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3 अगस्त, 2020|7:45|IST

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अल्जाइमर्स-याददाश्त को न पड़ने दें कमजोर

उम्र बढ़ने के साथ अधिकतर लोगों को भूलने की बीमारी हो जाती है, लेकिन अगर आपके परिवार के बुजुर्ग भूलने के साथ-साथ भ्रमित रहने लगें, अपने जीवन में जो लोग महत्वपूर्ण हैं, उन्हें पहचान न सकें और धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व में नाटकीय रूप से परिवर्तन होने लगें तो समझिए कि उन्हें अल्जाइमर्स ने अपनी चपेट में ले लिया है।

क्या है अल्जाइमर्स
यह एक घातक मानसिक रोग है। इसमें मस्तिष्क की कोशिकाओं का आपस में संपर्क खत्म हो जाता है, जिससे ये कोशिकाएं मरने लगती हैं। यह 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में पाया जाने वाला सबसे सामान्य मानसिक रोग है। अल्जाइमर्स में मस्तिष्क में कुछ रसायनों की मात्रा भी कम होने लगती है। यह रसायन मस्तिष्क में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए जरूरी है। अल्जाइमर्स एक लगातार बढ़ने वाला रोग है। जैसे-जैसे यह रोग बढ़ता जाता है, मस्तिष्क का अधिक से अधिक भाग क्षतिग्रस्त होता जाता है और लक्षण ज्यादा गंभीर होते जाते हैं।

क्या हैं लक्षण
यह बीमारी लक्षण नजर आने से पहले खामोशी से विकसित होती रहती है। जो लोग अल्जाइमर्स के शुरुआती स्तर पर होते हैं, उनमें याददाश्त का कमजोर हो जाना और बात करने में सही शब्द ढूंढ़ने में कठिनाई होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। 
0 समस्या बढ़ती जाती है और रोगी भ्रमित हो जाता है। वह बार-बार लोगों के नाम, स्थान और हाल में हुई घटनाओं को भी भूलने लगता है।
0 अपनी याददाश्त के कमजोर पड़ने से दुखी, क्रोधित और हताश महसूस करने लगता है।
0 आत्मविश्वास कम होने से वह लोगों से कटा-कटा रहने लगता है।
0 चीजें यहां-वहां रखकर भूल जाता है।

कारण को जानें
अल्जाइमर्स की शुरुआत धीरे-धीरे होती है। इससे सबसे पहले मस्तिष्क का वह भाग प्रभावित होता है, जो भाषा और याददाश्त को नियंत्रित करता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को चीजों और लोगों के नाम याद रखने में दिक्कत होती है। यह रोग आमतौर पर 60 के बाद शुरू होता है। उम्र, आनुवंशिकी, पर्यावरणीय कारक, जीवन शैली और स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके कारक का काम करते हैं। अब तो  30 वर्ष के युवाओं के भी इस रोग की चपेट में आने की खबरें आई हैं।

जीवनशैली से जुड़ी गड़बड़ियां
हालांकि यह सुनिश्चित नहीं है कि अच्छी जीवनशैली के कारण अल्जाइमर्स का खतरा कम हो जाता है, लेकिन कुछ तथ्य दर्शाते हैं कि जो कारक आपके लिए हृदय रोगों का खतरा बढ़ाते हैं, वही आपके अल्जाइमर्स की चपेट में आने की आशंका भी बढ़ा देते हैं। इनमें सम्मिलित हैं-
0 व्यायाम की कमी  
0 मोटापा
0 धूम्रपान 
0 उच्च रक्तचाप
0 कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर 
0 ऐसे भोजन का सेवन, जिसमें फलों और सब्जियों की मात्रा कम हो।

बढ़ जाता है स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा 
0 भोजन या तरल पदार्थों के फेफड़ों में चले जाने की शिकायत आ सकती है।
0 न्युमोनिया और दूसरे संक्रमण हो सकते हैं।
0 फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है।
0 कुपोषण/डीहाइड्रेशन की आशंका बढ़ जाती है।

डायग्नोसिस
कई तरह की जांचों द्वारा रोगी की मानसिक स्थिति जांची जाती है। सबसे पहले मनोवैज्ञानिक जांच की जाती है। इसमें मुख्य रूप से याददाश्त का परीक्षण किया जाता है। ब्रेन स्कैन द्वारा यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि मस्तिष्क में क्या परिवर्तन हो रहा है। इसमें दो तरह की स्कैनिंग प्रमुख है- कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन और मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई)।  

क्या हैं उपचार
वर्तमान में इस रोग का कोई उपचार नहीं है। कुछ दवाएं हैं, जो इसे नियंत्रित कर इसके लक्षणों को गंभीर होने से रोक सकती हैं। अल्जाइमर्स से पीड़ित लोगों के मस्तिष्क में एसिटाइल कोलिन की मात्रा कम पाई जाती है, इसलिए इसके उपचार के लिए ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जिससे मस्तिष्क में एसिटाइल कोलिन का स्तर नियंत्रित रहे। जितनी जल्दी इसके बारे में पता चलेगा, उपचार उतना ही आसान होगा।

अधिक आशंका की वजह
उम्र

बढ़ती उम्र अल्जाइमर्स का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। जिन लोगों को डिमेंशिया है, उम्र बढ़ने के साथ उनके अल्जाइमर्स की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है।

पारिवारिक इतिहास और आनुवंशिक 
कारण: अगर आपके परिवार में किसी को अल्जाइमर्स है तो आपके इसके चपेट में आने की आशंका लगभग दोगुनी हो जाती है। कई जींस में परिवर्तन के कारण भी अल्जाइमर्स का खतरा बढ़ जाता है।  

डाउन सिंड्रोम
डाउन सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में भी अल्जाइमर्स विकसित होता है। डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त लोग आम लोगों की तुलना में इसकी चपेट में 10-20 साल पहले यानी 40-50 वर्ष की उम्र में आ जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जिस अतिरिक्त क्रोमोसोम के कारण डाउन सिंड्रोम होता है, उसमें पाए जाने वाली जींस के कारण ही अल्जाइमर्स रोग होता है।

लिंग
महिलाओं में अल्जाइमर्स विकसित होने का खतरा पुरुषों से अधिक होता है, लेकिन इसका वैज्ञानिक कारण अब तक पता नहीं चल पाया है।

सिर पर लगी गहरी चोट:
जिन लोगों को कभी सिर पर गहरी चोट लगी हो, उनके अल्जाइमर्स की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है। 

दवाओं के दुष्प्रभाव
डिप्रेशन, उत्तेजना, एलर्जी और पार्किंसन बीमारियों के उपचार के लिए दी जाने वाली दवाओं से भी मस्तिष्क में एसीटिल कोलिन नामक रसायन का स्तर प्रभावित होता है, जो मस्तिष्क के न्यूरॉन के बीच संदेश पहुंचाने के लिए जरूरी रसायन है।

विटामिनों की कमी
ऐसे लोगों का ब्लड टेस्ट करने पर उनके ब्लड में फॉलिक एसिड, विटामिन बी1, बी6 या बी12 की मात्रा कम पाई जाती है। उन्हें बी12 सप्लिमेंट्स के रूप में दिया जाए तो याददाश्त बेहतर होती है।

मानसिक स्वास्थ्य को रखें दुरुस्त
0 संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें।
0 प्रतिदिन कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।
0 वजन न बढ़ने दें।
0 शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। 
0 मानसिक शांति के लिए प्रतिदिन 10 मिनट ध्यान करें। 
0 तनाव न लें, प्रसन्न रहें।
0 सामाजिक बनें, अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताएं।  
0 धूम्रपान और शराब का सेवन न करें या कम करें।
0 ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखकर इसके खतरे से बच सकते हैं। 
0 सिर को चोट लगने से बचाएं।

(मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के न्यूरो सर्जरी विभाग के सह-निदेशक डॉ. मनीष वैश्य व आर्टेमिस हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. सुमित सिंह से की गई बातचीत पर आधारित)