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लविवि नया सत्र: पहला दिन

सुबह न ताले खुले, न चली क्लास -कुलपति के आदेश का उलटा असर, कक्षाओं में नहीं पहुंचे शिक्षक -कैम्पस को समझने, क्लास ढूंढने में बीता नए छात्रों का पहला दिन लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता सुबह 8:30 बजे...आर्ट्स फैकल्टी में ताला...कॉरीडोर खाली, कहीं एक भी क्लास चलती नहीं मिली। सुबह 9 बजे...कॉमर्स विभाग...छात्र अपने आईकार्ड के लिए भटकते मिले...क्लासरूम खाली पड़े थे और पूरे विभाग में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं। सुबह 9:30 बजे...साइंस फैकल्टी में जूलॉजी को छोड़कर बाकी सारे क्लास खाली...कॉरीडोर में छात्र यह जानने की कोशिश में कि उन्हें कहां बैठकर पढ़ना है। सुबह 10 बजे के बाद...कैम्पस में भीड़ और डीन कार्यालयों में छात्रों की कतारें बढ़ना शुरू, विभागों में केवल कर्मचारी मौजूद, शिक्षक नदारद। यह था लखनऊ विश्वविद्यालय में नए कुलपति के कार्यकाल में पहले नए सत्र का पहला दिन। कुलपति प्रो. एसपी सिंह की तमाम हिदायतों और निर्देशों के बावजूद लखनऊ विवि में पहले दिन कक्षाएं न चलने का रिकॉर्ड कायम रहा। इसकी कई वजहें हैं, जिनमें कुछ तो व्यवहारिक हैं और कुछ लविवि की पुरानी आदतें, जिनका मिलाजुला चेहरा सोमवार को यहां देखने को मिला। वजह 1- लविवि में सोमवार को नए सत्र का पहला दिन तो था लेकिन साथ ही पीजी काउंसलिंग का भी पहला दिन था। अब 15 विभाग और इन विभागों के लगभग सभी शिक्षक (डीन और विभागाध्यक्ष समेत) काउंसलिंग में व्यस्त हो गए तो कक्षाएं कौन लेता। वजह 2- स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों को आईडी कार्ड के लिए पहले दिन डीन कार्यालयों में अपने डॉक्यूमेंट जमा करने थे तो ज्यादातर छात्र इसी में व्यस्त थे, क्लास में जाने की फुरसत ही नहीं थी। वजह 3- ज्यादातर विभाग 50-60 प्रतिशत शिक्षकों के भरोसे काम कर रहे हैं, ऐसे में जब ज्यादातर शिक्षक दूसरे कामों में लगा दिए गए तो क्लास कौन ले। वजह 4- द्वितीय व तृतीय वर्ष के छात्र अपनी फीस जमा करने, हॉस्टल एलॉट कराने में व्यस्त थे तो क्लास में कौन जाता। वजह 5- प्रशासनिक स्तर से केवल निर्देश जारी होते हैं, क्लास न लेने पर कार्रवाई नहीं होती। खुद शिक्षकों को भी याद नहीं होगा कि आखिरी बार कब उन्हें क्लास न लेने के लिए कुछ कहा गया था। बॉक्स क्लास और आईकार्ड ढूंढते रहे छात्र कॉमर्स फैकल्टी में सुबह के तकरीबन 10 बजे छात्रों का समूह नजर आया जो यह जानने की कोशिश में था कि आईकार्ड कब और कहां से मिलेंगे। बीकॉम प्रथम वर्ष के ये छात्र डीन ऑफिस में डॉक्यूमेंट जमा कर चुके थे लेकिन आईकार्ड के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा था। इसी तरह आर्ट्स फैकल्टी में प्रथम वर्ष की दो छात्राएं मिलीं जिन्हें दोपहर तक यह पता नहीं चल पाया था कि क्लास कहां चलेगी। गाइड करने के लिए कोई नहीं कक्षाएं न चलना या आईकार्ड न मिलना तो एक बात है लेकिन पूरे परिसर में कहीं कोई यह बताने वाला नहीं था कि छात्र किस काम के लिए कहां जाएं। गेट नं. 1 के पास स्थित शिकायत प्रकोष्ठ में छात्रों की कतारें केवल यही जानने के लिए लगी थीं कि डॉक्यूमेंट कहां जमा होंगे, विभाग कहां है, कैशियर ऑफिस कहां है। पूरे परिसर में कहीं भी हेल्पडेस्क जैसी कोई चीज नहीं दिखी जहां से छात्रों को सही जानकारी मिल सके। छात्रनेता, कर्मचारी नेता आपस में भिड़े मामला आर्ट्स फैकल्टी में सुबह तकरीबन 9:30 बजे का है। यहां डीन ऑफिस के ताले नहीं खुले थे और बाहर छात्रों व अभिभावकों का जमावड़ा लग चुका था। छात्रनेता विनय विक्रम सिंह ताला खुलवाने के लिए ने कर्मचारी रिंकू राय से फैकल्टी का ताला खोलने के लिए कहा, जिसके चलते दोनों में बहस हो गई। विवाद ज्यादा बढ़ा और दोनों पहले गाली-गलौज फिर मारपीट पर उतर आए। बाद में दूसरे छात्रों व कर्मचारियों ने विवाद शांत कराया।

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  • Web Title:LU new session
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