते हैं।
0 डायबिटीज मरीज के लिए खाना पचाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, जिस कारण मरीज को बार-बार वॉशरूम जाना पड़ता है।
0 बार-बार वॉशरूम जाने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे प्यास अधिक लगती है।
0 डायबिटीज की शुरुआती स्थिति में ठीक तरह से देखने में दिक्कत होती है, लेकिन ऐसा नहीं है कि आंखों की रोशनी के खत्म होने का डर है।
0 डायबिटीज के कारण पैरों में झनझनाहट महसूस होने लगती है।
0 शरीर में ग्लूकोज की कमी के कारण बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है, जिस कारण त्वचा संक्रमण के साथ और कई तरह के संक्रमण हो जाते हैं।

बदलें अपना खानपान
टाइप 2 डायबिटीज से बचने के लिए और अगर यह हो भी जाये तो खानपान बदलकर और परहेज करके इसके प्रभावों को कम किया जा सकता है। कम चर्बी और कम कैलरी वाला आहार चुनें। भोजन में फल, सब्जियों और अनाज की मात्रा ज्यादा रखें। खाने में नियमित रूप से बदलाव करते रहें। करेला, मेथी, जामुन, लहसुन, प्याज, अलसी, दालचीनी के पानी का सेवन बढ़ा दें। फाइबरयुक्त आहार जैसे सेब, मूंग दाल, जई, सोयाबीन इत्यादि डायबिटीज को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं। प्रोटीन लें, जो फलियों, मछली और त्वचारहित चिकन में उपलब्ध है। जैतून का तेल, मेवे, एवोकाडो, ओमेगा 3 और एमयूएफए जरूर लें।

योग और व्यायाम जरूरी
योगाचार्य डॉ. दीपक झा कहते हैं कि नियमित व्यायाम ना केवल आपको स्वस्थ रखता है, बल्कि इन्सुलिन के प्रति संवेदनशीलता को भी बढ़ाता है। सप्ताह में पांच या अधिक बार 30 मिनट तक पैदल चलें। आप तैरना, बाइक चलाना या अन्य मध्यम स्तर के जोर डालने वाले व्यायाम कर सकते हैं। स्ट्रेचिंग वाले व्यायामों से लचीलापन बढ़ता है, तनाव कम होता है और मांसपेशियों की जकड़न से बचाव होता है। सबेरे टहलने निकलेंं, साइकिल चलाएं।

इन बातों का रखें ध्यान
करवाते रहें ब्लड शुगर की जांच : डायबिटीज की जांच अकसर इसके लक्षण दिखने के बाद ही की जाती है। मरीजों को पहले एक डाइबिटीज जांच से गुजरना होता है। कुछ को रेंडम ग्लूकोज टेस्ट, फास्टिंग ग्लूकोज व इंसुलिन या 75 ग्राम ग्लूकोज लेने के दो घंटे बाद ग्लूकोज टेस्ट कराना होता है। कभी-कभी डॉक्टर औपचारिक रूप से ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट करते हैं।
तनाव से दूर रहें : जितना हो सके, तनाव से दूर रहें और अपने खाने-पीने का ध्यान रखें, क्योंकि तनाव डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छा नहीं होता। किसी भी प्रकार का तनाव डायबिटीज के मरीज का ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है, साथ ही ब्लड ग्लूकोज स्तर भी।

समय पर लें दवा
बाजार में बहुत तरह का ओरल मेडिकेशन उपलब्ध है, जो डायबिटीज के मरीजों को दिया जा सकता है और उनसे अच्छे रिजल्ट भी देखे गए हैं। कुछ दवाएं इन्सुलिन की मात्रा भी बढ़ा देती हैं।

डायबिटीज की दवा
एलोपैथी दवा :
डॉ. के. के. अग्रवाल कहते हैं कि एलोपैथी में डायबिटीज की रोकथाम के लिए इंसुलिन दी जाती है। इंसुलिन एक तरह का हॉर्मोन है, जो हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी है। इंसुलिन के जरिए ही रक्त कोशिकाओं को शुगर मिलती है यानी इंसुलिन शरीर के अन्य भागों में शुगर पहुंचाने का काम करती है। इंसुलिन द्वारा पहुंचाई गई शुगर से ही कोशिकाओं को ऊर्जा मिलती है।
आयुर्वेदिक दवा : वैदिक ग्राम के डॉ. प्रियुष (पीयूष) जुनेजा का कहना है कि आयुर्वेद में डायबिटीज का उपचार सिर्फ दवा और पर्याप्त आहार के सेवन से किया जा सकता है। करेला, आंवला और जामुन का जूस, गेहंू के ज्वारे का रस, एलोवेरा आदि से शुगर नियंत्रित होती है। 
होमियोपैथी दवा : होमियोपैथी में आर्सेनिक ब्रोमेट्रम, कोका, कोडीनम, सीजिजियम, फॉस्फोरस, इंसुलिन, यूरेनियम नाइट्रिकम, ओरम, हेलोबोरस आदि डॉक्टर की सलाह से लें।

इनसे करें परहेज
नमक, शक्कर, वसा, रेड मीट, सामान्य दूध और इनके उत्पाद जैसे दही, चाय और कॉफी, मैदा और इसके उत्पाद आदि से बचें। 

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  • Web Title:diabetes and obesity