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ओपिनियन

दिग्गजों से आदर्श की उम्मीद 

मानव जाति के अब तक के इतिहास में शायद ही इंसानों पर इस कदर चौतरफा वार हुआ होगा, जैसा अभी कोरोना महामारी के समय हो रहा है। मसला स्वास्थ्य (शारीरिक और मानसिक, दोनों) का हो या फिर रोजगार, शिक्षा, आवागमन...

अभी सही नहीं सबको टीका लगाना 

आज हम में से कुछ लोग 1980 और 1990 के दशकों को याद कर सकते हैं, जब डिप्थीरिया, पोलियो, काली खांसी जैसी टीकारोधी बीमारियों के शिकार बच्चों के फोटो वाले ‘टिन-प्लेट’ से बने पोस्टर गांवों और...

आयोग की साख पर गलत सवाल 

मौजूदा विधानसभा चुनावों में इक्का-दुक्का ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनको लेकर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों के तर्क कितने वाजिब हैं, उन पर बात करने से पहले उन दो प्रसंगों...

ढिलाई पर कड़ाई से लगे लगाम

अपने यहां कोरोना के नए मामले डराते हुए दिख रहे हैं। ब्राजील (रोजाना के 66,176 मामले औसतन) और अमेरिका (रोजाना के 65,624 मामले औसतन) को पीछे छोड़ते हुए भारत कोविड-19 का नया ‘हॉट स्पॉट’ बन...

कानून के लंबे, लेकिन झूलते हाथ

कहावत है कि कानून के हाथ बड़े लंबे होते हैं और अपराधी लाख कोशिश करे, उससे बच नहीं सकता। पर इस बार सच सिद्ध होते-होते भी इसने कुछ ऐसे भयावह यथार्थ से हमारा सामना कराया है कि हममें से बहुत समझ ही नहीं...

हम छोटी बचत से हाथ न धोएं 

वित्त मंत्रालय से आया अप्रैल फूल का झटका तो वापस हो गया, लेकिन यह सवाल हवा में तैर रहा है कि एनएससी, पीपीएफ और अन्य छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर आगे भी बरकरार रहेगी या मौजूदा विधानसभा चुनावों के खत्म...

चुनावी जीत के कई गुणा-भाग 

पश्चिम बंगाल में अब तक दो चरणों में 60 सीटों पर विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। मतदाताओं के रुख अभी ठीक-ठीक नहीं आंके जा सकते, लेकिन पहले चरण में 27 मार्च को मुख्यत: जंगलमहल क्षेत्र में चुनाव हुए थे, जो...

स्पेनिश फ्लू की राह पर कोरोना

देश भर में कोविड-19 के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। कम से कम छह राज्यों में संक्रमण की रफ्तार तेज है और कई अन्य सूबों में भी ऐसी ही आशंका जताई जाने लगी है। गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24...

कहां तक पहुंचाएंगी ये चिट्ठियां

पाकिस्तान ने फिर से दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। वजीर-ए-आजम इमरान खान ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस चिट्ठी का जवाब भेजा है, जो उन्होंने पाकिस्तान के ‘नेशनल डे’ पर दस्तूर के मुताबिक...

क्षत्रपों के सहारे दक्षिण में जंग

साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा एक मजबूत नेतृत्व, हिंदुत्व के एजेंडे और सशक्त चुनावी मशीनरी के सहारे दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई। केंद्र में बेशक दोनों ही बार इसने आसानी से सरकार बना...

मैं तो खेलूंगी श्याम संग फाग

होली शब्द सुनते ही मन अतीत में लौट जाता है। वे भी क्या दिन थे! मैं बंबई (अब मुंबई) में पली-बढ़ी हूं। वहीं मेरा जन्म हुआ, और करीब 18 साल तक मैं वहां रही। उम्र के हिसाब से हरेक होली में हमने खूब मस्ती...

कुछ रह गए तो सब पर खतरा

एक भी बच्चा छूट गया, सुरक्षा चक्र टूट गया- क्या यह नारा याद है आपको। वैक्सीनेशन यानी टीकाकरण का मूल सिद्धांत यह है कि जितनी जल्दी हो सके, ज्यादातर लोगों को वैक्सीन की सुरक्षा दे दी जाए, तभी महामारी...

असम में तीखा होता चुनावी बिगुल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के शोर में पड़ोसी असम का चुनावी समर भले दब गया हो, पर यहां भी चुनाव कम अहम नहीं हैं। यहां चुनावी समीकरण कई मायनों में बंगाल के ठीक उलट है। मसलन, बंगाल में भाजपा जहां 200 से...

काश! वैसे घर न लौटते लोग

इन दिनों हम दुनिया के सबसे सख्त लॉकडाउन की पहली बरसी मना रहे हैं। यह देशव्यापी तालाबंदी अलहदा थी, क्योंकि महज चार घंटे की सूचना पर इसे लागू किया गया था। देश भर में फंसे करोड़ों लोगों, यात्रियों,...

जब अमेरिका ने सबको डरा दिया

अमेरिका में चुनावी साल (राष्ट्रपति चुनाव) के किसी भी अन्य महीने की तरह मार्च, 2020 की शुरुआत हुई थी। ज्यादातर अमेरिकी इस महीने की अपनी दो पसंदीदा गतिविधियों में मग्न थे। पहली, 3 मार्च के ‘सुपर...

वर्दी में कब तक छिपे रहेंगे 

अपराध कथाओं के लेखकों ने अपराधियों के बेहतरीन रेखाचित्र खींचे हैं। फ्रांसीसी लेखक ज्यां जेने ने अपनी कालजयी कृति द थीफ्स जर्नल में एक अपराधी का अद्भुत चित्रण किया है, जिसमें वह इसलिए भी सफल हुआ कि यह...

गर पता होता लॉकडाउन का हश्र

आयकर और प्रत्यक्ष कर की वसूली सरकार की उम्मीद से बेहतर हो गई है। फरवरी में लगातार तीसरे महीने जीएसटी की वसूली भी 1.10 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रही। डीजल की बिक्री कोरोना काल से पहले के स्तर पर पहुंच...

‘घर लौटने के लिए होता है’

लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में, जब सामान्य जीवन थम गया, तब सभी को यही लगा कि जिंदगी कटेगी कैसे? फिर धीरे-धीरे यह भी लगने लगा कि अब इसी के साथ रहना है। यह अच्छा है, जीवन में हर बार योजनाएं नहीं बनानी...

ड्रैगन ने छिपाकर दिया बड़ा दर्द

करीब 15 महीने पहले 31 दिसंबर, 2019 को वुहान (चीन) प्रशासन ने पहली बार यह बताया कि वहां के अस्पतालों में दर्जन भर निमोनिया मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनकी बीमारी की वजह स्पष्ट नहीं है। मगर तब यही कहा...

उन्हें निजीकरण से डर लगता है 

देश के बैंकिंग सेक्टर में इन दिनों खासा उथल-पुथल है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के बैनर तले सोमवार और मंगलवार को नौ सरकारी बैंकों के कर्मचारियों ने हड़ताल की, और चेतावनी दी है कि यदि...

आज भी बरकरार कुछ मुगालते

करीब एक साल पहले 22 मार्च, 2020 को कोरोना वायरस के प्रसार को थामने की पहली कोशिश के रूप में हमने ‘स्वेच्छा से जनता कफ्र्यू’ का पालन किया था। इससे लगभग दो महीने पहले 30 जनवरी को ही अपने...

भुलाए न भूलेगी वह भयावहता

अगले चंद दिनों में कोरोना महामारी के मद्देनजर देश भर में लगाए गए लॉकडाउन को एक साल पूरा होने जा रहा है। इसके संताप से हुए खट्टे-मीठे अनुभव अभी तरोताजा हैं। यह व्यापक जनहानि बचाने के उद्देश्य से उठाया...

महामारी में समाज का सेल्फी क्षण

स्वास्थ्य सेवा में लगे लोगों के बाद वैक्सीन का रास्ता अब आम लोगों के लिए खुल गया है। बेशक, अभी टीकाकरण का हमारा पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर इतना बड़ा नहीं कि सभी लोगों को वैक्सीन लगाई जा सके, इसलिए...

हमें लॉकडाउन से आगे सोचना होगा

भारत में कोरोना का संक्रमण फिर से बढ़ने लगा है। गुरुवार को देश भर में 23,285 नए मामले सामने आए, जो 23 दिसंबर, 2020 के बाद एक दिन में नए मरीजों की सर्वाधिक संख्या है। इनमें से 60 फीसदी से अधिक (14,317...

चंडी पाठ और चोट के सियासी मायने

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का चोटिल होना विधानसभा चुनाव का संभवत: एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। स्थानीय मीडिया की मानें, तो वह गाड़ी में बैठी थीं और उनका पांव बाहर था, जिसके कारण दरवाजा...

अब नवाचारों को परखने का समय

हाल-फिलहाल के वर्षों में किसी भी अन्य घटना से कहीं ज्यादा इस महामारी ने जीवन, आजीविका, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। इस दौर की चुनौतियों से पार पाने के लिए दुनिया भर में नवाचार, यानी...

होता सबका साथ तो न जाती कुरसी 

त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार चार साल पूरे करने का जश्न मनाने की तैयारियां कर रही थी। राजधानी में होर्डिंग लग चुके थे। 18 तारीख को देहरादून समेत समूचे राज्य में विधानसभा क्षेत्रवार जलसे कराने का एलान...

आखिर कैसे कम होंगे अपराध

सन 1979-80 में भागलपुर का कुख्यात ‘अंखफोड़वा कांड’ हुआ था, जिसमें बिहार पुलिस ने एक दर्जन के करीब दुर्दांत अपराधियों की आंखें फोड़ दी थीं। उन दिनों एक न्यायिक टीम जब जांच के लिए वहां...

खुद को जिद्दी बनाएं महिलाएं

साल 2002 या 2003 की बात है। तब हम बहनों ने कुश्ती की बस शुरुआत ही की थी। पहलवानी में लड़कियां न के बराबर थीं, इसलिए हम पुरुषों के साथ लड़ा करती थीं। एक दिन हमारे पिता दंगल लड़वाने के लिए हम भाई-बहनों को...

नौकरी नहीं, तो आरक्षण ही सही

हरियाणा सरकार के एक फैसले से हंगामा खड़ा हो गया है। फैसला है रोजगार में आरक्षण का। रोजगार भी सरकारी नहीं, प्राइवेट और आरक्षण भी किसी जाति, धर्म या आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि राज्य में रहने वालों को।...

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