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लखनऊ चिड़ियाघर में बुजुर्ग शेरनी की मौत

- कुछ महीनों से चल रही थी बीमार - वर्ष 2003 में चण्डीगढ़ के प्राणि उद्यान से लाई गई थी यह बब्बर शेरनी लखनऊ। निज संवाददाता नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान की शान रही सबसे बुजुर्ग शेरनी (शुभांगी) का दीदार अब वन्यजीव प्रेमियों को नहीं हो सकेगा। पिछले कुछ वक्त से बीमार चल रही शेरनी की सोमवार को मौत हो गई। इस खबर के फैलते ही कर्मचारियों के साथ-साथ वन्यजीव प्रेमियों में भी मायूसी छा गई। हालांकि अभी उन्हे मायूस होने की जरूरत नहीं है यहां बब्बर शेर के कुनबे के कई और सदस्य मौजूद हैं। वहीं, प्राणि उद्यान निदेशक अनुपम गुप्ता ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी शेरनी की मौत की वजह बुढ़ापा आया है। 21 साल की हो चली थी शुभांगी निदेशक अनुपम गुप्ता ने बताया कि शुभांगी की उम्र लगभग 21 वर्ष थी। वह अपनी निर्धारित उम्र 18 वर्ष से ज्यादा जी चुकी थी। उसे वर्ष 2003 में चण्डीगढ़ के चिड़ियाघर से यहां लाया गया था। तब उसकी उम्र महज साढ़े छह साल की थी। लगभग 14 वर्षों तक वह चिड़ियाघर आने वाले दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। सबसे बुजुर्ग जोड़े को देखने के लिए लगती थी भीड़ बुजुर्ग शुभांगी पिछले दो साल से राज्य संग्रहालय के बगल में स्थित बाड़े में रह रहे 22 साल के बुजुर्ग बब्बर शेर के साथ रह रही थी। चिड़ियाघर के सबसे बुजुर्ग जोड़े की एक झलक पाने के लिए सुबह से ही दर्शकों का बाड़े के बाहर भीड़ जमा हो जाती थी। ऐसे ही एक वन्यजीव प्रेमी ने यह खबर जब सुनी तो वह परेशान हो उठे। उन्होंने बताया कि जब यह जोड़ा एक साथ अपनी गुफा से बाहर निकलता था तो यह मनोरम दृश्य देखते ही बनता था। बोनलेस मीट ही था भोजन बुढ़ापे के कारण बब्बर शेरनी शुभांगी के दांत कमजोर पड़ चुके थे। खाने में वह बोनलेस मीट ही खा पाती थी। यहां तक की उसे चलने-फिरने में भी दिक्कत आ रही थी। लिहाजा उसकी देखरेख में लगे डाक्टरों द्वारा उसे कैलशियम और विटामिन दिया जा रहा था। बब्बर शेर के कुनबे में अब सात सदस्य बचे चिड़ियाघर में आखिरी सांस लेने वाली बब्बर शेरनी के कुनबे के अब सात सदस्य ही रह गए हैं। इस खबर से जहां दर्शकों में मायूसी है तो वहीं कहीं न कहीं यह राहत भी है कि उन्हें बब्बर शेरों का दीदार होगा। इसके अलावा टाइगर के कुनबे के 11 सदस्य भी चिड़ियाघर की शोभा बढ़ा रहे हैं।
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  • Web Title:zoo, lion ki maut
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