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दवा नुकसान का आंकड़ा जुटाने में हवाई तीर चला रहे अफसर

-अधिकारी ट्रॉमा दूसरे तल पर आग से हुए नुकसान की जानकारी इकट्टठा करने में जुटे लखनऊ। कार्यालय संवाददाता रजनीश रस्तोगी ट्रॉमा सेंटर स्टोर में आग लगने से क्या-क्या नुकसान हुआ। इसका पता लगाना बेहद जटिल हो गया है। क्योंकि अधिकारियों को स्टोर में रखे सामान की जानकारी ही नहीं है। इससे संबंधित दस्तावेज भी अधिकारियों को खोजे नहीं मिल रहे हैं। लाखों रुपये की दवाएं खाक स्टोर में जिस समय आग लगी उसमें बड़े पैमाने पर दवाएं रखी थी। हजारों की संख्या में ग्लूकोज की बोतले लगी थी। इंजेक्शन, सिरिंज, रूई-पट्टी, ग्लब्स, गद्दे, चादरें समेत दूसरी चीजें स्टोर में रखी थी। फ्रीज में भी हजारों रुपये के इंजेक्शन रखे थे। आग लगने से सबकुछ खाक हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि ग्लूकोज की बोतलें कुछ बच गई हैं। पर, धुएं की वजह से ग्लूकोज की बोतले खराब होगी। केजीएमयू सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर इंचार्ज डॉ. हरदीप और डॉ. नितिन भरद्वाज से स्टोर में रखे सामान की सूची तलब की गई है। मंगलवार तक की मोहलत दी गई है। उन्होंने बताया कि सारा सामान सेंट्रल स्टोर से मंगाया जाता है। इसलिए इसमें किसी भी तरह के घालमेल की आशंका नहीं है। उन्होंने दावा किया कि एक-एक गोली का हिसाब मिल जाएगा। हालांकि जानकारों का कहना है कि सेंटल स्टोर से आए सामान की जानकारी तो हो जाएगी लेकिन कितनी दवाएं खपी? इसका कोई रिकार्ड ट्रॉमा में उपलब्ध होगा, यह कहना कठिन होगा। जिन्दगी के बाद सवा करोड़ के उपकरण बचाए डीन फैक्ल्टी ऑफ पैरामेडिकल सांइसेंज व सर्जरी विभाग के डॉ. विनोद जैन ने बताया कि ट्रॉमा के दूसरे तल पर जब आग लगने की खबर मिली तो पैरामेडिकल की ट्रेनिंग हासिल करने वाले छात्रों को राहत कार्य में जुटा दिया। मरीजों को सुरक्षित विभागों में पहुंचाने का सिलसिला दो बजे तक चलता रहा। आग बुझाने के दौरान ट्रॉमा दूसरे तल पर स्टोर से सटे एटीएलएस ट्रेनिंग सेंटर के दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दी गई थीं। उसमें करीब सवा करोड़ रुपये के ह्यूमन सैमियुलेटर रखे थे। ये उपकरण हू-ब-हू इंसान की तरह होते हैं। इन पर पैरामेडिकल स्टाफ को मानव अंग के बारे में पढ़ाया जाता है। इसके बाद इन उपकरणों को सुरक्षित निकाला गया। उपकरणों को कलाम सेंटर में रखाया गया। इस टीम में राजदीप, शालिनी, अनिल, नावेद, अभिषेक समेत अन्य छात्र शामिल हैं। मरीजों की रिपोर्ट गायब, फिर से करा रहे जांचें आग्निकांड के बाद ट्रॉमा सेंटर में अफरा-तफरी मच गई। बदहवासी में लोग अपनों को लेकर भागने लगे। पानी की वजह से मरीजों की जांच रिपोर्ट व दवाएं बेकार हो गई हैं। मरीजों को जांच रिपोर्ट ढूंढे नहीं मिल रही हैं। मरीज डॉक्टरों से कम्प्यूटर से डुप्लीकेट रिपोर्ट निकालने को कहा रहे हैं लेकिन उन्हें रिपोर्ट नहीं मिल रही है। मजबूरन मरीज दोबारा जांच कराने को मजबूर हैं। वहीं अधिकारियों ने मरीजों का निशुल्क इलाज मुहैया कराने का दावा किया था लेकिन मरीजों को बाजार की दवाएं लिखी जा रही हैं।

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