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सरकारी वकीलों की पुनरीक्षित सूची जारी करने को सरकार को मिला अंतिम मौका

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य विधि अधिकारियों की सूची रिव्यू कर नई सूची जारी करने के मामले में राज्य सरकार को 23 अक्टूबर तक का समय दिया है। साथ ही न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कि आगे और समय नहीं दिया जाएगा। अगली सुनवाई तक सूची जारी नहीं होती तो न्यायालय उचित आदेश पारित करेगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ व न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की खंडपीठ ने अधिवक्ता महेंद्र सिंह पवार की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर दिया। सुनवाई के दौरान याचिका में इंटरवीन अप्लिकेशन देने वाली अधिवक्ता मनीषा श्रीवास्तव और मंजू शर्मा की ओर से और समय दिए जाने का विरोध करते हुए कहा गया कि सरकार को पर्याप्त समय दिया जा चुका है, मामले को आगे बढाने से पहले सरकार पर हर्जाना लगाया जाए। हालांकि न्यायालय ने फिलहाल हर्जाना न लगाते हुए, उपरोक्त आदेश दिए। वहीं महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह से न्यायालय को बताया कि रिव्यू के लिए सरकार ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी जिसने अपनी कवायद पूरी कर ली है। उन्होंने कहा कि प्रमुख सचिव विधि उमेश कुमार शहर से बार थे जिसके चलते न्यायालय में प्रगति रिपोर्ट दाखिल नहीं हो पाई। महाधिवक्ता ने स्वयं सुनवाई को 23 अक्टूबर तक टालने की गुजारिश की और अग्रिम सुनवाई पर न्यायालय के आदेश के अनुरूप रिपेार्ट दाखिल करने का आश्वासन दिया। जिस पर न्यायालय ने मामले की अग्रिम सुनवाई के लिए 23 अक्टूबर की तिथि नियत कर दी। उल्लेखनीय है कि 21 जुलाई को उक्त मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पाया था कि 7 जुलाई 2017 को जारी सरकारी वकीलों की सूची में गंभीर प्रकियात्मक खामियां थीं। जिसके बाद न्यायालय ने सरकार को सूची रिव्यू करने का आदेश दिया था।

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