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मातृभाषा में ही हो सकता है मौलिक चिंतन

हिन्दी प्रेम की भाषा है, मौलिक चिंतन हमेशा अपनी मातृभाषा में ही हो सकता है। हिन्दी की स्वीकार्यता संपूर्ण विश्व में दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। यह विचार हिन्दी दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में विद्वानों ने व्यक्त किए। गुरुवार को हिन्दी दिवस पखवाड़ा गोमतीनगर के विभूतिखंड स्थित भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्रीय कार्यालय में मनाया गया। लखनऊ विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के भूतपूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा कि मौजूदा समय में देशभर में लगभग 75 प्रतिशत कार्य हिन्दी में हो रहा है। प्रशासन को एक दृष्टि की जरूरत होती है वह केवल चिंतन से पैदा होती है और वह केवल अपनी भाषा में ही संभव है। सभा को महाप्रबंधक डीपी शुक्ला ने कहा कि भारतीय खाद्य निगम यूपी क्षेत्र ने गेहूं एवं चावल की लक्ष्य से ज्यादा खरीद के साथ ही हिन्दी के क्रियान्वयन में भी सफलता पाई है। इस मौके पर उप महाप्रबंधक (हिन्दी) हरनारायण सिंह, सहायक महाप्रबंधक (हिन्दी) राकेश कुमार मिश्रआदि मौजूद रहे। बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हिन्दी दिवस समारोह बैंक ऑफ महाराष्ट्र लखनऊ अंचल में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। अंचल प्रबंधक ए.बी.सिंह ने कहा कि हिन्दी निश्चित रूप से सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा है। जरूरत है कि कार्यों में इसे अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए। इस मौके पर सीपीसी प्रभारी एसके झा, राजेश कुमार पोरवाल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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