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धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था

ट्रॉमा सेंटर

ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की घटना के बाद व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है। विभागों में भर्ती तो शुरू हो गई लेकिन तीसरे दिन भी ऑपरेशन नहीं हो सके। महज चार ऑपरेशन हुए। ऑपरेशन थिएटर में नमी बरकरार है। इस वजह से डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से मनाकर दिया है। मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए ऑपरेशन थिएटर को विसंक्रमित करने का काम भी सुस्त है। 

शिफ्टिंग के दौरान एक महिला की मौत का मामला भी सामने आया है। सोमवार को पीड़ित परिवारीजनों ने अधिकारियों से मामले की शिकायत की। मरीजों की मौत का आंकड़ा 12 पहुंच गया है। शनिवार शाम ट्रॉमा सेंटर में आग लग गई थी। द्वितीय तल के स्टोर में आग लगी थी। इसके बाद तीन तल के विभागों में मरीजों की भर्ती बंद कर दी गई थी। तीसरे दिन व्यवस्था में सुधार नजर आया। मरीजों को धुएं से बचाने के लिए तोड़े गए खिड़की के कांच और दरवाजे ठीक कराने का काम हुआ। 

टूटी ऑक्सीजन पाइप लाइन ठीक कराई गई। टूटू बेड भी दुरुस्त कराने का काम चालू हो गया। भीग चुके गद्दे भी बदले गए। अधिकारियों का कहना है कि तीसरे तल पर स्थित न्यूरोसर्जरी वार्ड चालू नहीं हो पाया है। खिड़कियों में कांच नहीं लग सकें। हालांकि यहां ऑक्सीजन पाइप लाइन, बेड आदि दुरुस्त किए जा चुके हैं। न्यूरोसर्जरी विभाग में 50 से ज्यादा बेड हैं। साथ ही 20 से ज्यादा स्ट्रेचर पर मरीज भर्ती किए जाते हैं। 

अधिकारियों का कहना है कि हादसे के वक्त न्यूरो सर्जरी में काफी नुकसान हुआ। इसलिए इसे दुरुस्त करने में दिक्कते हो रही हैं। 27 से ज्यादा ऑपरेशन टले ट्रॉमा सेंटर में रोजाना 30 से 40 ऑपरेशन होते हैं। प्रथम तल पर पांच ऑपरेशन थिएटर हैं। दूसरे तल पर आग लगी थी। आग पर काबू पाने के लिए फायर विभाग ने पानी का काफी इस्तेमाल किया गया। इसकी वजह से ओटी में काफी नमी आ गई है। ओटी में धुआं भी चला गया था। इसे विसंक्रमित किया जा रहा है। नमी अभी भी बरकरार है। इसकी वजह से डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया है। फिलहाल गंभीर चार मरीजों के ऑपरेशन किया। इनमें न्यूरो, आर्थोपैडिक्स विभाग की ओटी में एक-एक ऑपरेशन हुए। वहीं जनरल सर्जरी विभाग में दो ऑपरेशन हुए हैं। 

इन विभागों में शुरू हुई भर्ती हड्डी, मेडिसिन, क्रिटिकल केयर यूनिट, ट्रॉमा सर्जरी समेत दूसरे विभागों में मरीजों की भर्ती चालू कर दी गई है। इन विभागों में लगभग 110 से ज्यादा बेड हैं। ट्रॉमा कैजुअल्टी में सोमवार को 93 मरीज आए थे। इनमें 53 मरीज भर्ती किए गए। बाकी को प्राथमिक इलाज के बाद छ़ुट्टी दे दी गई। चार ऑपरेशन हुए हैं। नमी की वजह से ऑपरेशन नहीं किए जा रहे हैं। मंगलवार तक पूरी व्यवस्था दुरुस्त होने की उम्मीद है। न्यूरो सर्जरी विभाग में आने वाले मरीजों को इमरजेंसी मेडिसिन में भर्ती किया जा रहा है। न्यूरोसर्जरी वार्ड में जल्द ही मरीजों की भर्ती चालू होगी। डॉ. एसएन शंखवार, सीएमएस, केजीएमयू 22 बिन्दुओं पर रिपोर्ट तलब मुख्यमंत्री के आदेश के बाद ट्रॉमा सेंटर अग्निकांड की जांच तेज हो गई है। मंडलायुक्त अनिल गर्ग ने केजीएमयू से 22 बिन्दुओं पर रिपोर्ट तलब की। केजीएमयू कुलसचिव उमेश मिश्र ने बताया कि मंडलायुक्त को रिपोर्ट भेज दी गई है। 

साथ ही केजीएमयू सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार के निगरानी में जांच टीम भी बना दी गई है। इसमें चिकित्सा अधीक्षक, इंजीनियर और फायर विभाग के अफसर शामिल हैं। इन अहम बिन्दु पर तलब की रिपोर्ट - आग किस समय लगी थी - आग लगने का क्या कारण था - ट्रॉमा सेंटर में आग से बचाव के क्या संसाधन थे - आग बुझाने के उपकरणों की स्थिति क्या थी - आग लगने पर सबसे पहले क्या उपाय किए गए - अग्निशमन वाहन कितनी देर में ट्रॉमा सेंटर पहुंचे - आग से बचाव के लिहाज से क्या ट्रॉमा सेंटर में पर्याप्त व्यवस्था है -हादसे के वक्त ट्रॉमा में कितने मरीज भर्ती थे -घटना के बाद मरीजों को किन-किन विभागों में शिफ्ट किया -शिफ्टिंग के दौरान कितने मरीजों की मौत हुई।

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