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बरेली मण्डल के किसानों ने कहा-गन्ना ज्यादा, फसल अच्छी चीनी मिलें अक्टूबर में ही चलें

-क्षेत्रीय गन्ना अधिकारियों पर निजी मिलों से मिलीभगत के आरोप-सहकारी चीनी मिलों का इलाका काट कर दे रहे निजी मिलों कोविशेष संवाददाता-राज्य मुख्यालयबरेली मण्डल के किसानों की मांग है कि चूंकि इस बार गन्ने का क्षेत्रफल ज्यादा है और फसल भी बहुत अच्छी हुई है। ज्यादातर किसानों ने अगैती प्रजाति का गन्ना बोया है जिससे अच्छी चीनी रिकवरी मिल सकती है बशर्ते चीनी मिलें पेराई बजाए नवंबर के अक्तूबर से ही शुरू करें। इसके साथ ही इन किसानों ने क्षेत्र की सहकारी चीनी मिलों पर ज्यादा भरोसा जताया। किसानों ने कहा सहकारी चीनी मिलों का भुगतान समय से होता है इसलिए उनके गन्ना क्रय केन्द्र काटकर निजी चीनी मिलों को न दिए जाएं।गुरुवार को लखनऊ के गन्ना किसान संस्थान सभागार में बरेली मण्डल के तहत आने वाले शाहजहांपुर, कासगंज, अलीगढ़, पीलीभीत, बरेली और बदायूं जिले से आए गन्ना किसानों ने चीनी मिलों को गन्ना क्षेत्र आवंटन के मुद्दे पर विचार व्यक्त किए। इनमें सुझाव भी थे और शिकायतें भी। शाहजहांपुर में पांच चीनी मिलें आती हैं-निगोही, पुवायां, मकसूदपुर, रौजा और तिलहर। कासगंज में न्यौली, अलीगढ़ में साथा, पीलीभीत में बीसलपुर, बरखेड़ा, पूरनपुर और पीलीभीत, बरेली जिले में फरीदपुर, मीरगंज, नवाबगंज, सेमीखेड़ा और बहेड़ी तथा बदायूं में बदायूं और बिसौली चीनी मिलें हैं।पीलीभीत की गन्ना समिति पूरनपुर के चेयरमैन श्रीकांत सिंह का कहना था कि इस बार उनके क्षेत्र में डेढ़ गुना गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ा है, ज्यादातर किसानों ने अगैती प्रजाति का गन्ना बोया है इसलिए चीनी मिलें बजाए नवंबर के जल्द से जल्द अक्तूबर में चलवाई जाएं। उनका तर्क था कि चूंकि अब मानसून की बारिश के आसार कम हैं और फसल तैयार है अगर नवंबर में मिलें चालू हुईं तो चीनी की रिकवरी पर असर पड़ सकता है। उनकी इस मांग पर गन्ना विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि ज्यादातर मिलें अक्तूबर में ही चलेंगी।हालांकि पूरनपुर सहकारी चीनी मिल के महाप्रबंधक ने बताया कि इस बार उनकी मिल ने 32 लाख कुन्तल गन्ने की पेराई का लक्ष्य रखा है और उनकी तैयारी 15 नवम्बर से मिल चलाने की है, दस नवंबर से किसानों को पर्ची देने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।पूरनपुर मिल के संचालक अमित मिश्र ने इस मिल के क्रय केन्द्र काटे जाने पर खासी नाराजगी जताई। आरोप लगाया कि क्षेत्रीय गन्ना अधिकारियों की मिलीभगत से सहकारी मिल के क्रय केन्द्र काटकर निजी मिलों को दिए जा रहे हैं।बरखेड़ा चीनी मिल से संबंधित किसान सुखलाल ने मांग की कि उनके इलाके के क्रय केन्द्र बरखेड़ा चीनी मिल को न दिए जाएं क्यों कि वहां बड़े पैमाने पर घटतौली होती है। पूर्व अध्यक्ष गन्ना समिति लक्षमीकांत भारद्वाज की मांग थी कि अजीतपुर बेलहा में नया क्रय केन्द्र खोला जाए। पीलीभीत चीनी मिल के संचालक शांतनु ने आरोप लगाया कि गन्ना विभाग के सुपरवाइजर व कर्मचारी अपने परिवार के लोगों के साथ मिलकर फर्जी सट्टे बना रहे हैं। उन्होंने मांग की कि गन्ना मूल्य 400 रुपये कुन्तल घोषित हो और वह भी पेराई शुरू होने से पहले।

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  • Web Title:Sugercane
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