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कामकाज के लिए- इंटर कॉलेज में शिक्षक समायोजन की नीति में खामी -राजकीय शिक्षक संघ ने जताया ऐतराज

-राजकीय शिक्षक संघ ने जताया ऐतराज प्रमुख संवाददाता- राज्य मुख्यालय राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों ने समायोजन नीति में खामियां होने के चलते इसे रद्द करने की मांग की है। राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष पारस नाथ पाण्डेय ने उप मुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा के सामने अपनी मांग रखी है। उन्होंने कहा है कि शिक्षकों की नियुक्ति के मानक और समायोजन के मानक अलग-अलग हैं। राजकीय इंटर कॉलेजों में नियुक्तियां विषयवार होती हैं और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में प्रति हाईस्कूल सात शिक्षकों का मानक है लेकिन समायोजन में 5 शिक्षकों को मानक बना कर अतिरिक्त शिक्षकों को वहां से हटाया जा रहा है। माध्यमिक स्तर पर नियुक्तियां विषयवार होती हैं और इनका छात्र संख्या या कक्षावार से कोई लेना-देना नहीं होता है। कई ऐसे स्कूल हैं जहां कक्षा 1 से 12 तक की कक्षाएं चल रही हैं, दो-दो सेक्शन हैं ऐसे स्कूलों में केवल पांच शिक्षक बचेंगे तो पढ़ाई कैसे होगी। कई ऐसे स्कूल भी हैं जहां दो शिफ्ट चलती हैं। श्री पाण्डेय ने कहा है कि माध्यमिक स्तर पर बेसिक शिक्षा विभाग की समायोजन नीति लागू कर दी गई जो असंगत है क्योंकि बेसिक स्तर पर तीन लाख पदों पर भर्तियां हुईं लेकिन 1999 से राजकीय इंटर कॉलेजों में नाममात्र की भर्तियां हुईं और 2003 से प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति नहीं की गई है। 2008 से पहले यूपी में 550 राजकीय इंटर कॉलेज थे जिनकी संख्या बढ़ कर अब 2100 हो गई है। शिक्षक लगातार रिटायर हो रहे हैं और सरकार इस पर ध्यान देने की बजाय उन्हें अतिरिक्त शिक्षक बता रही है।
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  • Web Title:transfer policy is faulty
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