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मुश्किलों से घिरा रहा रस्किन बांड का बचपन, जानिए उनकी किताब में

अंग्रेजी के प्रख्यात लेखक और पद्मश्री व पदमभूषण से सम्मानित रस्किन बांड ने अपना 83वां जन्मदिन सादगी से मनाया। शुक्रवार को मालरोड स्थित कैम्ब्रिज बुक डिपो में अपने प्रशंसकों के साथ रस्किन बांड ने जन्मदिन पर केक काटा। इस मौके पर उनके द्वारा लिखित पुस्तक लुकिंग फॉर द रेनबो का विमोचन किया गया।

रस्किन बांड ने कहा कि उक्त पुस्तक उन्होंने अपने बाल्यकाल में घटित घटनाओं पर लिखी है। इसमें उन्होंने अपने पिता की मृत्यु के बाद आठ साल की उम्र के संघर्षों पर आधारित घटनाओं का उल्लेख किया है। कहा कि बढ़ती उम्र के कारण उनके लेखन कार्य पर प्रभाव पड़ा है, लेकिन वह लेखन का कार्य जारी रखेंगे। प्रसंशकों की ओर से जन्मदिन पर शुभकामनाएं देने पर उन्होंने उनका आभार व्यक्त किया। वहीं आज ही के दिन जन्मे तीन पर्यटकों डॉ. शेखर निवासी राजस्थान, स्थानीय निवासी मास्टर आरिद्धय और रमा लखानी दिल्ली ने भी रस्किन के साथ अपना जन्मदिन मनाया। इस मौके पर सुरेद्र अरोड़ा, सुनील अरोड़ा, पेंगविन बुक्स के प्रतिनिधि हिमाली, सोनाली मित्रा, प्रिया कपूर, निशा, अनूपम, सानियां, नंदन, समीर सहित पूर्व पालिकाध्यक्ष ओपी उनियाल, डीपीएस स्कूल बुलंदशहर और स्थानीय छात्र-छात्राओं ने बांड को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दी।  

विश्वविख्यात लेखक हैं रस्किन बांड
अंग्रेजी के लेखक गणेश शैली ने बताया कि रस्किन बांड विश्व विख्यात लेखक हैं। 83 साल की उम्र में उनके द्वारा लिखी पुस्तक लुकिंग फॉर द रेनबो एक आठ साल के बालक की सोच पर आधारित है, जो अपने आप में अविस्मरणीय है। रस्किन बांड की आसाम निवासी प्रशंसक बासवती वाल्वा ने कहा कि वह रस्किन के लेखन से बहुत प्रभावित हैं। पिछले पांच सालों से उनसे मिलने के लिए मसूरी आती रही हैं, लेकिन आज जन्मदिन पर उनकी मुलाकात हो पायी। बासवती ने उन्हें जन्मदिन पर पेंटिंग भी भेंट की। 

बचपने से ही रहा लिखने का शौक
रस्किन बांड का जन्म 19 मई 1934 को कौशाली हिमाचल प्रदेश के मिलिट्री अस्पताल में हुआ था। उनके पिता रॉयल एयर फोर्स में थे। बताया जाता है कि जब वे महज चार साल के थे तो उनके माता-पिता में तलाक हो गया था। इसके बाद बांड का बचपन जामनगर शिमला में बीता। 1944 में अचानक उनके पिता की मौत हो गयी। इसके बाद बांड देहरादून में अपनी दादी के साथ रहने लगे। बांड ने अपनी पढ़ाई शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से पूरी की, उसके बाद वे लंदन चले गए। रस्किन को बचपन से ही लिखने का बहुत शौक था। रस्किन ने 17 साल की उम्र में अपना पहला उपन्यास रूम ऑन द रूफ लिखा। इसके लिए उन्हें 1957 में जॉन लिवेलिन राइस पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 

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  • Web Title:Ruskin Bond celebrated its 83rd birthday in Mussoorie
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