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आखिरी अशरे में अफ्तार से रोशन हुआ शहर-ए-लखनऊ

रमजान के आखिरी अशरे में चारो तरफ से तरफ ज्यादा से ज्यादा तादाद में रोजा इफ्तार का आयोजन किया जा रहा है। शहर की अधिकांश मस्जिदों में जहां रोज ही रोजा अफ्तार होता है तो वहीं कुछ खास दिन खास रोजा अफ्तार का आयोजन किया जा रहा है। जहां से सैकड़ों रोजेदार एक साथ रोजा खोल सके और अपने और मुल्क की सलामती की दुआ मांग सके। इसी क्रम में सोमवार को सामजवादी पार्टी के कार्यालय में पारम्परिक रोजा अफ्तार हुआ, जहां बड़ी संख्या में रोजेदार तो पंहुचे ही बल्कि की बड़ी राजनीतिक हस्तियों ने भी शिरकत की। इसके साथ ही लेखराज मार्केट स्थित मजार वाली मस्जिद में भव्य रोजा अफ्तार हुआ। जहां सभी की मदद से रोजा अफ्तार में एक से बढ़कर एक पकवान बनाये गए। रोजा खोलने के बाद सभी ने नमाज अदा की और खुदा से दुआएं मांगी। रमजान की फजीलत बुराई से करो तौबा माहे रमजान नेकियों को महीनों है, इस महीने में गुनाहों से माफी मिलती है। इसलिए हर किसी को चाहिए की पूरे दिल और इमान के साथ रोजे रखे और इबादत करें, साथ ही सच्चे दिल से अपने गुनाहों की माफी अल्लाह से मांगे। (नौशाद ) रोजा इंसान को मजबूत बनाता रमजान मुबारक महीने में जहां एक तरफ हमें हर नेकी के बदले 70 नेकियों को सवाब मिलता है तो वहीं दूसरी ओर से रमजान हमें नफ्स पर काबू रखना भी सिखाता है, इससे हम मजबूत बनते हैं और ईमानदारी से जिन्दगी गुजारते हैं। (शमशाद) सुन्नी हेल्पलाइन पर पूछे गए सवाल सवाल- बीवी साहबे निसाब है और शौहर पर कर्ज है तो क्या ज़कात निकालते समय कर्ज को उस रकम से अलग करेंगी? जवाब- बीवी अपनी ज़कात पूरी निकालेगी, कर्ज की रकम अलग नही होगी। लेकिन बीवी पर कर्ज है तो वह रकम अलग करेगी। सवाल- एक शख्स ने किसी के पास कुछ रकम अमानत के तौर पर रखी उसी बीच में वह शख्स बाहर चला गया, फिर वह शख्स कहता है कि जो रकम मैंने तुम्हारे पास रखी है उसमें से जकात अदा कर दो तो क्या इस तरह से जकात अदा हो जायेगी? जवाब- जी हाँ जकात अदा हो जायेगी। सवाल- एक शख्स के पास कई हज़ार रूपये हैं इस पर साल भी ग़ुजर गया मगर उसके पास न मकान है और न ही घरेलू सामान और न ही अभी शादी हुई है इन्ही जरूरत के लिए रूपये जमा कर रखे हैं तो किया उस पर भी ज़कात है? जवाब- जी हाँ, उस पर ज़कात फर्ज है। अगर साल पूरा होने से पहले मकान बनवा ले या शादी के लिए सामान खरीद ले तो ज़कात नही है। सवाल- मेरे मामू हमेशा बीमार रहते हैं। डाक्टर ने रोजा रखने से मना किया है तो उनको क्या करना चाहिए? जवाब- इस सूरत में उनको रोजे का फिदया यानी पौने दो किलो गेहूँ या उसकी कीमत किसी गरीब को हर रोजे के बदले देना चाहिए। सवाल- अगर कोई मजनून (दीवाना) बहुत सी दौलत का मालिक हो तो क्या उसके माल से ज़कात की रकम काटना जाएज है? जवाब- मजनून के माल पर जकात नही है। इन नम्बरों पर पूछे सवाल 9415023970 9335929670 9415102947 7007705774 9580112032 शिया हेल्पलाइन पर पूछे गए सवाल सवाल- अगर रोजेदार जानबूझ कर या भूले से एक मासूम की बात को दूसरे मासूम की तरफ मन्सूब करके बयान करदे तो रोजे का क्या हुक्म है ? जवाब- अगर जानबूझ कर ऐसा करता है तो एहतियाते वाजिब की वजह से रोजा टूट जाएगा और अगर भूले से ऐसा करता है तो रोजा सही होगा। सवाल- अगर शक हो कि सुबह की नमाज का समय शुरू हुआ है या नही तो क्या इस शक की हालत में खाया पिया जा सकता है ? जवाब- खाना-पीना सही है लेकिन अगर बाद में पता चले कि समय शुरू हो चूका था तो उस रोजे की बाद में कज़ा करेगा। सवाल- क्या दीनी संस्थाओ को कफ्फारा देना जो गरीबों के लिए काम करते है सही है ? जवाब- इस सूरत में सही होगा कि जब इस बात की संतुष्टि हो कि वह दीनी हुक्म का ख्याल करके कफ्फारा ज़रूरतमंद तक पहुंचा देगें। सवाल- अगर कोई सैय्यद आदिल ना हो तो क्या उसको खुम्स का पैसा दिया जा सकता है? जवाब- अगर बारह इमामों का मानने वाला है तो गैर आदिल सैयद को खुम्स का पैसा दिया जा सकता है। सवाल- फितरा निकालने से इन्सान को क्या लाभ होता है ? जवाब- फितरा रमजान के रोजो को कुबूल करवाता है और अगले वर्ष तक इन्सान की हिफाजत का जरिया बनता है।

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मुलायम की गैरहाजिरी में सपा दफ्तर में हुआ रोजा अफ्तारकामकाज:::::शासनादेश लागू न होने से नाराज कर्मचारियों ने आन्दोलन की चेतावनी दी