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चंदा जइहो बिरहन के देश...

- भोजपुरी गायिका माधुरी वर्मा ने अपनी आवाज से सरों से सजाई एसएनए की शाम, नृत्यांगनाओं ने पेश किया आकर्षक नृत्य - भोजपुरी के साथ अवधी गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों ने श्रोताओं का किया मनोरंजन, कलाकारों ने बटोरीं तालियां लखनऊ। कार्यालय संवाददाताभोजपुरी गानों की धुन..बीच में अवधी गीतों बयार और आकर्षक नृत्य की चमक। यह खूबसूरत नजारा शुक्रवार को संगीत नाटक अकादमी में के बाल्मीकि रंगशाला सभागार में देखने को मिला। भोजपुरी गायिका माधुरी वर्मा ने अपनी गायिकी का जलवा बिखेरा तो उनके गीतों पर थिरककर नृत्यांगनाओं ने शाम को और हसीन बना दिया। दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। माधुरी वर्मा ने 'निबिया की डार भइया, डारो है हिंडोलना' देवीगीत सुनाकर सुरमयी शाम का आगाज किया। इसके बाद माधुरी ने अवधी गीत 'आधी रात को आए बलमजी, शोर भई हमरे अंगना में' को पेशकर शाम को परवान चढ़ाया। सभागार में मौजूद दर्शकों के उत्साह से गायिका भी जोश में थी। उन्होंने कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए 'रेलया बैरन पिया को दिए जाए रे', 'चंदा जइहो बिरहन के देश', 'कांच ही बांस के बंहगिया', रंगीला मोरा बालमा और 'आजु के दिनवा सुहावन' को सुनकार अपनी आवाज का जादू बिखेरा। मंच पर ऋचा और छाया ने माधुरी के साथ सहगायिका की भूमिका निभाई। वहीं मंच पर गीतों पर मंजू, नीतिका व रीना ने नृत्य पेश किया। इसके अलावा प्रदीप कुमार ढोलक पर, ऑक्टोपैड रामकुमार, ऑर्गन पर अरविंद, कमल कुमार ने बांसुरी पर, रफीक ने शहनाई पर संगत की।

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