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कामकाज-परिवार कल्याण की महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता आंदोलन करेंगी

-संगठन की बैठक में आंदोलन करने पर बन गई अंतिम राय लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता मातृ एवं शिशु के कल्याण हेतु परिवार कल्याण विभाग में कार्यरत स्वास्थ्य कार्यकर्ता 'महिला' कर्मचारियों ने रविवार को शासन की भेदभाव पूर्ण नीति के विरुद्ध आन्दोलन का बिगुल फूंक दिया। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ भवन में संगठन की प्रान्तीय अध्यक्षा मणि नायर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक में इस बात पर आक्रोश व्यक्त किया गया कि एक ही विभाग में कार्यरत पुरुष व महिला कर्मचारियों में भेदभाव किया जा रहा है। जिससे जहां पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता को 10 वर्षों में पदोन्नति मिल जा रही है, वहीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता महिला को 30 वर्षों की सेवा पर भी कोई पदोन्नति नहीं मिल पा रही है। इससे संवर्ग में निराशा का भाव व्यात है। वर्ष 2010 तक सेवा में आईं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को वेतनमान 5200-20200 ग्रेड वेतन 2800 दिया जा रहा है। वहीं 2010 के बाद नियुक्ति पायी संवर्गीय सदस्यों को उसी वेतन बैण्ड में ग्रेड वेतन 2000 स्वीकृत किया जाना आन्दोलन की ओर जाने का बड़ा कारण बन रहा है। जनपदों से आई कार्यकत्रियों में अधिक नाराजगी ऐसे सामुदायिक प्राथामिक स्वास्थ्य केन्द्रो में जहां नियमित सवंर्गीय सदस्यों की नियुक्ति रही है, संविदा पर कार्यरत संवर्गीय सदस्यों को उनकी उपयोगिता के दृष्टिगत विनियमितीकृत किया जाना भी संगठन की बड़ी मांग है। जनपद भर से आई स्वास्थ्य कार्यकत्रियों द्वारा एक स्वर से अपनी मांगों की पूर्ति न होने के कारण तुरन्त आन्दोलन प्रारम्भ किये जाने की मांग की गई, जिसे ध्वनिमति से पारित किया गया। बैठक में जिला संयोजक किरन कुमारी दुबे, प्रेमा मौर्या, कृष्णा मनु, के अलावा शीला कूपर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए संवर्गीय हितार्थ निर्णायक लड़ाई का आहवान किया। बैठक की अध्यक्षता प्रान्तीय अध्यक्ष मणि नायर ने किया। इस अवसर पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष बीएस डोलिया, जिलामंत्री अमिता त्रिपाठी विशेष रुप से उपस्थित रहे।

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