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समस्याओं के समाधान को वैज्ञानिकों में सहयोग जरूरी

लखनऊ। प्रमुख संवाददाता

यूएन व डबल्यूएचओ के पूर्व सलाहकार डा. अशोक जाह्नवी प्रसाद ने कहा कि रसायन व जीव विज्ञान के बीच की दूरियां कम होनी चाहिए। विज्ञान के विभिन्न विषयों के विद्वानों में बेहतर सहयोग से समस्याओं का समाधान आसानी से हो सकता है।

वह शुक्रवार को भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सहयोग से ‘पर्यावरण प्रदूषण : चुनौतियां एवं रणनीतियां विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। इससे पहले अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद के डा. रामलखन सिंह ने कहा कि हम वातारण में विभिन्न प्रकार के प्रदूषक रसायनों, गैसों व तरह-तरह की दवाइयों के संपर्क में आते रहते हैं। इनमें से बहुत से प्रदूषक स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं। जोधपुर के डा. दुर्गादत्त ओझा ने कहा कि विश्व की तीन प्रमुख समस्याएं हैं जिन्हें थ्री प्री के नाम से जाना जाता है। इनमें जनसंख्या (पापुलेशन), गरीबी (पूवर्टी) व प्रदूषण (पल्यूशन) हैं। सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण की है जो विकराल रूप लेती जा रही है। इससे निपटने के कारगर उपाय करने व जागरूक होने की जरूरत है। संगोष्ठी में लखनऊ विश्वविद्यालय के डा. सुनील प्रकाश त्रिवेदी, एमिटी विश्वविद्यालय की डा. प्राची श्रीवास्तव, आईआईटीआर के डा. अभयराज, एनबीआरआई के डा. आनंद प्रकाश, लविवि की डा. मधु प्रकाश, आईआईटीआर की डा. ऋचा सिंह, नेहा सिंह आदि ने विभिन्न विषयों में व्याख्यान दिया।

संस्थान के निदेशक प्रो. आलोक धवन ने कहा कि संगोष्ठी में वैज्ञानिकों के विचार-विमर्श से जो भी निष्कर्ष निकले हैं उन्हें व्यावहारिक रूप देने के लिए संबंधित सरकारी विभागों को भेजा जाएगा। निष्कर्षों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हो रहे कार्यों को और गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रबंधन के लिए विज्ञान के विभिन्न विषयों को अपनी सीमा से आगे बढ़कर कार्य करना चाहिए।

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  • Web Title:Solutions to problems need cooperation in scientists
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