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ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई किसी की मौत, दो दिनों में अलग-अलग कारणों से मरे बच्चे

-दो दिनों में अलग-अलग कारणों से मरे बच्चे -मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की रिपोर्ट -वर्ष 2014 में अगस्त --567 मौतें रोजाना औसत 22 मौतें -वर्ष 2015 रोजाना 22 के औसत से 668 मौतें -वर्ष 2016 अगस्त में 587 मौतें हुईं औसत 19 से 20 मौतें प्रमुख संवाददाता- राज्य मुख्यालय बीआरडी मेडिकल कालेज में हुई बच्चों की मौत को लेकर सरकार ने शनिवार की देर शाम स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी से गोरखपुर में कोई मौत नहीं हुई है। अगस्त में अलग-अलग दिनों में तिथिवार हुई मौतों का आंकड़ा पेश करते हुए कहा है कि पिछले सालों में अगस्त में हुई मौतों के आंकड़ों के सापेक्ष इस माह मौतें कम हुई हैं। बावजूद इसके मुख्यमंत्री के निर्देश पर गोरखपुर गए दो मंत्रियों की रिपोर्ट के आधार पर बीआरडी के प्रधानाचार्य को सरकार ने निलम्बित कर दिया है। साथ ही मीडिया में आई रिपोर्ट व अन्य स्त्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है, जो आक्सीजन की कमीं व आपूर्ति करने वाली कंपनी की भूमिका आदि की विस्तृत जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी। मुख्यमंत्री ने इससे पहले गोरखपुर से लौटे चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन और अनुप्रिया पटेल के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा भी की। हालात का पूरा जायजा लेने के बाद देर शाम आनन-फानन में बुलाई गई प्रेस कान्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने सबसे पहले कहा कि बच्चों की मौत को लेकर मीडिया में आए अलग-अलग आकड़ों ने भ्रम की स्थिति पैदा की है। अलग-अलग अखबारों व चैनलों ने अलग-अलग आंकड़े दिए हैं। उन्होंने अपील की कि मीडिया किसी भी घटना की सही तथ्यों को रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या सचमुच ऑक्सीजन से मौतें हुई है? मौतों के सही आंकड़े क्या है इसमें किसकी लापरवाही है इसका पता लगाने के लिए उन्होंने तत्काल चिकितसा एवं स्वास्थय मंत्री तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री को गोरखपुर भेजा। इसे पहले घटना का पता चलते ही वहां के डीएम को मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए। उ‌न्होंने कहा कि एक माह में वो दो बार वहां गए और समीक्षा कर सारे जिम्मेदारों से व्यक्तिगत रूप से पूछा था कि और किसी प्रकार की कोई समस्या या मदद की बात हो तो वे बताएं लेकिन किसी ने भी कुछ नहीं बताया। श्री योगी ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी से मौत का मतलब एक जघन्य कृत्य है। लिहाजा ऑक्सीजन की आपूर्ति में कंपनी की भूमिका की जांच के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता एक कमेटी गठित कर दी गई है जो एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसे सरकार कतई बख्शेगी नहीं उसे कठोर दण्ड दिया जाएगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है। उन्होंने पिछले तीन सालों का आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि इस बार भी वहां अलग-अलग कारणों मसलन प्रीमेच्योर डिलीवरी, चेस्ट इन्फेक्शन, निमोनिया समेत कुछ अन्य बीमारियों से अलग-अलग दिनों में मौतें हुई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में अगस्त में बीआरडी मेडिकल कालेज में 567 मौतें हुई थीं। इसका औसत रोज 22 मौतों का है। इसी तरह वर्ष 2015 में रोजाना 22 के औसत से 668 मौते हुईं। वहीं 2016 में अगस्त में 587 मौतें हुईं जिसका औसत 19 से 20 मौतों का रहा।

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  • Web Title:oxijen
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