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डाइबिटीज : चाहे आपकी अच्छी जीवनशैली

डाइबिटीज को साइलेंट और पोटेंशियल किलर दोनों कहते हैं। साइलेंट किलर इसलिए, क्योंकि इसके लक्षणों को नजरअंदाज करना आसान है। पोटेंशियल किलर इसलिए, क्योंकि रक्त में शुगर का उच्च स्तर जहर के समान कार्य करता है और इस कारण शरीर के कई अंग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। भारत की 5 प्रतिशत जनसंख्या डाइबिटीज से पीड़ित है। 

डाइबिटीज
डाइबिटीज जीवनशैली से जुड़ी एक लाइलाज बीमारी है। डाइबिटीज तब होती है, जब अग्नाशय पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता या जब शरीर प्रभावकारी तरीके से अपने द्वारा स्रावित उस इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पाता। इंसुलिन एक हार्मोन है, जो रक्त की शर्करा को नियंत्रित रखता है। अनियंत्रित डाइबिटीज के कारण रक्त में शर्करा का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिसे हाइपरग्लाइसेमिया कहते हैं। 
डाइबिटीज को जो बात अधिक गंभीर बनाती है, वह यह है कि यह बीमारी नहीं, मेटाबॉलिक सिंड्रोम है, जो कई बीमारियों का घर है। इससे शरीर का प्रत्येक अंग प्रभावित होता है। अगर समय रहते इसका पता न चल पाए और इसे नियंत्रित नहीं किया जाए तो किडनी फेल होने, ब्रेन स्ट्रोक, रेटिनोपैथी, हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 

कैसी-कैसी डाइबिटीज 
डाइबिटीज मुख्यत: तीन प्रकार की होती है। टाइप 1 डाइबिटीज, टाइप 2 डाइबिटीज और गेस्टैशनल डाइबिटीज। वैसे इसके एक और प्रकार टाइप 1.5 के मामले भी सामने आ रहे हैं।
0 टाइप 1 डाइबिटीज: इससे पीड़ित लोगों में या तो इंसुलिन का निर्माण नहीं होता या फिर बहुत कम मात्रा में होता है। यह किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन बच्चे और युवा इसके ज्यादा शिकार होते हैं। इसमें रक्त में ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रखने के लिए इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है।
0 टाइप 1.5 डाइबिटीज: इसे टाइप 3 डाइबिटीज के नाम से भी जाना जाता है। यह अधिकतर वयस्क लोगों को ही होती है। डाइबिटीज के इस प्रकार को मैनेज करने के लिए तुरंत इंसुलिन की आवश्यकता नहीं होती। जिन लोगों में टाइप 2 डाइबिटीज का पता चलता है, उनमें से वास्तव में 15-20 प्रतिशत लोगों को 1.5 टाइप डाइबिटीज होती है। टाइप 1.5 उन लोगों को भी हो सकती है, जिनका भार औसत है और जो फिट दिखते हैं। अगर इनके रक्त में शुगर नियंत्रण में रहे तो इनमें हृदय संबंधी रोगों का खतरा भी टाइप 1 और टाइप 2 की तुलना में कम हो जाता है।
0 टाइप 2 डाइबिटीज : पूरी दुनिया में डाइबिटीज से पीड़ित लोगों में 90 प्रतिशत टाइप 2 डाइबिटीज से पीड़ित हैं। इसमें रक्त में शुगर का स्तर अनियंत्रित हो जाता है। मोटापे और टाइप 2 डाइबिटीज का सीधा संबंध होता है। इसके लक्षण टाइप 1 के समान ही, लेकिन कम गंभीर होते हैं, इसलिए शुरू होने के कई वर्षों बाद तक इसका पता नहीं चल पाता।

गेस्टैशनल डाइबिटीज
गेस्टैशनल डाइबिटीज हाइपर ग्लैसिमिया है, जो सबसे पहले गर्भावस्था के दौरान पहचानी जाती है। इसके लक्षण टाइप 2 डाइबिटीज के समान ही होते हैं। अगर गर्भवती महिला डाइबिटीज की शिकार हो जाए तो यह मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए खतरा होता है। इससे बच्चे का वजन और आकार दोनों ज्यादा हो सकता है। सामान्य डिलीवरी में समस्याएं आ सकती हैं। डाइबिटीज नियंत्रण में न रहे तो डिलीवरी के बाद बच्चे को सांस की तकलीफ भी हो सकती है। उसके रक्त में शुगर का स्तर बढ़ सकता है, उसे पीलिया भी हो सकता है। 

बढ़ जाती हैं उपचार की जटिलताएं  
डाइबिटीज अकेले नहीं आती, बल्कि अपने साथ कई और स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर आती है। यही नहीं, इसके कारण कई सामान्य समस्याएं भी गंभीर हो जाती हैं। जैसे अगर शरीर पर कहीं कट लग गया है तो घाव भरने में समस्या होती है। अगर दांत सड़ गया है तो गंभीर दर्द के बावजूद उसे तब तक नहीं निकाला जा सकता, जब तक कि रक्त में शुगर का स्तर नियंत्रित ना हो जाए। इसके अलावा डाइबिटीज के रोगी को सामान्य रोगी की तुलना में सर्जरी और एनेसथिसिया के समय भी अधिक खतरा होता है। रक्त में शुगर का अनियंत्रित स्तर कार्डिएक सर्जरी के परिणामों को प्रभावित करता है। इसके कारण किसी भी प्रकार की सर्जरी के पश्चात हॉस्पिटल में अधिक रुकना पड़ता है। जटिलताओं से बचने के लिए सर्जरी के दो-तीन दिन पहले मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती कराना अच्छा रहता है।

डाइबिटीज के लक्षण
0 प्यास अधिक लगना 
0 बार-बार पेशाब आना 
0 तेजी से वजन घटना 
0 खाने के बाद भी भूख लगना 
0 नजर कमजोर होना 
0 हाथ-पैरों में झुनझुनी या अकड़न 
0 त्वचा या मसूड़ों में संक्रमण 
0 जख्म का ठीक नहीं होना 
0 खुजली होना। 

कई बीमारियों का घर है डाइबिटीज
रक्त में शुगर की लगातार बढ़ती मात्रा समय के साथ हृदय, आंखों, किडनी, तंत्रिकाओं और शरीर के दूसरे भागों को प्रभावित कर सकती है। एक साइलेंट डिसीज होने के कारण कई लोगों को इसका पता ही नहीं चल पाता, जब तक कि उन्हें दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं होना प्रारंभ नहीं हो जातीं। डाइबिटीज जितनी पुरानी होती जाती है, ब्लड शुगर उतनी अनियंत्रित होती जाती है, जिससे जटिलताएं विकसित हो जाती हैं। 

डाइबिटीज की राजधानी है भारत 
वर्ल्ड डाइबिटीज फाउंडेशन के अनुसार डाइबिटीज से पीड़ित हर पांच में से एक भारतीय है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2014 में डाइबिटीज के कुल 6 करोड़ 51 लाख रोगी थे। 2010 में यह आंकड़ा 5 करोड़ 8 लाख था। अनुमान है कि 2030 तक भारत में डाइबिटीज के रोगियों की कुल संख्या लगभग 10 करोड़ तक पहुंच जाएगी। 

खानपान जो डाइबिटीज को रखे नियंत्रित
पालक: इसमें कई पोषक तत्व होते हैं, जो हमें  स्वस्थ बनाते हैं। ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से पालक खाते हैं, उनमें डाइबिटीज होने की आशंका 14 प्रतिशत तक कम हो जाती है। 
मेथी: मेथी के बीज न केवल ब्लड ग्लूकोज को कम करते हैं, बल्कि इंसुलिन और बुरे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाते हैं। 
ग्रीन टी: बिना चीनी ग्रीन टी का सेवन इंसुलिन लेवल में सुधार कर खून में ग्लूकोज कम करने में सहायता करता है। इसमें ईजीसीजी एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि बिना चीनी वाली काली कॉफी टाइप 2 डाइबिटीज का खतरा कम कर देती है।
एलोवेरा: एलोवेरा की पत्तियों में मौजूद जैली या एलोवेरा के जूस का सेवन डाइबिटीज के उपचार में प्रभावी है।
नीबू: नीबू में विटामिन सी होता है, जो खाने के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को कम रखता है। खाने पर नीबू निचोड़ लें या खाने के बाद पानी में नीबू का रस मिलाकर पिएं, काफी लाभ होगा। 
लहसुन: ग्लूकोज का स्तर कम करता है और फ्री इंसुलिन को बढ़ाता है।
करेला : अधिक ग्लूकोज को ग्रहण करता है और खून में ग्लूकोज के निर्माण को कम करता है। 
हल्दी : इसमें कुरकुमिन होता है। यह डाइबिटीज को रोक नहीं सकती, लेकिन आपको डाइबिटीज से कुछ अधिक समय तक बचा सकती है।
इलायची: यह रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करने में सहायता करती है। 
सेब: इसमें एंथोसयानिन नामक तत्व काफी मात्रा में पाया जाता है, जो रक्त में ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है।

इनसे करें परहेज 
0 चीनी ’ तली-भुनी चीजें  ’ डेयरी उत्पाद ’ चाय और कॉफी ’ तंबाकू और शराब 
0 अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले पदार्थ जैसे आलू, गाजर, चावल, केला, ब्रेड आदि।

(एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. रमन कुमार व एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की चीफ डाइटिशियन शिल्पा ठाकुर से की गई बातचीत पर आधारित) 

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  • Web Title:diabetes and lifestyle