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VIDEO: लखनऊ में ऐशबाग के दारुल-उलूम मदरसे में जश्न-ए-आजादी की तैयारी जोरों पर, बनाया राष्ट्रीय ध्वज

Lucknow, Aishbagh, Darul-Uloom Madrasa

1 / 2बच्चों के साथ मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली।

Celebration-A-Freedom, Preparation, National Flag

2 / 2राष्ट्रीय ध्वज बनाते बच्चे। 

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यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित ऐशबाग के दारुल-उलूम मदरसे में 15 अगस्त पर आजादी का जश्न मनाने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इस मौके पर रविवार को बच्चों ने राष्ट्रीय ध्वज बनाना सीखा और उस उसमें रंग भरे। बच्चों को राष्ट्रीय ध्वज में प्रयोग होने वाले तीनों रंगों के बारे में जानकारी दी गई।

तीन दिन पहले से मनाया जाता है आजादी का जश्न
मदरसे के मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि 15 अगस्त के मौके पर यहां तीन दिन पहले से आजादी का जश्न मनाया जाता है। पहले दिन बच्चों को बताया जाता है कि 15 अगस्त का जश्न मनाने का मकसद क्या है। मुल्क की आजादी के लिए किसने क्या कुर्बानियां दीं और कैसे मुल्क आजाद हुआ। दूसरे दिन क्विज प्रतियोगिता होती है। इसमें बच्चों से जंग-ए आजादी के बारे में सवाल पूछे जाते हैं। तीसरे दिन राष्ट्रीय ध्वज पेंटिंग प्रतियोगिता होती है। जिसका मकसद होता है बच्चे अपने मुल्क का झण्डा खुद बनाएं और उन में रंग भरें। साथ ही झण्डे के तीनों रंगों का बुनियादी पैगाम क्या है। इसकी तालीम दी जाती है, ताकि उनके दिलों में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और मोहब्बत पैदा हो।

हिन्दुस्तान का पहला मदरसा है दारुल उलूम
मौलाना खालिद रशीद ने बताया कि दारुल उलूम देश का पहला मदरसा है। 300 साल पुराना इसका इतिहास है। इस मदरसे की जंग-ए-आजादी में बड़ी भूमिका रही है। अंग्रेज जब हिन्दू-मुस्लिम को लड़ाने की साजिश रच रहे थे उस वक्त उलमा-ए-फरंगी  महल ने हिन्दू-मुस्लिम एकता का नारा दिया था। उसके बाद महात्मा गांधी भी मदरसे आए थे और मुस्लिम इलाकों का दौरा किया था।

देश की आजादी में मदरसे का बड़ा योगदान 
उनका कहना था कि मौलाना अब्दुल अजीज देहलवी, अल्लामा फजले खैराबादी और मौलाना अब्दुल करीम दरियाबादी सहित अन्य उलमाओं ने इन्हीं मदरसों से अंग्रेजों के खिलाफ फतवे जारी किए थे। अंग्रेजों ने सैकड़ों उलमाओं को फांसी दे दी और अंडमान निकोबार द्वीप भेज कर सजा दी। उलमाओं की तहरीक-ए-खिलाफत के बाद गांधी जी भी इसमें शामिल हुए। इसकी वजह से मुल्क को आजाद होने में बड़ी मदद हासिल हुई।

योगी को हुक्म देने की जरूरत नहीं थी
उनका कहना था कि मदरसों में 70 साल से आजादी का जश्न मनाया जाता है। राष्ट्रगान सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके बाबत मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को यह हुक्म देने की जरूरत नहीं थी। मदरसा बोर्ड की तरफ से भी यह जारी किया गया है।

राष्ट्र गान की रिकॉर्डिंग पर आपत्ति जताई
मौलाना खालिद रशीद ने राष्ट्र गान की रिकॉर्डिंग पर आपत्ति जताई है। उनका कहना था कि देश के हर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में रिकॉर्डिंग कराई जाए तो कोई एतराज नहीं है। सिर्फ मदरसों को रिकॉर्डिंग के दायरे में लाने पर आपत्ति है।

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  • Web Title:Preparation of festival-e-independence in Darul-Uloom Madarsa
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