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रिवर फ्रंट परियोजना में करोड़ों का घोटाला करने वाले 8 इंजीनियरों के खिलाफ मुकदमा

फ्लैग: शासन के आदेश पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने गोमतीनगर थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट - लोक सेवक द्वारा सरकारी धन का गबन, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज हुई एफआईआर लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता सपा सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘गोमती रिवर फ्रंट में हुए करोड़ों के घोटाले की पहली एफआईआर सोमवार को गोमतीनगर थाने में दर्ज की गई। शासन के आदेश पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने यह रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें सिंचाई विभाग के आठ इंजीनियरों को नामजद किया गया है। रिवर फ्रंट परियोजना में हुए घोटाले की शुरुआती जांच न्यायमूर्ति आलोक सिंह की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने की थी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई तय करने का आदेश दिया था। खन्ना कमेटी ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश भी की है जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंजूर कर ली है। यह है मामला वर्ष 2014-15 में गोमती नदी चैनलाइजेशन परियोजना के लिए 656 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। लेकिन, इस पर 1,513 करोड़ रुपये खर्च हुए। इस राशि का 95 प्रतिशत हिस्सा खर्च होने के बावजूद परियोजना का सिर्फ 60 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ।मुख्यमंत्री ने दौरे में पकड़ी थी खामियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती रिवर फ्रंट के अपने दौरे में तमाम खामियां पकड़ी थी। 4 अप्रैल को सीएम ने न्यायमूर्ति आलोक सिंह की अध्यक्षता में एक जांच समिति बना कर जांच करने को कहा। इस कमेटी में विशेषज्ञ के रूप में रिवराइन इंजीनियरिंग एवं वित्त संकाय के प्रोफेसरों को भी शामिल किया गया। जांच कमेटी ने इस परियोजना में विभिन्न अनियमित्ताओं का उल्लेख करते हुए दोषी अधिकारियों के बारे में अपना निष्कर्ष दिया। 16 मई को कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी। बाद में खन्ना कमेटी ने इस रिपोर्ट पर पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन व दीपक सिंघल समेत परियोजना से जुड़े शीर्ष अधिकारियों का भी पक्ष लिया था। संगीन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा प्रमुख सचिव सुरेश चन्द्रा ने सोमवार को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता व विभागाध्यक्ष को पत्र भेजकर मामले की जांच में दोषी पाए गए अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद अधिशासी अभियंता, शारदा नहर लखनऊ खण्ड ने गोमतीनगर थाने पहुंच कर तहरीर दी। सीओ गोमतीनगर सत्यसेन यादव ने बताया कि इस मामले में आईपीसी की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा सरकारी धन का गबन), 420 (धोखाधड़ी) व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इनके खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा - गुलेश चन्द्र, तत्कालीन मुख्य अभियंता, (अब सेवानिवृत्त) - एसएन शर्मा, तत्कालीन मुख्य अभियंता - काजिम अली, तत्कालीन मुख्य अभियंता - शिव मंगल यादव, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अब सेवानिवृत्त) - अखिल रमन, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अब सेवानिवृत्त)- कमलेश्वर सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता - रूप सिंह यादव, तत्कालीन अधिशासी अभियंता/अधीक्षण अभियंता (अब सेवानिवृत्त)- सुरेन्द्र यादव, अधिशासी अभियंता
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