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स्थानीय निकायों में बैठाए गए प्रशासक

प्रमुख संवाददाता- राज्य मुख्यालय राज्य सरकार ने चुनाव टलने की वजह से निकायों में प्रशासक बैठाने का फैसला किया है। निकायों में सदन की पहली बैठक से प्रशासक राज प्रभावी होगा। प्रमुख सचिव नगर विकास कुमार कमलेश ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है। कुछ निकायों का कार्यकाल सोमवार से समाप्त हो गया है। कुछ निकाय ऐसे हैं जिनका कार्यकाल मार्च 2018 में पूरा होगा। शासनादेश में कहा गया है कि स्थानीय नगर निकायों का कार्यकाल लगभग समाप्ति पर है। निकाय चुनाव तत्काल करा पाना संभव नहीं है। इसलिए उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 व नगर निगम अधिनियम 1959 में दी गई व्यवस्था व हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर निकायों में प्रशासक बैठाने का फैसला किया गया है। प्रमुख सचिव ने कहा है कि निकायों के गठन की गणना वर्ष 2012 में शपथ ग्रहण की तिथि के बाद हुई पहली बैठक से पांच वर्ष की जाएगी। नगर निगम में नगर आयुक्त और पालिका परिषद व नगर पंचायतों में अधिशासी अधिकारी बतौर प्रशासक काम देखेंगे। प्रशासक राज में कार्यकारिणी समिति को कोई पारिश्रमिक या भत्ता देय नहीं होगा। पालिका परिषद व नगर पंचायतों में खाता संचालन का अधिकार अधिशासी अधिकारी के साथ केंद्रीयत सेवा के लेखाधिकारी को होगा। जहां केंद्रीयत सेवा का लेखाधिकारी नहीं होगा, वहां शर्तों के साथ तैनात लेखाधिकारी को संयुक्त खातेदार बनाया जाएगा। खाता संचाल के दौरान अधिशासी अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि संयुक्त हस्ताक्षर से नगद पैसे नहीं निकाले जाएंगे तथा चेक से पैसे निकाले जाएंगे।
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  • Web Title:local bodies sited in Administrators
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