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हे प्रभु! सीटों की नीलामी में जेब काट रहा रेलवे

रेलवे।

शताब्दी, राजधानी जैसी वीआईपी ट्रेनों की सीटें नीलाम होने का असर यात्रियों की जेब पर सीधे पड़ रहा है। फ्लैक्सी फेयर व्यवस्था में मूल किराए से ढाई से तीन सौ रुपए अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं। हास्यास्पद बात यह है कि वेटिंग टिकट भी हाई रेट पर जारी हो रहे हैं। रेलवे के नियम के तहत शताब्दी, राजधानी एक्सप्रेस में वेटिंग टिकटधारी चढ़ भी नहीं सकते। वेटिंग टिकट पर ट्रेन में पकड़े जाने पर दोगुना जुर्माने की व्यवस्था है। रेलवे के इस अनूठे कानून से इन ट्रेनों में सफर करने वालों को अधिक पैसा देना मजबूरी बन चुका है।
रेलवे ने कुछ महीने पहले ही शताब्दी, राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों में हवाई जहाज की तर्ज पर फ्लैक्सी फेयर भाड़ा व्यवस्था को लागू कर दिया था। इसका मतलब कम सीटें बचीं तो अधिक भाड़ा। इसका असर आम यात्रियों की जेबों पर पड़ने लगा। कई बार तो टिकट वापसी में लोगों को बिना सफर तीन से चार सौ रुपए कम करके रिफंड मिलता है। कुल मिलाकर रेलवे के इस अनूठे कानून से आम यात्रियों का सफर का मजा किरकिरा होता है क्योंकि उनकी जेब पर किराए की मार पड़ रही है। रेलवे अधिकारी इस अनूठे कानून को जनहित में बताते हैं। उनका तर्क है कि इस व्यवस्था से ही अन्य संसाधान जुटाए जाते हैं। समाज के कुछ वर्ग पर ही इसका असर होता है जबकि बहुसंख्यकों को इसका फायदा दिया जाता है। 
हाई रेट पर टिकट, वेटिंग में यात्रा पर दोगुना जुर्माना
रेलवे नियम के मुताबिक शताब्दी, दूरंतो और राजधानी एक्सप्रेस में एक भी वेटिंगधारी ट्रेन के किसी कूपे में नहीं चढ़ सकता है जबकि अन्य ट्रेनों में रेलवे काउंटर से जारी वेटिंग टिकट पर उसी क्लास के किसी कूपे में चढ़ सकते हैं। शताब्दी में वेटिंग टिकट पर चढ़े तो टीटीई टिकट पर अंकित राशि के बराबर जुर्माना लेगा। इसका मतलब यह हुआ कि बिना सीट मिले आपको ढाई गुना भाड़ा देना पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर कानपुर से दिल्ली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस का किराया 880 रुपए है। आपका वेटिंग टिकट कम से कम लगभग 1100 रुपए में बनेगा। यही नहीं, इस वेटिंग टिकट पर आप कूपे में चढ़े तो टीटी बगैर टिकट मान 1100 रुपए जुर्माना लेगा। न दिया तो जेल जाना तय है। अब आपको बिना सीट मिले 2200 रुपए देने पड़े, जबकि मूल किराया 880 रुपए ही है। 
गोमती के एसी चेयरकार का भाड़ा 610 रुपए
कानपुर से नई दिल्ली तक जाने वाली गोमती एक्सप्रेस के एसी चेयरकार का भाड़ा 610 रुपए है। जबकि स्वर्ण शताब्दी का कानपुर से दिल्ली एसी चेयरकार का 880 रुपए है। यदि खाना लेने की व्यवस्था वैकल्पिक होती है तो आप खाना नहीं लेंगे तो सौ रुपए ही कम होंगे। जबकि गोमती और शताब्दी एक्सप्रेस के पहुंचाने में मात्र आधे घंटे का ही अंतर है। 
छह साल में लगभग दोगुना हुआ भाड़ा
वर्ष 2012 में कानपुर से दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस भाड़ा एसी चेयरकार--- 585 रुपए
वर्ष 2013 में लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस का भाड़ा एसी चेयरकार---------- 605 रुपए
वर्ष 2014 --------------------------------------------------------------------- 680 रुपए
वर्ष 2015 --------------------------------------------------------------------- 760 रुपए
वर्ष 2016 --------------------------------------------------------------------- 795 रुपए
वर्ष 2017 --------------------------------------------------------------------- 880 रुपए
(नोट- किराया रेलवे रिकार्ड के तहत। फर्स्ट एसी का भाड़ा जस्ट दोगुना। इसी हिसाब से बढ़ा। फ्लैक्सी फेयर व्यवस्था शताब्दी एक्सप्रेस में बीते अप्रैल से प्रभावी)
जानिए कितना पड़ा आपकी जेब पर भार
कानपुर शताब्दी दिल्ली का भाड़ा एसी चेयरकार---------- 785 रुपए
एक्जीक्यूटिव क्लास---------------------------------------- 1615 रुपए
(नोट- फ्लैक्सी फेयर में भाड़ा एसी चेयरकार में 1090 रुपए तो एक्जीक्यूटिव में 3100 रुपए तक प्रति यात्री)
स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस कानपुर से दिल्ली भाड़ा एसी चेयरकार-- 880 रुपए
एक्जीक्यूटिव क्लास------------------------------------------------ 1705 रुपए
(नोट- फ्लैक्सी फेयर में एसी चेयरकार का भाड़ा 1055 रुपए तक एवं एक्जीक्यूटिव में 2990 रुपए तक)
एडवांस प्लानिंग से जर्नी करने वालों को वेटेज मिलेगा ही
एनसीआर सीपीआरओ , जीके बंसल का कहना है कि जो लोग एडवांस प्लानिंग करके रेल टिकट बनवाते हैं। ऐसे लोगों को कुछ न कुछ तो रेलवे वेटेज देगा ही। रही बात फ्लैक्सी फेयर की तो इससे होने वाली आमदनी का लाभ दूसरी सुविधाओं में यात्रियों को ही दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर कानपुर से लखनऊ मेमू बीस रुपए में पहुंचाती है। जनहित में ही रेलवे सारे कानून बनाती है। इसमें हो सकता है कि कुछ लोगों पर इसका असर पड़े। तभी तो यह व्यवस्था फुल्ली एसी ट्रेनों में ही प्रभावी की गई है।

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  • Web Title: Railways cutting pockets in auction of seats
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