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डीएलएड 2016-17 का सत्र शून्य घोषित -लिए गए आवेदनों को 2017-18 के सत्र का माना जाएगा -सत्र को नियमित करने की कवायद

--लिए गए आवेदनों को 2017-18 के सत्र का माना जाएगा प्रमुख संवाददाता - राज्य मुख्यालय सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने के लिए अनिवार्य योग्यता डीएलएड (पहले बीटीसी) के 2016-17 के सत्र को शून्य कर दिया गया है। वर्ष 2016-17 के लिए कॉलेजों की संबद्धताएं 2017-18 के सत्र के लिए प्रभावी होंगी। डीएलएड के लिए 2016-17 के लिए 1557 नए कॉलेजों की संबद्धता दी गई थी जिसे अब 2017-18 से प्रभावी माना जाएगा। डीएलएड 2016-17 के सत्र के लिए अभ्यर्थियों से आवेदन ले लिए गए हैं। अब इसे 2017-18 का सत्र माना जाएगा। दरअसल, बीटीसी का सत्र कई वर्षों से विलम्ब से चल रहा है और बीते 3-4 बरसों में ये एक साल पीछे चल रहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 3-4 वर्ष पहले ही सत्र को नियमित करने के आदेश दिए थे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। वर्ष 2016 के सत्र के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने 30 मई 2016 तक ही बीटीसी कॉलेजों को संबद्धता देने के निर्देश दिए थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और 1557 कॉलेज ऐसे हैं जिन्हें 30 मई के बाद संबद्धता दी गई। इन पर बेसिक शिक्षा विभाग ने न्याय विभाग से राय मांगी। न्याय विभाग ने इस पर स्पष्ट किया कि बेसिक शिक्षा विभाग डीएलएड के 2016-17 के सत्र को शून्य करते हुए और इसके लिए दी गई सम्बद्धताओं को 2017-18 से प्रभावी मानने के लिए स्वविवेक से निर्णय ले सकता है। अपर मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह ने निर्देश दिए हैं कि 2016-17 का सत्र शून्य करने से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पालन होगा और सत्र नियमित हो जाएगा। वहीं कॉलेजों या विद्यार्थियों को इससे कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा और 2017-18 तक के लिए जारी सभी सम्बद्धता वाले शैक्षिक संस्थानों को एक समान विद्यार्थी उपलब्ध हो सकेंगे।
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  • Web Title:dled session 2016-17 announced zero
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