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विज्ञान की छोटी पुस्तकें सरल भाषा में लिखी जाएं

लखनऊ। प्रमुख संवाददाता आम लोगों को विज्ञान से जोड़ने के लिए जरूरी है कि विज्ञान की छोटी-छोटी पुस्तकें सरल भाषा में लिखी जाएं। लोगों को उसकी जानकारी हो और आसानी से उपलब्ध हों। तभी विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने में आसानी होगी। यह बाद क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी पीयूष वर्मा ने भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) में हिन्दी पखवाड़ा के उद्घाटन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि पूरे वर्ष हिंदी में अधिकतम कार्य करना होना चाहिए। अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए और उसे रोजगार से जोड़ना चाहिए। उन्होंने संस्थान की राजभाषा पत्रिका व संस्थान में हिंदी में किए जा रहे अन्य कार्यों की सराहना की। विशिष्ट अतिथि वैज्ञानिक व फिल्म कलाकार डा. अनिल रस्तोगी ने कहा कि हिंदी भाषा कई देशों में बोली जा रही है। उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि वह हिंदी में सोचें, हिंदी में लिखें और हिंदी में ही बोलें। अध्यक्षता कर रहे संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने कहा कि हिंदी भाषा बहुत समृद्ध है। वैज्ञानिक व तकनीकी कार्य इसमें आसानी से किए जा सकते हैं। इस दिशा में संस्थान अग्रसर है। शोध पत्र, वैज्ञानिक लेख हिंदी में लिखे जा रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के हिंदी अधिकारी चंद्र मोहन तिवारी ने किया। एनबीआरआई ने हुई प्रतियोगिता एनबीआरआई में हिन्दी पखवाड़ा के तहत गुरुवार को विभिन्न प्रतियोगिताओं हिन्दी ज्ञान, वर्ग पहेली, टिप्पणी आलेखन आदि का आयोजन किया गया। विजेताओं को निदेशक प्रो. एसके बारिक ने प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर हिन्दी अधिकारी बिजेन्द्र सिंह ने हिन्दी के विकास से संबंधित संस्थान में आयोजित गतिविधियों की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

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  • Web Title:Small books of science should be written in simple language
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