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ऑपरेशन मुस्कॉन पर लगा ब्रेक, बालगृह हुआ फुल

- रेस्क्यू हुए बच्चों का अब तक नहीं हो सका आयु परीक्षण-सौ की क्षमता वाले बाल गृह बालक में बच्चों की संख्या पहुंची 181लखनऊ। निज संवाददाताराजधानी में बच्चों को बाल मजदूरी से छुटकारा दिलाने के लिए 15 अगस्त तक चलने वाला ऑपरेशन मुस्कॉन अभियान फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। पिछले दो दिनों से अभियान ठप पड़ने के पीछे अलग-अलग तर्क सामने आ रहे हैं। चाइल्ड लाइन का कहना है कि अब तक रेस्क्यू हुए बच्चों का आयु परीक्षण नहीं कराया जा सका है। जिसके चलते बालगृह बालक में अब और बच्चों के लिए जगह नहीं बची है। वहीं इस अभियान के नोडल अधिकारी एसपी आरए डॉ.सतीश कुमार लगातार पड़ रही सार्वजनिक अवकाशों को अभियान में रूकावट की वजह बता रहे हैं। बालगृह बालक में पैर रखने की भी जगह नहींसौ की क्षमता वाले बालगृह बालक में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। रेस्क्यू दल में शामिल चाइल्ड लाइन के सदस्य मनोज ने बताया कि तीन से 11 अगस्त के बीच रेस्क्यू किए गए करीब 116 बच्चों में से अधिकांश बच्चे बालगृह बालक में शरण लिए हुए हैं। इनके आयु परीक्षण में हो रही देरी के चलते बालगृह बालक में बच्चों की संख्या 181 पहुंच चुकी है, जो कि उसकी क्षमता से अधिक है। इसी चलते अभियान भी रुका हुआ है। 15 अगस्त को भी बाल मजदूरी से नहीं मिल पाएगी आजादीहोटलों, रेस्टोरेंट और ढ़ाबे पर बाल मजदूरी कर रहे बच्चों को 15 अगस्त को भी इससे आजादी नहीं मिल सकेगी। एसपी आरए डॉ.सतीश कुमार का कहना है कि बाल श्रम विभाग, महिला कल्याण विभाग के अधिकारी भी इस रेस्क्यू दल में शामिल हैं। लगातार दो दिन का सार्वजनिक अवकाश पड़ने से इन विभागों के अधिकारी नहीं आ सके। लिहाजा अभियान को रोकना पड़ा। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को भी अवकाश रहने से अभियान का चलना नामुमकिन ही लग रहा है।

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  • Web Title:operation muskan
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