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बड़ा कर्ज माफ कराने के लिए आधार नम्बर उपलब्ध नहीं करा रहे किसान

फसली ऋण मोचन योजना के तहत एक लाख रुपए तक पूरा लाभ लेने के लिए किसान अपनी जानकारी बैंकों को देने से बच रहे हैं। ये सभी ऐसे किसान हैं जिन्होंने राष्ट्रीयकृत व अन्य बैंकों के कर्ज लेने के साथ ही कोऑपरेटिव बैंक से भी कर्ज लिया है। किसानों की कोऑपरेटिव बैंक से कर्ज लेने की राशि कम है। वहीं बैंकों से किसानों ने अधिक कर्ज लिया है। यही वजह है कि किसान अपना आधार बनवाने में पिछड़ रहे हैं। न ही आधार नम्बर बैंको को उपलब्ध करा रहे हैं। एडीएम (एफआर) शत्रुहन सिंह बताते हैं कि कर्ज माफी का अधिक लाभ लेने के लिए कुछ किसान बैंकों को अपना आधार नम्बर जैसी जानकारी नहीं दे रहे हैं। न ही आधार बनवा रहे हैं। जबकि कोऑपरेटिव बैंक से 10 से 25 हजार रुपए तक कर्ज लेने वाले कई किसान इस बैंक कर्ज को चुकता भी कर रहे हैं। क्योंकि यह किसान चाहते हैं कि बैंकों से लिया गया अधिक कर्ज माफ हो। एडीएम बताते हैं कि यही वजह कि आधार विहीन किसानों का आधार कार्ड बनवाने के लिए तहसील स्तर पर लगाए गए कैम्पों में किसान नहीं आए। इसे देखते हुए अब 70 अधिकारियों की टीम का गठन कर एडवंस सर्च के लिए लगाया गया है। इनकों यूआईडीएआई से लॉगइन और पासवर्ड भी उपलब्ध कराया जा रहा है। 24 तारीख से यह काम शुरू हो जाएगा। 35 बैंकों से किसानों ने लिया कर्ज फसली ऋण मोचन योजना के लाभार्थी लघु और सीमांत किसानों ने करीब 35 बैंकों से कर्ज लिए हैं। एडीएम (एफआर) शत्रुहन सिंह ने बताया कि इनमें से करीब 33 हजार किसानों ने विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंक व निजी बैंकों से कर्ज लिया। जबकि लगभग 18.5 हजार किसानों ने कोऑपरेटिव बैंकों से ऋण का लाभ लिया। कोऑपरेटिव बैंक से किसानों को केवल खाद-बीज के लिए ही छोटा कर्ज मिलता है। जबकि अन्य बैंकों से किसानों को ट्रैक्टर, कल्टिवेटर, बोरिंग समेत खेती किसानी से जुड़े अन्य कर्ज भी लिया है। आधार लिंक होना अनिवार्य योजना का लाभ लेने के लिए किसान का खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि जिन लघु एवं सीमान्त किसानों ने 31 मार्च 2016 तक ऋण लिया है, उनका एक लाख रुपए तक ही कर्ज माफ होगा।

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  • Web Title:kishan yojna
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