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स्वाइन फ्लू की जांच प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों में

- केवल सबसे गंभीर तीसरी श्रेणी के मरीजों को ही भर्ती की जरूरत प्रदेश सरकार ने स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा केजीएमयू-पीजीआई सहित सात मेडिकल कॉलेजों में शुरू कर दी है। वहीं इलाज की व्यवस्था हर सरकारी अस्पताल में हो रहा है। मरीजों को लक्षणों के आधार पर तीन श्रेणियों में रखा गया है। केवल तीसरी श्रेणी के मरीजों को ही भर्ती करने जरूरत होती है। यह जानकारी संचारी रोग के निदेशक डॉ. बद्री विशाल ने दी। निदेशक ने बताया कि स्वाइन फ्लू से प्रभावित मरीजों की जांच की सुविधा लखनऊ के एसजीपीजीआई, केजीएमयू, राजकीय उप्र ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई इटावा, जीएसवीएम मेडिकल कालेज कानपुर नगर, एसएन मेडिकल कालेज आगरा, एलएलआरएम मेडिकल कालेज मेरठ, बाबा राघव दास मेडिकल कालेज गोरखपुर के अलावा केंद्र सरकार के एनसीडीसी नई दिल्ली में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि एन्फ्लुएन्जा-ए (एच1एन1) से रोगियों के इलाज के लिए सभी सरकारी अस्प्तालों में इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने बताया कि श्रेणी ‘सी में उन मरीजों को रखा गया है, जिनको सांस फूलने, सीने में दर्द, सुस्ती (ड्राउजिनेस), रक्त चाप का निम्न होना, बलगम के साथ ब्लड आना, नाखूनों के नीला पड़ने तथा स्वाइन फ्लू से ग्रसित ऐसे बच्चे जिनके अन्दर सोम्नोलेन्स, उच्च स्थिर ज्वर, अच्छी तरह से भोजन न खा पाने, मुर्छा, सांस की कमी तथा सांस लेने में दिक्कत हो रही है। ऐसे मरीजों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराएं। इसके अलावा हल्के बुखार, कफ, गले में खराश, बदन दर्द, सर दर्द, डायरिया वाले मरीजों को स्वाइन फ्लू की जांच तथा ओसेल्टामिविर दवा देने की आवश्यकता नहीं होती है। इन मरीजों को सार्वजनिक स्थानों से दूर रहना चाहिए। डॉक्टर ऐसे मरीजों की निगरानी के साथ ही 24 से 48 घण्टे में उनका पुर्नमूल्यांकन करते रहें। उन्होंने बताया कि श्रेणी ‘ए के लक्षण वाले मरीजों को यदि उच्च ज्वर तथा गले में गम्भीर खराश हो तो, उन्हें घर में ही आइसोलेशन तथा ओसेल्टामीविर दवाएं देने की व्यवस्था की गई है।

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  • Web Title:swien flu
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