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जीवन का लक्ष्य भोग नही भजन है

लखनऊ। हिन्दुस्तान संवाद माधव मन्दिर डालीगंज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पाचवें दिन सोमवार को लालता प्रसाद शास्त्री ने कहा कि सभी मेँ ईश्वर का भाव रखना भी तप है। सभी में ईश्वर विराजते हैँ ऐसा अनुभव करना महान तप है अर्थात् अन्तःकरण की पवित्रता से हृदय मेँ सदा सर्वदा शान्ति और प्रसन्नता रहेगी। प्रिय और सत्य बोलना वाणी का तप है। पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा आदि शरीर सम्बन्धी तप हैं। उन्होंने कहा कि मानव जीवन तपस्या के लिए है। जो तप नहीँ करता उसका पतन होता है। मानव जीवन का लक्ष्य भोग नहीं, भजन है, ईश्वर भजन है, समभाव और सद्भाव सिद्ध करने के लिए सत्संग की जरुरत है।
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