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राम मंदिर के लिए अयोध्या फिर लाए गए पत्थर

राम मंदिर के लिए फिर आने लगी पत्थरों की खेप विहिप की हलचल राजस्थान से दो ट्रकों में लाया गया 130 टन पत्थर रामसेवकपुरम में किया गया स्टोर, बंद पड़ी कार्यशाला भी शुरू करने की तैयारी विपक्ष के हंगामे के बाद पिछली सरकार ने लगा दी थी रोक फोटो फाइल नंबर 19 एफजेडपीआईसी 1- कैप्शन- राजस्थान के भरतपुर से दो ट्रकों में लाया गया 130 टन पत्थर रामसेवकपुरम में किया गया स्टोर अयोध्या। हिन्दुस्तान संवाद विहिप ने राम मंदिर निर्माण के लिए फिर से पत्थर मंगाना शुरू कर दिया है। राजस्थान के भरतपुर से सोमवार को लाल पत्थरों से लदे दो ट्रक अयोध्या पहुंचे। 2015 के बाद यह पत्थरों की खेप लायी गयी। पिछली सरकार ने रोक लगा दी थी। अयोध्या में विहिप की गतिविधियां एक बार फिर से तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में सोमवार को रामसेवकपुरम में पत्थरों से लदे दो ट्रक पहुंचे। इसी के साथ रामसेवकपुरम की सात वर्षों से बंद मंदिर के लिए बनायी गयी पत्थर तराशने की कार्यशाला को दोबारा शुरू करने की तैयारी भी कर ली गई है। इसकी पुष्टि विहिप के संगठन मंत्री एवं लखनऊ हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त ‘रामलला के अभिन्न मित्र त्रिलोकी नाथ पाण्डेय ने की। उन्होंने बताया कि पत्थरों की तराशी के लिए लगाई गई बड़ी-बड़ी कटर मशीनों को ठीक कराया जा रहा है। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा का कहना है कि प्रस्तावित राम मंदिर मॉडल के अनुसार मंदिर निर्माण के लिए करीब एक लाख 75 हजार घनफुट पत्थरों की आवश्यकता है। पूर्व में आए करीब एक लाख घनफुट पत्थरों से प्रस्तावित मॉडल के अनुरुप भूतल व प्रथम तल के अधिकांश भाग के लिए पत्थरों की तराशी का कार्य पूर्ण हो चुका है। प्रथम तल के शेष भाग एवं द्वितीय तल पर लगने वाले पत्थरों की तराशी का काम अभी बाकी है, इसी के लिए शेष 75 हजार घनफुट पत्थर यहां लाए जाने हैं। इससे पहले नवम्बर 2015 में पत्थरों की खेप लाने का कार्य शुरू हुआ था। एक ट्रक पत्थर अयोध्या पहुंचते ही विपक्षी दलों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया। इसी के चलते तत्कालीन सपा सरकार ने फॉर्म 32 जारी करने पर अघोषित रोक लगा दी थी। विहिप मीडिया प्रभारी की मानें तो योगी सरकार बनने से फॉर्म 32 की समस्या नहीं रह गई है, इसलिए पत्थर बराबर लाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि रामघाट स्थित रामजन्मभूमि कार्यशाला में पत्थरों की तराशी का कार्य चल रहा है। यद्यपि कि इस कार्यशाला में अभी कुल आधा दर्जन कारीगर ही कार्यरत हैं लेकिन जल्द ही कारीगरों की संख्या बढ़ा दी जाएगी। इनसेट--------------- संसद में कानून के लिए केन्द्र पर दबाव की रणनीति अयोध्या। केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार के आरुढ़ होने के बाद से उत्साहित संत समुदाय राम मंदिर निर्माण को लेकर उनसे भेंट करने के लिए प्रयासरत है। श्रीरामजन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास स्वयं लगातार संतों के प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मिलने की बात मीडिया के सामने करते रहे हैं। इसी संदर्भ में उनकी ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भी भेजा जा चुका है। हालांकि तीन वर्ष का कार्यकाल बीतने के बाद भी प्रधानमंत्री से भेंट का समय नहीं निर्धारित हो पाया। इसी के चलते केन्द्र सरकार पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए संसद में कानून बनाने का दबाव बढ़ाने की रणनीति तय की गई है। इसकी रणनीति न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के 79 वें जन्मोत्सव समारोह के अवसर पर सात जून को तैयार की गई थी। इस संत सम्मेलन में हिस्सा लेने आए विहिप कार्याध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगडिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 2019 की याद दिलाते हुए प्रभु राम की शरण में आने की सलाह दी थी। उन्होंने भव्य मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून बनाने की मांग भी की थी। इस दौरान श्री तोगडिया ने नवम्बर माह में धर्म संसद के आयोजन का भी ऐलान किया था। इससे पहले न्यास अध्यक्ष ने केन्द्रीय सूक्ष्म व लघु उद्योग मंत्री कलराज मिश्र से राम मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री तक अपना संदेश भेजवाया था।
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  • Web Title:Two truck stones brought to Ayodhya to build Ram temple
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